26 मई 2026 : आयुष क्षेत्र को मजबूत बनाने और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से HSSC और CBPACS ने साझेदारी की है। इस पहल को पारंपरिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई संभावनाओं के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, दोनों संस्थाएं आयुष क्षेत्र में प्रशिक्षण, शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगी। इसका उद्देश्य युवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
आयुष में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां शामिल हैं, जिनकी लोकप्रियता हाल के वर्षों में बढ़ी है।
सूत्रों के मुताबिक, इस सहयोग के तहत प्रशिक्षण मॉड्यूल, प्रमाणन कार्यक्रम और उद्योग-आधारित कौशल विकास गतिविधियों पर जोर दिया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का संतुलित उपयोग लोगों को वैकल्पिक उपचार विकल्प प्रदान कर सकता है।
भारत में आयुष क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयुष क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग बढ़ रही है, खासकर वेलनेस, प्राकृतिक उपचार और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में।
कौशल विकास से जुड़े जानकारों का कहना है कि उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं के रोजगार अवसरों को बढ़ा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस साझेदारी के तहत शोध, इंटर्नशिप और व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
हरियाणा समेत कई राज्यों में आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा संस्थानों का विस्तार देखा जा रहा है।
फिलहाल, दोनों संस्थाएं सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही हैं और आने वाले समय में नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक कौशल विकास को जोड़कर स्वास्थ्य क्षेत्र में नए अवसर और रोजगार संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
