24 सितंबर 2026 एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला स्कीट टीम के ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद हरियाणा के कर्नाल में खुशी का माहौल है। 22 वर्षीय निशानेबाज Raiza Dhillon ने Parinaaz Dhaliwal और Maheshwari Chauhan के साथ मिलकर महिला स्कीट टीम स्पर्धा में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया। इस उपलब्धि के बाद कर्नाल के Shamgarh गांव स्थित उनके घर में परिवार और ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया।
Shamgarh गांव में खुशी का माहौल
Raiza Dhillon का परिवार कर्नाल से करीब 10 किलोमीटर दूर Shamgarh गांव में रहता है। एशियन गेम्स में उनकी सफलता की खबर मिलते ही घर पर रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का पहुंचना शुरू हो गया। परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया।
Raiza की इस सफलता से न सिर्फ उनका परिवार बल्कि पूरे गांव में गर्व का माहौल है। महिला स्कीट टीम में भारत के लिए यह एशियन गेम्स का पहला पदक भी है।
पिता और दादा से मिली निशानेबाजी की विरासत
Raiza की सफलता के पीछे उनके परिवार की कई पीढ़ियों से चली आ रही निशानेबाजी की परंपरा भी जुड़ी हुई है। उनके पिता Ravijit Singh Dhillon ने बताया कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से बंदूकों के प्रति रुचि रही है।
परिवार में मौजूद इस विरासत को Raiza के पिता ने आगे बढ़ाया और बाद में उन्होंने अपनी बेटी को भी निशानेबाजी की ओर प्रेरित किया। पिता का कहना है कि Raiza ने इस विरासत को उनसे कहीं आगे पहुंचाया है।
12 साल की उम्र में पहली बार संभाली एयर राइफल
Raiza ने कम उम्र में ही निशानेबाजी की शुरुआत की थी। उन्होंने 12 साल की उम्र में पहली बार एयर राइफल संभाली और 15 साल की उम्र में स्कीट शूटिंग को गंभीरता से अपनाया।
इसके बाद उन्होंने जूनियर और सीनियर स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। परिवार के मुताबिक, Raiza बचपन से ही मेहनती रही हैं और उन्होंने अपनी खेल यात्रा में कड़ी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया।
जूनियर स्तर पर भी हासिल की बड़ी उपलब्धियां
Raiza Dhillon का अंतरराष्ट्रीय करियर भी उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने 2021 में लीमा, पेरू में आयोजित Junior World Championship में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद 2023 में कोरिया में आयोजित Junior World Championship में उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया।
वहीं 2025 के Junior World Cup में भी Raiza ने दो सिल्वर मेडल जीते। इसके अलावा वह राष्ट्रीय और सीनियर राष्ट्रीय स्तर पर भी खिताब जीत चुकी हैं। उनके नाम 122 अंक का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज है।
परिवार को गोल्ड की उम्मीद थी
Raiza के परिवार के लिए ब्रॉन्ज मेडल बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उनके पिता ने बताया कि उन्हें गोल्ड मेडल की भी उम्मीद थी। उनके मुताबिक Raiza गोल्ड से केवल एक अंक पीछे रह गईं।
इसके बावजूद परिवार उनकी उपलब्धि से बेहद खुश है और इसे उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मान रहा है।
मां हैं गांव की सरपंच
Raiza की मां Gul Dhillon Shamgarh गांव की सरपंच हैं। खेल के साथ-साथ परिवार का गांव से भी मजबूत जुड़ाव है। एशियन गेम्स में बेटी की उपलब्धि के बाद गांव में भी लोगों ने खुशी जताई और परिवार को बधाई दी।
परिवार का कहना है कि Raiza के लौटने पर जश्न आगे भी जारी रहेगा।
ओलंपिक पदक है अगला सपना
Raiza के परिवार की नजर अब उनके अगले लक्ष्य पर है। एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद उनका ध्यान आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है।
परिवार के मुताबिक, Raiza का अंतिम सपना ओलंपिक में हिस्सा लेकर पदक जीतना है। वह अभी केवल 22 वर्ष की हैं और परिवार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगी।
महिला स्कीट शूटिंग में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि
Raiza Dhillon, Parinaaz Dhaliwal और Maheshwari Chauhan की टीम का ब्रॉन्ज मेडल भारतीय शूटिंग के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। तीनों ने मिलकर एशियन गेम्स में महिला स्कीट टीम स्पर्धा में भारत को पहला पदक दिलाया। इस उपलब्धि ने Raiza की व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ भारतीय महिला स्कीट शूटिंग को भी नई पहचान दी है।
