26 अगस्त 2026 हरियाणा के खिलाड़ियों से जुड़ी एक स्टडी में विटामिन D की कमी को लेकर चिंता बढ़ाने वाला आंकड़ा सामने आया है। रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS) के शोध में पाया गया कि करीब 40 प्रतिशत खिलाड़ियों में विटामिन D का स्तर पर्याप्त नहीं था।
खिलाड़ियों में विटामिन D की कमी
स्टडी के मुताबिक, बड़ी संख्या में खिलाड़ियों में विटामिन D की कमी या अपर्याप्त स्तर पाया गया। खिलाड़ियों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि विटामिन D शरीर में हड्डियों और मांसपेशियों के सामान्य स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शोधकर्ताओं ने खिलाड़ियों के पोषण, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है।
खेल प्रदर्शन पर पड़ सकता है असर
विटामिन D की कमी लंबे समय तक रहने पर हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। खिलाड़ियों के लिए मजबूत हड्डियां और मांसपेशियां महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि उन्हें नियमित रूप से कठिन प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से गुजरना पड़ता है।
हालांकि, किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन पर केवल विटामिन D के स्तर के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। प्रदर्शन पर पोषण, प्रशिक्षण, नींद और अन्य स्वास्थ्य कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।
हरियाणा के खिलाड़ियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह स्टडी?
हरियाणा देश के प्रमुख खेल राज्यों में शामिल है और यहां से बड़ी संख्या में खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।
ऐसे में खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और पोषण की नियमित जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। स्टडी से यह संकेत मिलता है कि खेल प्रशिक्षण के साथ खिलाड़ियों के पोषण और माइक्रोन्यूट्रिएंट स्तर पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
नियमित जांच की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ समय-समय पर स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। जिन खिलाड़ियों में विटामिन D की कमी पाई जाती है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार उचित उपचार या सप्लीमेंटेशन दिया जा सकता है।
खुद से हाई-डोज विटामिन D लेना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि जरूरत से ज्यादा सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है।
PGIMS की स्टडी से सामने आया अहम मुद्दा
रोहतक PGIMS का अध्ययन खिलाड़ियों के बीच पोषण संबंधी कमियों की पहचान की आवश्यकता को रेखांकित करता है। खेल संस्थानों और कोचिंग सिस्टम में खिलाड़ियों की डाइट और स्वास्थ्य की निगरानी को प्रशिक्षण व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, रोहतक PGIMS की स्टडी में करीब 40 प्रतिशत हरियाणा के खिलाड़ियों में विटामिन D की कमी या अपर्याप्त स्तर पाए जाने की बात सामने आई है। यह आंकड़ा खिलाड़ियों के नियमित स्वास्थ्य और पोषण मूल्यांकन की जरूरत को उजागर करता है।
