16 अक्तूबर 2026: पंजाब के माझा क्षेत्र में एथलेटिक्स खिलाड़ियों की एशियाई खेलों जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में कम मौजूदगी ने खेल सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में आधुनिक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की कमी के कारण खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए घास और मिट्टी वाले ट्रैक पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए अमृतसर स्थित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU) ने अपने पुराने सिंथेटिक ट्रैक प्रोजेक्ट को दोबारा आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है।
माझा क्षेत्र में फिलहाल केवल एक सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक उपलब्ध बताया गया है, जो तरनतारन की पुलिस लाइंस में स्थित है। इस ट्रैक को स्थापित कराने में पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री मनोहर सिंह गिल की भूमिका रही थी। दूसरी ओर, अमृतसर की गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में प्रस्तावित सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण शुरू नहीं हो सका। इसके कारण विश्वविद्यालय के एथलीटों को अभी भी आधुनिक ट्रैक के बजाय घास वाले 400 मीटर ट्रैक पर अभ्यास करना पड़ रहा है। शहर के गुरु नानक स्टेडियम में भी मिट्टी वाला ट्रैक उपलब्ध है।
सिंथेटिक ट्रैक बनाने की योजना वर्ष 2019 में खेलो इंडिया योजना के तहत तैयार की गई थी। उस समय परियोजना की अनुमानित लागत 8.31 करोड़ रुपये तय की गई थी। इसमें से केंद्र सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय ने सात करोड़ रुपये देने की मंजूरी दी थी, जबकि बाकी राशि विश्वविद्यालय को वहन करनी थी। परियोजना के लिए पहली किस्त के रूप में लगभग 2.10 करोड़ रुपये जारी किए गए थे।
हालांकि, यह परियोजना निविदा प्रक्रिया के चरण में ही रुक गई। GNDU के खेल विभाग के निदेशक कंवर मंदीप सिंह के अनुसार, मंत्रालय ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए परियोजना रद्द कर दी थी। विश्वविद्यालय को मिली पहली किस्त की राशि तुरंत वापस कर दी गई। इसके बाद सिंथेटिक ट्रैक बनाने की योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
विश्वविद्यालय की मूल योजना में 400 मीटर का आधुनिक सिंथेटिक ट्रैक बनाने का प्रस्ताव था। इसमें सीधे हिस्से में 10 लेन और बाकी हिस्से में आठ लेन रखने की योजना थी। इसके अलावा, खिलाड़ियों के वार्म-अप के लिए अलग घुमावदार ट्रैक, लोहे की बाउंड्री और आधुनिक लाइटिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित थी। इन सुविधाओं के जरिए ट्रैक को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के योग्य बनाने का लक्ष्य रखा गया था।
सिंथेटिक ट्रैक की उपलब्धता एथलेटिक्स खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। आधुनिक ट्रैक पर धावक अपनी गति, समय और तकनीक को बेहतर तरीके से माप सकते हैं। इसके अलावा, उचित सतह पर नियमित अभ्यास करने से खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं की परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी करने में मदद मिल सकती है। घास या मिट्टी वाले मैदानों पर अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के समय सिंथेटिक ट्रैक की सतह के अनुसार खुद को ढालना पड़ सकता है।
GNDU के खेल विभाग के निदेशक के अनुसार, विश्वविद्यालय पुराने प्रोजेक्ट को फिर से आगे बढ़ाने में रुचि रखता है। विश्वविद्यालय परिसर में पहले से ही वेलोड्रोम, बहुउद्देशीय इनडोर जिम्नेजियम, हॉकी मैदान, स्विमिंग पूल और अन्य खेल सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक का निर्माण विश्वविद्यालय की खेल सुविधाओं में एक और महत्वपूर्ण सुविधा जोड़ सकता है।
माझा क्षेत्र में आधुनिक खेल सुविधाओं की कमी का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब में एथलेटिक्स की पुरानी परंपरा रही है। पहले इस क्षेत्र के धावकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल की थीं। लेकिन आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं, प्रशिक्षकों और प्रतियोगिता स्तर के अभ्यास स्थलों की उपलब्धता खिलाड़ियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यदि GNDU का सिंथेटिक ट्रैक प्रोजेक्ट दोबारा शुरू होता है, तो इससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य एथलीटों को भी लाभ मिलने की संभावना होगी। हालांकि, परियोजना को फिर से शुरू करने के लिए आवश्यक मंजूरी, बजट, तकनीकी प्रक्रिया और निर्माण की समयसीमा स्पष्ट होना अभी बाकी है।
कुल मिलाकर, माझा क्षेत्र में एथलेटिक्स सुविधाओं की कमी और एशियाई खेलों में धावकों की सीमित मौजूदगी ने आधुनिक खेल बुनियादी ढांचे की जरूरत को सामने रखा है। GNDU ने पुराने सिंथेटिक ट्रैक प्रोजेक्ट को दोबारा देखने की इच्छा जताई है। अब इस योजना को वास्तविकता में बदलने के लिए संबंधित मंत्रालय और विश्वविद्यालय के स्तर पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
