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हरियाणा में धान उठान की रफ्तार में कुरुक्षेत्र पहले और कैथल दूसरे स्थान पर, 19 अक्टूबर तक 78.4% और 77.9% उठान दर्ज

21 अक्तूबर 2026:    धान उठान के जिला-वार आंकड़ों में कुरुक्षेत्र ने राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। 19 अक्टूबर तक जिले में खरीदे गए धान का 78.4 प्रतिशत उठान दर्ज किया गया। कैथल 77.9 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद पंचकूला में 76.2 प्रतिशत, हिसार में 72.6 प्रतिशत, अंबाला में 72.1 प्रतिशत और यमुनानगर में 72 प्रतिशत धान का उठान हुआ।

आंकड़ों के अनुसार, फतेहाबाद में 71.1 प्रतिशत और पलवल में 70.8 प्रतिशत उठान दर्ज किया गया। वहीं, करनाल में यह आंकड़ा 63.2 प्रतिशत, सिरसा में 62.8 प्रतिशत और जींद में 57.1 प्रतिशत रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि अलग-अलग जिलों में धान उठान की रफ्तार में अंतर बना हुआ है।

कैथल में 4.31 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद

कैथल जिले में सरकारी खरीद एजेंसियों ने अब तक किसानों से 4,31,524 मीट्रिक टन धान खरीदा है। उपलब्ध रिपोर्ट में बताया गया कि इसमें से 2,98,517 मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका था। खरीद और उठान की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है।

जिला प्रशासन के अनुसार, खरीद एजेंसियों, ट्रांसपोर्टरों और मार्केट कमेटियों के बीच तालमेल बनाए रखने से उठान की गति बेहतर करने में मदद मिली है। मंडियों में धान की आवक जारी रहने के कारण खरीदी गई फसल को समय पर बाहर भेजना महत्वपूर्ण है, ताकि नई फसल के लिए पर्याप्त जगह बनी रहे।

अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

कैथल की उपायुक्त अपराजिता ने मंडियों में खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। मंडियों और खरीद केंद्रों पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि खरीद से लेकर उठान तक की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

प्रशासन का ध्यान इस बात पर है कि किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी न हो और मंडियों में पर्याप्त जगह उपलब्ध रहे। धान की आवक बढ़ने के साथ यदि खरीदी गई फसल का उठान समय पर नहीं होता, तो मंडियों में जगह की कमी पैदा हो सकती है। इससे नई फसल की खरीद और किसानों के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

तकनीकी समस्याएं भी बनी चुनौती

धान उठान की प्रक्रिया के दौरान कुछ स्थानों पर एग्जिट गेट पास बनाने में तकनीकी दिक्कतों, जीपीएस कनेक्टिविटी और वाहनों की ट्रैकिंग से जुड़ी समस्याओं की रिपोर्ट सामने आई है। इन समस्याओं से खरीदी गई फसल को मंडियों से बाहर ले जाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

धान उठान में तेजी लाने के लिए खरीद एजेंसियों, परिवहन व्यवस्था और मंडी प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। तकनीकी समस्याओं का समय पर समाधान होने से वाहनों की आवाजाही और फसल के परिवहन में तेजी आ सकती है।

किसानों के लिए समय पर उठान क्यों जरूरी?

धान खरीद के बाद उसका समय पर उठान किसानों और मंडी व्यवस्था, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। मंडियों में खरीदा गया धान लंबे समय तक पड़ा रहने से जगह की कमी हो सकती है। इससे नई फसल लेकर आने वाले किसानों को अपनी उपज रखने और बेचने में परेशानी हो सकती है।

हरियाणा में धान खरीद का सीजन जारी रहने के कारण जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने खरीद के साथ-साथ उठान की गति बनाए रखने की चुनौती है। कुरुक्षेत्र और कैथल के बेहतर प्रदर्शन के बीच अन्य जिलों में भी उठान की प्रक्रिया को तेज करना जरूरी होगा, ताकि मंडियों में भीड़ और जगह की कमी जैसी समस्याओं को कम किया जा सके।

फिलहाल, 19 अक्टूबर तक के आंकड़ों में कुरुक्षेत्र राज्य में पहले और कैथल दूसरे स्थान पर है। आगे उठान की रफ्तार किस तरह बनी रहती है, यह मंडियों में धान की आवक, परिवहन व्यवस्था और तकनीकी बाधाओं के समाधान पर निर्भर करेगा।

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