1 अक्टूबर 2026 शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पुत्रवधू स्मिता ठाकरे ने बिहार के गया में अपने ससुर बालासाहेब ठाकरे और अपने पिता मधुकर चित्रे के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया। पितृपक्ष के दौरान गया पहुंचीं स्मिता ठाकरे ने विष्णुपद मंदिर में धार्मिक विधि-विधान के साथ यह अनुष्ठान किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान और तर्पण की प्रक्रिया पूरी की गई।
विष्णुपद मंदिर में किया पिंडदान
स्मिता ठाकरे मंगलवार को गया पहुंचीं और विष्णुपद मंदिर में अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान किया। उनके साथ आचार्य भी मौजूद थे। पूजा के दौरान तर्पण, पूजन और श्राद्ध की रस्में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुईं।
स्मिता ठाकरे ने इस अवसर को भावुक और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि गया की पवित्र भूमि पर आकर अपने पितरों के लिए प्रार्थना करना उनके लिए विशेष अनुभव है। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की।
बालासाहेब ठाकरे के लिए विशेष प्रार्थना
पिंडदान के दौरान स्मिता ठाकरे ने बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर सामने रखकर भी धार्मिक विधि पूरी की। उन्होंने अपने ससुर के साथ अपने पिता मधुकर चित्रे के लिए भी श्राद्ध और तर्पण किया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से उनकी इच्छा थी कि वह गया आकर अपने पितरों के लिए पिंडदान करें। गुरु के आशीर्वाद से उनकी यह इच्छा पूरी हुई और उन्हें इससे आत्मिक संतोष मिला।
महिलाओं के पिंडदान को लेकर भी कही बात
स्मिता ठाकरे ने महिलाओं द्वारा पिंडदान किए जाने के सवाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें कहा गया था कि महिलाएं पिंडदान नहीं करतीं। इसके बाद उन्होंने आचार्यों से इस विषय में जानकारी ली।
उनके अनुसार, आचार्यों ने माता सीता द्वारा राजा दशरथ के लिए गया में पिंडदान किए जाने की धार्मिक कथा का उल्लेख किया। इसके बाद उन्हें विश्वास हुआ कि महिलाएं भी अपने पितरों के लिए यह धार्मिक कर्मकांड कर सकती हैं।
बिहार और महाराष्ट्र के सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा
गया में बातचीत के दौरान स्मिता ठाकरे ने बिहार और महाराष्ट्र के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों की भाषा और पहनावे में अंतर होने के बावजूद उनकी सांस्कृतिक जड़ें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान भारत की महत्वपूर्ण विशेषता है।
समाजसेवा को लेकर भी दिया बयान
स्मिता ठाकरे ने अपने सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से समाजसेवा से जुड़ी हुई हैं और आगे भी लोगों की मदद से जुड़े कार्य करती रहेंगी।
राजनीति में आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति में आना-जाना परिस्थितियों पर निर्भर करता है, जबकि समाजसेवा करना उनके हाथ में है। उन्होंने फिलहाल समाजसेवा को अपनी प्राथमिकता बताया।
पितृपक्ष में गया पहुंच रहे श्रद्धालु
स्मिता ठाकरे ऐसे समय गया पहुंचीं जब पितृपक्ष मेला चल रहा है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने गया पहुंचते हैं।
विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी और विभिन्न पिंडवेदियों पर इन दिनों धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गया में पिंडदान और तर्पण का पूर्वजों की शांति से विशेष संबंध माना जाता है।
कुल मिलाकर, पितृपक्ष के दौरान स्मिता ठाकरे ने गया के विष्णुपद मंदिर में अपने ससुर और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे तथा अपने पिता मधुकर चित्रे के लिए श्राद्ध और पिंडदान किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के पिंडदान, बिहार-महाराष्ट्र के सांस्कृतिक संबंधों और समाजसेवा को लेकर भी अपने विचार साझा किए।
