26 मई 2026 : द्वारका में स्थायी डॉग शेल्टर बनाने की योजना अब वास्तविकता के और करीब पहुंचती दिखाई दे रही है। प्रशासनिक स्तर पर परियोजना को लेकर हुई प्रगति के बाद पशु कल्याण और आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित डॉग शेल्टर का उद्देश्य आवारा कुत्तों के लिए सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रमों को व्यवस्थित करना तथा मानव-पशु संघर्ष को कम करना है।
दक्षिण दिल्ली नगर निगम और संबंधित एजेंसियां परियोजना की व्यवहारिकता, भूमि और संचालन व्यवस्था जैसे पहलुओं पर काम कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, शेल्टर में चिकित्सा सुविधा, भोजन, देखभाल और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाएं भी शामिल की जा सकती हैं।
पशु कल्याण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आवारा कुत्तों को पकड़ना स्थायी समाधान नहीं होता। नसबंदी, टीकाकरण और सुरक्षित आश्रय जैसी व्यवस्थाएं दीर्घकालिक समाधान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं।
पशु कल्याण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार और वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी माना जाता है।
स्थानीय निवासियों के बीच इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान मान रहे हैं, जबकि कुछ ने रखरखाव और स्थान चयन को लेकर सवाल उठाए हैं।
दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर समय-समय पर प्रशासन और अदालतों के स्तर पर चर्चा होती रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शेल्टर सही तरीके से संचालित किया जाए, तो इससे सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों को लाभ मिल सकता है।
भारत के कई शहर अब आधुनिक पशु आश्रय केंद्र और वैज्ञानिक पशु प्रबंधन मॉडल विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
फिलहाल, परियोजना से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं और आने वाले समय में निर्माण एवं संचालन संबंधी अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों में पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बनता जा रहा है।
