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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने शहद से तैयार किया खास पेय, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स से भरपूर

3 सितंबर 2026  पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना ने शहद से एक खास तरह का fermented पेय Mead तैयार करने के लिए मानकीकृत तकनीक विकसित की है। विश्वविद्यालय की यह तकनीक मधुमक्खी पालकों और शहद से जुड़े कारोबारियों के लिए एक नई value-added opportunity के रूप में सामने आई है। Mead शहद, पानी और चयनित yeast cultures से तैयार होने वाला एक undistilled alcoholic beverage है और इसे दुनिया के सबसे पुराने fermented पेय पदार्थों में गिना जाता है।

शहद से तैयार होगा वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट

PAU के मुताबिक, इस तकनीक का उद्देश्य केवल शहद को एक पेय में बदलना नहीं है, बल्कि ऐसे शहद का बेहतर इस्तेमाल करना भी है, जो अतिरिक्त मात्रा में उपलब्ध हो या जिसकी बाजार में कीमत कम मिल रही हो।

कई बार कच्चे शहद में अशुद्धियों और post-harvest losses की समस्या सामने आती है। शहद की hygroscopic प्रकृति के कारण उसके खराब होने की संभावना भी रहती है। ऐसे में Mead बनाने की तकनीक शहद को एक अधिक मूल्य वाले उत्पाद में बदलने का रास्ता उपलब्ध करा सकती है।

बायोएक्टिव कंपाउंड और एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी

विश्वविद्यालय की ओर से विकसित Mead को bioactive compounds, antioxidants और minerals से भरपूर बताया गया है। PAU के अनुसार, यह तकनीक शहद के उन संसाधनों को भी उपयोगी उत्पाद में बदलने में मदद कर सकती है, जिनका अन्यथा पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता।

हालांकि, Mead एक alcoholic beverage है और इसे सामान्य non-alcoholic health drink के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। व्यावसायिक Mead में आम तौर पर 8 से 14 प्रतिशत तक ethanol पाया जाता है। इसे dry, semi-sweet और sweet जैसे अलग-अलग variants में तैयार किया जा सकता है।

Mead बनाने की प्रक्रिया

PAU की मानकीकृत तकनीक में Mead तैयार करने के लिए कई चरण शामिल हैं। सबसे पहले raw honey का pre-treatment किया जाता है, ताकि उसमें मौजूद अशुद्धियों को हटाया जा सके।

इसके बाद wort preparation की प्रक्रिया होती है। फिर नियंत्रित ethanolic fermentation कराई जाती है। fermentation के बाद clarification और maturation का चरण आता है। विश्वविद्यालय के अनुसार, करीब 8 से 9 दिनों की fermentation के बाद Mead में लगभग 8.6 प्रतिशत ethanol प्राप्त हो जाता है।

इसके बाद maturation की प्रक्रिया पेय के flavour की complexity और stability को बेहतर बनाने में मदद करती है। वैज्ञानिक तरीके से की जाने वाली यह प्रक्रिया उत्पाद की गुणवत्ता, safety और market readiness को ध्यान में रखती है।

मधुमक्खी पालकों के लिए बढ़ सकते हैं कमाई के रास्ते

PAU की Extension Scientist डॉ. Keshani ने इस तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि surplus और rejected honey को profitable product में बदला जा सकता है। उनके अनुसार, Mead न केवल post-harvest losses को कम करने में मदद कर सकता है, बल्कि ग्रामीण समुदायों के लिए नए entrepreneurial opportunities भी खोल सकता है।

मधुमक्खी पालकों के लिए यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि raw honey की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है। ऐसे में शहद से तैयार value-added products की संख्या बढ़ाकर कारोबार को अधिक विविध बनाया जा सकता है।

शहद के कारोबार में diversification पर जोर

PAU के Principal Microbiologist डॉ. गुरविंदर सिंह कोचर ने कहा कि beekeepers को अक्सर raw honey की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। Mead production को अपनाने से वे अपनी income को स्थिर करने, product line को diversify करने और premium domestic तथा export markets तक पहुंच बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

इस तरह विश्वविद्यालय की तकनीक मधुमक्खी पालन को केवल raw honey production तक सीमित रखने के बजाय processing और value addition से जोड़ने का अवसर देती है।

भारत के honey sector के लिए नई संभावना

रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा honey producer है और वैश्विक उत्पादन में करीब 3.5 प्रतिशत योगदान देता है। ऐसे में शहद से जुड़े value-added products के लिए देश में बड़ा संभावित बाजार मौजूद है।

PAU का मानना है कि craft beverages और functional alcoholic drinks में बढ़ती consumer interest के बीच पंजाब Mead industry में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विश्वविद्यालय की Directorate of Research के माध्यम से इस technology के commercialisation से beekeepers और entrepreneurs को higher value realisation, rural employment और agro-based entrepreneurship के नए अवसर मिल सकते हैं।

PAU की तकनीक से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा

Mead technology के commercialisation से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर पर processing और beverage-based enterprises शुरू करने की संभावना बन सकती है। इससे मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों को अपने उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने में मदद मिल सकती है।

PAU की यह पहल agriculture और food processing के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। शहद को सीधे बेचने के अलावा उसे processed और value-added product में बदलने से किसानों तथा beekeepers को अपने उत्पादन से अधिक आर्थिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।

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