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सुखना वेटलैंड को मिला रामसर साइट का दर्जा, चंडीगढ़ को पहली बार मिली वैश्विक पहचान

16 अक्तूबर 2026: चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। सुखना वेटलैंड को आधिकारिक रूप से रामसर साइट घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही यह चंडीगढ़ का पहला रामसर स्थल बन गया है। इस उपलब्धि से झील को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने के साथ-साथ इसके पर्यावरण, वन्यजीवों और जैव विविधता के संरक्षण पर भी अधिक ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। रामसर सचिवालय ने 15 अक्टूबर 2026 को सुखना वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची में शामिल किया।

रामसर साइट का दर्जा उन आर्द्रभूमियों को दिया जाता है, जो अपने पर्यावरणीय महत्व, जैव विविधता और वन्यजीवों के आवास के लिहाज से विशेष स्थान रखती हैं। यह दर्जा रामसर कन्वेंशन के तहत दिया जाता है, जिसे वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य दुनिया भर में महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों का संरक्षण करना और उनका समझदारी से उपयोग सुनिश्चित करना है।

सुखना वेटलैंड को रामसर सूची में साइट नंबर 2602 दिया गया है। इसके शामिल होने के साथ उत्तर प्रदेश की सौज झील को भी सूची में जोड़ा गया। इन दोनों स्थलों के शामिल होने के बाद भारत में रामसर साइटों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश को बधाई दी।

सुखना झील शिवालिक पहाड़ियों और बाहरी हिमालय की तलहटी के पास स्थित है। यह चंडीगढ़ के प्रमुख प्राकृतिक स्थलों में से एक है और शहर के पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लगभग 565 एकड़ में फैली यह आर्द्रभूमि आसपास के जलग्रहण क्षेत्र से आने वाले पानी और मिट्टी के प्रवाह को नियंत्रित करने वाली पारिस्थितिक व्यवस्था का हिस्सा है। झील का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनेक पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण आवास उपलब्ध कराती है।

सुखना वेटलैंड विशेष रूप से स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण है। मध्य एशियाई प्रवासी मार्ग से गुजरने वाले पक्षियों को यहां भोजन, प्रजनन, आराम और सर्दियों में ठहरने के लिए उपयुक्त आवास मिलता है। यहां पाई जाने वाली प्रमुख प्रजातियों में संवेदनशील श्रेणी का कॉमन पोचार्ड और संकटग्रस्त पेलास फिश ईगल शामिल हैं। झील के उथले किनारों वाले क्षेत्रों में संकटग्रस्त ब्लैक पॉन्ड टर्टल भी पाया जाता है। इन प्रजातियों की मौजूदगी इस क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को दर्शाती है।

सुखना झील का निर्माण वर्ष 1958 में शिवालिक पहाड़ियों से आने वाले मौसमी जल प्रवाह को रोकने के लिए एक मिट्टी का बांध बनाकर किया गया था। चंडीगढ़ के मुख्य वास्तुकार ली कॉर्बूजिए की योजना के तहत विकसित इस झील ने समय के साथ शहर की पहचान बना ली। यहां सुबह और शाम बड़ी संख्या में लोग घूमने, नौकायन और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने आते हैं। इसके बावजूद झील का पर्यावरणीय महत्व मनोरंजन और पर्यटन से कहीं अधिक व्यापक है।

झील के सामने लंबे समय से गाद जमा होने और जलग्रहण क्षेत्र से मिट्टी बहकर आने जैसी चुनौतियां रही हैं। गाद जमा होने से जलाशय की पानी रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, आक्रामक वनस्पतियों का फैलाव भी स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए चुनौती बन सकता है। इसलिए झील की सुरक्षा के लिए केवल जलस्तर बनाए रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों, जल प्रवाह और वन्यजीवों के आवासों का संरक्षण भी जरूरी है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने सुखना वेटलैंड के संरक्षण के लिए पहले से कई कदम उठाए हैं। वर्ष 2025 में यूटी स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी ने झील को रामसर साइट घोषित कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके साथ पांच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन योजना को भी स्वीकृति दी गई थी। प्रस्ताव को आगे की प्रक्रिया के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और संबंधित संस्थाओं के पास भेजा गया। अब अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने के बाद इन संरक्षण प्रयासों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो गई है।

रामसर दर्जा मिलने का अर्थ यह नहीं है कि झील से जुड़ी सभी पर्यावरणीय समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी। इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि जलग्रहण क्षेत्र में मिट्टी के कटाव को कैसे नियंत्रित किया जाता है, झील की जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी रहती है और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है। इसके लिए विभिन्न सरकारी विभागों, पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय आवश्यक होगा।

इस अंतरराष्ट्रीय पहचान से पर्यावरण शिक्षा, अनुसंधान और जिम्मेदार पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को आर्द्रभूमि की पारिस्थितिकी, प्रवासी पक्षियों और जैव विविधता को समझने के अधिक अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, लोगों में प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी यह दर्जा उपयोगी हो सकता है।

कुल मिलाकर, सुखना वेटलैंड को रामसर साइट का दर्जा मिलना चंडीगढ़ के लिए पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे झील की वैश्विक पहचान बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही जल गुणवत्ता, गाद नियंत्रण, प्राकृतिक आवास और जैव विविधता की रक्षा करने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। आने वाले समय में संरक्षण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही इस उपलब्धि के वास्तविक महत्व को तय करेगा।

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