4 सितंबर 2026 प्रसिद्ध शिक्षाविद, भौतिक विज्ञानी और पुरस्कार विजेता लोकप्रिय विज्ञान लेखक डॉ. विद्वान सिंह सोनी का शुक्रवार को पटियाला में निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। रिपोर्ट के अनुसार, उनका निधन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बाद हुआ। उनके निधन से शिक्षा, विज्ञान और शोध के क्षेत्र में शोक की लहर है।
शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में बनाई पहचान
डॉ. विद्वान सिंह सोनी ने शिक्षा और भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में लंबे समय तक योगदान दिया। उन्होंने कॉलेज स्तर पर तीन दशक से अधिक समय तक अध्यापन किया और भौतिक विज्ञान से जुड़े विषयों पर शोध कार्य किया।
वह Government Mohindra College, Patiala के प्रिंसिपल भी रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2000 से 2001 तक इस संस्थान के प्रिंसिपल के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी।
भौतिक विज्ञान के अलावा डॉ. सोनी की रुचि प्रागैतिहासिक अध्ययन, जीवाश्म और पाषाण युग के औजारों के अध्ययन में भी थी। उन्होंने इन विषयों पर लंबे समय तक शोध और संग्रह का कार्य किया।
लोकप्रिय विज्ञान लेखन में भी योगदान
डॉ. विद्वान सिंह सोनी को लोकप्रिय विज्ञान लेखन के लिए भी जाना जाता था। उन्होंने विज्ञान से जुड़े जटिल विषयों को आम लोगों और विद्यार्थियों तक सरल तरीके से पहुंचाने का प्रयास किया।
वह ‘Introductory Physics’ और ‘A Course in Mechanics’ जैसी पुस्तकों के लेखक रहे। उन्होंने ‘Mechanics’ पर भी काम किया, जिसका चौथा संस्करण प्रकाशित हुआ। पुस्तक संबंधी विवरण में उन्हें पुरस्कार विजेता लोकप्रिय विज्ञान लेखक और भौतिक विज्ञान के शिक्षक के रूप में उल्लेखित किया गया है।
प्रागैतिहासिक अध्ययन में भी किया महत्वपूर्ण काम
विज्ञान के साथ-साथ डॉ. सोनी ने पंजाब और उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के प्रागैतिहासिक इतिहास को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण शोध किया।
उन्होंने अपने बेटे डॉ. अनुजोत सिंह सोनी के साथ मिलकर जीवाश्मों और प्राचीन पाषाण औजारों का अध्ययन किया। दोनों के शोध और संग्रह से पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला में फॉसिल म्यूजियम की स्थापना से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य सामने आया। इस संग्रह में विभिन्न जीवों के जीवाश्म और प्रागैतिहासिक पत्थर के औजार शामिल हैं।
पंजाब के प्रागैतिहासिक इतिहास को समझने में योगदान
डॉ. सोनी का शोध उत्तर-पश्चिमी सब-हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले प्राचीन पत्थर के औजारों पर भी केंद्रित रहा। उन्होंने इस क्षेत्र में पाषाण युग की गतिविधियों से जुड़े कई साक्ष्यों का अध्ययन किया।
उनका शोध अंतरराष्ट्रीय अकादमिक प्रकाशनों में भी सामने आया। Cambridge University Press की Antiquity में प्रकाशित एक अध्ययन में विद्वान सिंह सोनी और अनुजोत सिंह सोनी का नाम लेखक के तौर पर दर्ज है। अध्ययन उत्तर-पश्चिमी सब-हिमालयी क्षेत्र में पाए गए प्राचीन पत्थर के औजारों और जीवाश्मों से संबंधित था।
विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर
डॉ. सोनी का मानना था कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं और किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने विज्ञान शिक्षा और लोकप्रिय विज्ञान लेखन के माध्यम से आम लोगों तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की दिशा में काम किया।
उन्होंने पंजाबी भाषा में विज्ञान की किताबों और सामग्री की कमी को लेकर भी चिंता जताई थी। एक राष्ट्रीय अनुवाद मिशन कार्यक्रम में उन्होंने स्कूली और उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए पंजाबी में विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों की आवश्यकता पर बात रखी थी।
सम्मान और पहचान
डॉ. विद्वान सिंह सोनी को विज्ञान, शिक्षा और प्रागैतिहासिक अध्ययन से जुड़े उनके कार्यों के लिए सम्मान मिला। एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें जीवाश्म विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया था। उनके शोध में शिवालिक क्षेत्र के पत्थर के औजारों और प्रागैतिहासिक अवशेषों से जुड़े अध्ययन शामिल थे।
वह पंजाब एकेडमी ऑफ साइंसेज से भी जुड़े रहे और इसकी लाइफ मेंबर सूची में उनका नाम दर्ज है।
विज्ञान और शिक्षा जगत में शोक
डॉ. विद्वान सिंह सोनी के निधन को शिक्षा, भौतिक विज्ञान, लोकप्रिय विज्ञान लेखन और प्रागैतिहासिक शोध के क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके लंबे अकादमिक करियर और शोध कार्यों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के बीच उनकी अलग पहचान बनाई।
उनका योगदान केवल भौतिक विज्ञान तक सीमित नहीं था। उन्होंने विज्ञान को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ पंजाब के प्रागैतिहासिक इतिहास और जीवाश्मों के अध्ययन में भी अपनी अलग पहचान बनाई।
कुल मिलाकर, प्रसिद्ध शिक्षाविद, भौतिक विज्ञानी और पुरस्कार विजेता लोकप्रिय विज्ञान लेखक डॉ. विद्वान सिंह सोनी का 83 वर्ष की उम्र में पटियाला में निधन हो गया। उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया और भौतिक विज्ञान, लोकप्रिय विज्ञान लेखन तथा प्रागैतिहासिक शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। उनके निधन से पंजाब के शिक्षा और विज्ञान जगत में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हुआ है।
