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करनाल में धान बेचने के 10 दिन बाद भी किसानों को नहीं मिला पैसा, धीमे उठान से भुगतान अटका

3 नवंबर 2026 : हरियाणा के करनाल जिले में धान की खरीद के बाद भुगतान में हो रही देरी से किसान आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। सरकार की ओर से खरीद के 72 घंटे के भीतर किसानों के खातों में भुगतान भेजने का दावा किया जाता है, लेकिन जिले में कई किसानों को धान बेचने के 10 दिन से अधिक समय बाद भी पैसा नहीं मिला है। मंडियों से खरीदे गए धान का धीमा उठान भुगतान में देरी की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

करनाल में 21.38 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार शाम तक करनाल जिले की मंडियों में 85,200 किसानों से कुल 6.65 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका था। इसमें से 5.38 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई, जबकि केवल 4.27 लाख मीट्रिक टन का उठान किया जा सका।

जिले में किसानों को कुल करीब 1,324 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था। आई-फॉर्म जारी होने के बाद लगभग 979.72 करोड़ रुपये के बिल मंजूर किए गए। इनमें से करीब 958.34 करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं, जबकि 21.38 करोड़ रुपये का भुगतान अभी लंबित है।

10 दिन से अधिक समय से भुगतान का इंतजार

इंद्री ब्लॉक के किसान वरिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने 9 अक्टूबर को अपनी धान की फसल बेची थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें करीब 6 लाख रुपये का भुगतान नहीं मिला है। किसानों का कहना है कि फसल बेचने के बाद समय पर पैसा नहीं मिलने से रोजमर्रा के खर्चों और अगली फसल की तैयारी पर असर पड़ रहा है।

भारतीय किसान यूनियन (सर छोटूराम) के प्रवक्ता बहादुर सिंह मेहला ने भी भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि कई किसानों को खरीद पूरी होने के 15 दिन से अधिक समय बाद भी भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने सरकारी भुगतान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को धान के उठान और भुगतान, दोनों स्तरों पर परेशानी हो रही है।

तीन एजेंसियां कर रहीं धान की खरीद

करनाल जिले में धान की सरकारी खरीद तीन एजेंसियों के माध्यम से की जा रही है। इनमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन और हैफेड शामिल हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 2.85 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा और 2.09 लाख मीट्रिक टन का उठान किया। इस एजेंसी ने किसानों को करीब 469 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

हैफेड ने 1.23 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की, जिसमें से 1.05 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ और करीब 247.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं, हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने 1.49 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा और 1.13 लाख मीट्रिक टन का उठान किया। एजेंसी की ओर से करीब 262.84 करोड़ रुपये किसानों को दिए गए हैं।

तकनीकी दिक्कतों से धीमा पड़ा उठान

ट्रांसपोर्टरों ने धान के धीमे उठान के पीछे तकनीकी समस्याओं और गेट पास जारी करने की लंबी प्रक्रिया को जिम्मेदार बताया है। उनके अनुसार, मंडी से धान लेकर निकलने वाले वाहनों के लिए पहले अधिकारियों से मंजूरी लेनी पड़ती है। इसके बाद मिलों में धान उतारने के बाद मिलर्स को पोर्टल पर जानकारी दर्ज करनी होती है। इस प्रक्रिया में लगने वाला समय वाहनों की आवाजाही को प्रभावित कर रहा है।

धीमे उठान के कारण मंडियों में खरीदे गए धान का स्टॉक जमा हो रहा है। इसका असर आगे की खरीद और भुगतान प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

उपायुक्त ने अधिकारियों को दिए निर्देश

करनाल के उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने कहा कि खरीद एजेंसियों को धान का उठान तेज करने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से मंडियों में खरीद प्रक्रिया की गति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल, किसानों की मांग है कि खरीदे गए धान का उठान जल्द कराया जाए और लंबित भुगतान उनके बैंक खातों में पहुंचाया जाए, ताकि उन्हें फसल बेचने के बाद आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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