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पंजाब के जगशेर सिंह खंगूरा ने बैडमिंटन विश्व जूनियर चैंपियनशिप में भारत का पदक पक्का किया

16 अक्तूबर 2026: पंजाब के नाभा के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी जगशेर सिंह खंगूरा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पदक पक्का कर लिया है। उन्होंने मिस्र की राजधानी काहिरा में आयोजित बीडब्ल्यूएफ विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप के लड़कों के एकल वर्ग के क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे के युआन-स्यू झुआंग को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस जीत के साथ जगशेर ने प्रतियोगिता में कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित कर लिया है। अब उनकी नजर फाइनल में पहुंचकर स्वर्ण पदक जीतने पर है।

जगशेर ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में हार के करीब पहुंचने के बावजूद शानदार वापसी की। उन्होंने पहला गेम 6-15 से गंवा दिया था, लेकिन इसके बाद अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए मुकाबले में वापसी की। दूसरे गेम में उन्होंने 17-15 से जीत दर्ज की और निर्णायक गेम में 15-12 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह मैच लगभग 48 मिनट तक चला। इस जीत में उनकी धैर्यपूर्ण खेल शैली, बेहतर नेट प्ले और शटल को सही जगह पर रखने की क्षमता ने अहम भूमिका निभाई।

मुकाबले के दूसरे गेम में स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण हो गई थी। चीनी ताइपे के खिलाड़ी ने जगशेर पर लगातार दबाव बनाए रखा और जीत के करीब पहुंच गए। हालांकि, भारतीय खिलाड़ी ने दबाव में संयम बनाए रखा और निर्णायक अंकों पर बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच प्वाइंट बचाकर दूसरा गेम अपने नाम किया। इसके बाद तीसरे गेम में भी उन्होंने अपनी लय बरकरार रखी और जीत हासिल कर भारत के लिए पदक सुनिश्चित किया।

जीत के बाद जगशेर ने कहा कि भारत के लिए पदक जीतने का एहसास शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि वह पिछले पांच से छह वर्षों से विश्व जूनियर चैंपियनशिप में खेलने का सपना देख रहे थे। अब जब उन्होंने पदक पक्का कर लिया है, तो उनका लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है। उनका कहना है कि वह आगे भी पूरी मेहनत के साथ खेलेंगे और देश के लिए बेहतर परिणाम हासिल करने की कोशिश करेंगे।

जगशेर का यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी पहली विश्व जूनियर चैंपियनशिप है। वह पंजाब के नाभा कस्बे से आते हैं और पिछले दो वर्षों से बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर बैडमिंटन एक्सीलेंस में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वहां वह कोच सागर चोपड़ा और मुनिरामु जी के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने बहादुरगढ़ और मुंबई की बैडमिंटन अकादमियों में भी प्रशिक्षण लिया था।

जगशेर के माता-पिता मनप्रीत सिंह और रशपाल कौर सरकारी स्कूलों में शिक्षक हैं। उन्होंने अपने बेटे की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए कम उम्र में ही उसे बेहतर प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया। जब जगशेर 11 वर्ष के थे, तब उन्हें उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के अवसर उपलब्ध कराने के लिए घर से दूर बहादुरगढ़ भेजा गया। परिवार के इस सहयोग और जगशेर की मेहनत ने उनके खेल करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जगशेर पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। वह अंडर-17 राष्ट्रीय चैंपियन रह चुके हैं और अंडर-15 एशियाई प्रतियोगिता में पदक जीत चुके हैं। उनके नाम विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छह पदक होने की जानकारी भी सामने आई है। विश्व जूनियर चैंपियनशिप में पदक सुनिश्चित करना उनके करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

जगशेर अपनी खेल शैली में नेट प्ले और शटल की सटीक प्लेसमेंट को अहम मानते हैं। उन्होंने भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन से भी प्रेरणा लेने की बात कही है। बेंगलुरु में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें शीर्ष खिलाड़ियों को अभ्यास करते देखने और उनसे सीखने का अवसर मिलता है। हालांकि, जगशेर का मानना है कि उन्हें अपनी स्मैश की ताकत और कुछ तकनीकी पहलुओं पर अभी और काम करना है।

सेमीफाइनल में जगशेर का मुकाबला इंडोनेशिया के रादित्य बायू वार्धना से होना है, जो प्रतियोगिता में 31वीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी हैं। जगशेर को 14वीं वरीयता दी गई है। इस मुकाबले में जीत मिलने पर वह फाइनल में पहुंच जाएंगे और स्वर्ण पदक के लिए खेल सकेंगे।

पंजाब बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव रितिन खन्ना ने जगशेर की उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए इसे राज्य के लिए गर्व का विषय कहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की सफलता पंजाब के अन्य युवाओं को भी खेलों की ओर प्रेरित करेगी। जगशेर की उपलब्धि से यह संदेश मिलता है कि उचित प्रशिक्षण, परिवार का सहयोग और लगातार मेहनत युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, जगशेर सिंह खंगूरा ने विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में सेमीफाइनल तक पहुंचकर भारत के लिए पदक सुनिश्चित कर लिया है। अब वह स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ अगले मुकाबले की तैयारी कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि पंजाब और भारतीय जूनियर बैडमिंटन के लिए महत्वपूर्ण है।

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