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सोनीपत की डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में MSME पर मंथन, श्रम कानून और सामाजिक सुरक्षा पर हुई चर्चा

3 नवंबर 2026 : हरियाणा के सोनीपत स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के सामने आ रही चुनौतियों पर एक राउंड टेबल सम्मेलन आयोजित किया गया। सेंटर फॉर लेबर स्टडीज ने IIT दिल्ली के अटल इनक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें श्रम कानूनों, सामाजिक सुरक्षा और कारोबार करने में आसानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

MSME से जुड़ी चुनौतियों पर हुआ विचार-विमर्श

सम्मेलन का विषय था- ‘MSMEs and Emerging Challenges: Labour Laws, Social Protection and Ease of Doing Business’। इसका उद्देश्य शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को एक साझा मंच देना था, जहां वे MSME क्षेत्र की मौजूदा और उभरती समस्याओं पर चर्चा कर सकें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति देविंदर सिंह ने की। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि छोटे और मध्यम उद्यमों के विकास के लिए श्रम कानूनों का अनुपालन, कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझना जरूरी है।

हरभजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल

XLRI दिल्ली-NCR के मुख्य रणनीति एवं मानव संसाधन अधिकारी हरभजन सिंह ने सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। वहीं, IIT दिल्ली के अटल इनक्यूबेशन सेंटर के आलोक पांडे और राय इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश छाबड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में MSME टर्नअराउंड कोच और बिजनेस कंसल्टेंट रजनीश शर्मा, IIT दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) में इम्पैक्ट एंड पार्टनरशिप्स के वरिष्ठ प्रबंधक नीलाभ पाठक और ओकेड्राइवर स्मार्ट डैशकैम्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक तुषित गुप्ता ने भी विशेषज्ञों के रूप में अपने विचार रखे।

श्रम कानून और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर

सम्मेलन में MSME क्षेत्र के सामने आने वाली नियामकीय और व्यावसायिक चुनौतियों पर चर्चा हुई। श्रम कानूनों का पालन छोटे उद्यमों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है। इसके साथ ही कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने और कारोबारी गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने के बीच संतुलन बनाने पर भी विचार किया गया।

विशेषज्ञों ने उद्योग, शिक्षा और नीति से जुड़े लोगों के बीच संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से उद्यमियों और विद्यार्थियों को उद्योग जगत की व्यावहारिक समस्याओं को समझने का अवसर मिलता है।

विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरतों की समझ मिलेगी

कुलपति देविंदर सिंह ने कहा कि श्रम कानूनों, सामाजिक सुरक्षा और उद्यमिता से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर सार्थक चर्चा वर्तमान समय में जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल विद्यार्थियों और शोधार्थियों को व्यावहारिक अनुभव और उद्योग की बदलती जरूरतों को समझने में मदद करती हैं।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार अशुतोष मिश्रा ने कहा कि संस्थान अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। उनके अनुसार, ऐसे सम्मेलन विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच सहयोग और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं।

कार्यक्रम के आयोजन में सेंटर फॉर लेबर स्टडीज की निदेशक एवं आयोजन सचिव बलविंदर कौर और सहायक प्रोफेसर डॉ. मणि यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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