16 अक्तूबर 2026: पंजाब की पारंपरिक सर्कल स्टाइल कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए खेल जगत से जुड़े खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, आयोजकों और प्रमोटरों ने एक रोडमैप तैयार किया है। इस पहल का उद्देश्य पंजाब के गांवों और ग्रामीण खेल मैदानों में लोकप्रिय इस खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना और भविष्य में एशियाई खेलों तथा ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजनों में शामिल कराने की दिशा में प्रयास करना है। इसके लिए वर्ष 2027 से 2036 तक का प्रस्तावित रोडमैप तैयार किया गया है।
सर्कल स्टाइल कबड्डी पंजाब की पारंपरिक खेल संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह खेल अपनी शारीरिक ताकत, तेज मुकाबलों और रक्षात्मक कौशल के लिए जाना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसके टूर्नामेंट बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित करते हैं। हालांकि, पंजाब में लोकप्रियता के बावजूद इस प्रारूप की अंतरराष्ट्रीय पहुंच सीमित है। खेल से जुड़े लोगों का मानना है कि इसे वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए केवल लोकप्रियता पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था, नियमित प्रतियोगिताएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किए जाने वाले नियम भी जरूरी हैं।
प्रस्तावित रोडमैप में खेल से जुड़े सभी पक्षों को मिलकर काम करने पर जोर दिया गया है। इसमें खिलाड़ियों, कोचों, कमेंटेटरों, आयोजकों और खेल प्रमोटरों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य सर्कल कबड्डी को पारंपरिक आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय एक व्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में विकसित करना है।
खेल प्रमोटर मनमोहन सिंह ग्रेवाल, जिन्हें मोहना जोधा के नाम से भी जाना जाता है, ने कहा कि सर्कल कबड्डी में अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को आकर्षित करने की क्षमता है। इसके लिए पेशेवर ढांचे, एक समान नियमों और अधिक देशों की भागीदारी की जरूरत है। कबड्डी खिलाड़ी बलबीर सिंह ने भी इस खेल की पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए खिलाड़ियों के स्तर में सुधार और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के अवसर देने पर जोर दिया।
कमेंटेटर मखन अली के अनुसार, बेहतर कमेंट्री, उच्च गुणवत्ता वाले प्रसारण और नियमित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल को नए दर्शकों तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। वहीं, कबड्डी कोच मन्नू घलोटी ने जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण मजबूत करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, योग्य प्रशिक्षकों, व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, युवा खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिताओं और महिला खिलाड़ियों की भागीदारी को बढ़ावा देना भी आवश्यक है।
इस योजना में एक मजबूत वैश्विक महासंघ बनाने और खेल के नियमों को एक समान करने का प्रस्ताव भी शामिल है। अलग-अलग देशों में समान नियम लागू होने से खिलाड़ियों और टीमों को प्रतियोगिताओं की तैयारी में आसानी हो सकती है। इसके साथ ही खेल के प्रशासन में पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन और लागू विश्व डोपिंग रोधी मानकों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है। इन उपायों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल की विश्वसनीयता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
रोडमैप के तहत हर दो साल में सर्कल कबड्डी विश्व कप आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है। आयोजकों की इच्छा है कि अलग-अलग देश बारी-बारी से इस प्रतियोगिता की मेजबानी करें। नियमित विश्व कप आयोजित होने से अधिक देशों को अपनी टीमें तैयार करने, खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने और प्रायोजकों को आकर्षित करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, यह प्रस्ताव है और इसकी वास्तविक शुरुआत संबंधित खेल संगठनों की तैयारियों तथा स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।
इस दिशा में विदेशों में रहने वाले पंजाबी समुदाय की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्रिटेन में रहने वाले खेल प्रमोटर अजीब सिंह गरचा और टोरंटो में रहने वाले अहीब सिंह चाथा ने विदेशों में मौजूद पंजाबी समुदाय को इस अभियान से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया है। उनके अनुसार, विदेशों में खेल संस्थाओं के साथ संपर्क स्थापित करके और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं आयोजित करके सर्कल कबड्डी की पहुंच बढ़ाई जा सकती है।
इस प्रयास के लिए राष्ट्रीय शैली की कबड्डी का अनुभव भी उपयोगी माना जा रहा है। राष्ट्रीय शैली की कबड्डी को 1982 में नई दिल्ली एशियाई खेलों के दौरान प्रदर्शन खेल के रूप में प्रस्तुत किया गया था और 1990 में इसे एशियाई खेलों में शामिल किया गया। इसके बाद भारत ने इस प्रारूप में कई पदक जीते। हालांकि, सर्कल स्टाइल कबड्डी अलग प्रारूप है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए अलग से आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
खेल से जुड़े विशेषज्ञों और आयोजकों का मानना है कि सर्कल कबड्डी की पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए उसे अलग अंतरराष्ट्रीय खेल प्रारूप के रूप में विकसित करना चाहिए। एशियाई खेलों या ओलंपिक में जगह पाने के लिए संबंधित संस्थाओं के मानदंडों को पूरा करना और जरूरी मंजूरियां हासिल करना अनिवार्य होगा। केवल प्रदर्शन मुकाबले या किसी बड़े आयोजन में भागीदारी से इन खेलों में शामिल होने की गारंटी नहीं मिलती।
कुल मिलाकर, पंजाब की सर्कल स्टाइल कबड्डी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए 2027 से 2036 तक का प्रस्तावित रोडमैप तैयार किया गया है। समान नियम, मजबूत महासंघ, नियमित विश्व कप, बेहतर प्रसारण और विदेशी समुदायों की भागीदारी इस योजना के प्रमुख हिस्से हैं। अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि खेल से जुड़े संगठन इन प्रस्तावों को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करते हैं।
