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हरियाणा के निजी मेडिकल कॉलेजों को तय फीस वसूलने के निर्देश, ज्यादा पैसे मांगे तो होगी कार्रवाई

21 अक्तूबर 2026:    हरियाणा सरकार ने राज्य के निजी मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और पैरामेडिकल कॉलेजों को निर्धारित फीस स्ट्रक्चर का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (DMER), पंचकूला की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी निजी शिक्षण संस्थान सरकार या सक्षम प्राधिकारी की ओर से निर्धारित फीस से अधिक राशि विद्यार्थियों अथवा उनके अभिभावकों से नहीं वसूल सकता। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

यह निर्देश उन विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो मेडिकल और अन्य स्वास्थ्य संबंधी पाठ्यक्रमों में दाखिला लेते समय ट्यूशन फीस के अलावा दूसरे शुल्कों को लेकर परेशान रहते हैं। सरकार ने संस्थानों को फीस में पारदर्शिता बनाए रखने और प्रत्येक भुगतान का रिकॉर्ड रखने के लिए भी कहा है।

सभी निजी स्वास्थ्य शिक्षण संस्थानों पर लागू होंगे निर्देश

हरियाणा के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय ने राज्य के सभी संबंधित निजी संस्थानों को उनके पाठ्यक्रम और शैक्षणिक सत्र के लिए निर्धारित फीस संरचना का पालन करने को कहा है। इस निर्देश के दायरे में मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी और पैरामेडिकल कॉलेज शामिल हैं।

निदेशक धीरेंद्र खड़गटा की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, कोई भी संस्थान सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित या अधिकृत राशि से अधिक फीस, शुल्क, योगदान, जमा राशि या किसी अन्य मद में पैसे की मांग नहीं कर सकता।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फीस नियमों से बचने के लिए किसी अतिरिक्त रकम को दूसरे नाम से वसूलना भी स्वीकार्य नहीं होगा। यानी संस्थान निर्धारित शुल्क सीमा को दरकिनार करने के लिए अलग-अलग मदों या अन्य व्यवस्थाओं का सहारा नहीं ले सकते।

वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर फीस दिखाना अनिवार्य

निदेशालय ने सभी संबंधित संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे सरकार द्वारा निर्धारित फीस संरचना को अपनी आधिकारिक वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से प्रदर्शित करें।

इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों और अभिभावकों को दाखिले से पहले ही यह जानकारी उपलब्ध कराना है कि संबंधित पाठ्यक्रम के लिए कितनी फीस निर्धारित है। इससे फीस संबंधी जानकारी को लेकर भ्रम कम करने और भुगतान में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कॉलेजों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विद्यार्थियों से प्राप्त प्रत्येक भुगतान की उचित रसीद जारी की जाए। इसके साथ ही फीस और अन्य अधिकृत शुल्कों से संबंधित पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से रखा जाए।

विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए फीस की रसीद संभालकर रखना महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद होने पर भुगतान से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध रहें।

अतिरिक्त फीस वसूलने पर सख्ती

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी निजी संस्थान निर्धारित फीस से अधिक राशि सीधे या परोक्ष रूप से नहीं वसूल सकता। यह प्रतिबंध फीस, शुल्क, योगदान, जमा राशि या किसी अन्य नाम से मांगी जाने वाली रकम पर लागू होता है, बशर्ते वह सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित या अधिकृत सीमा से बाहर हो।

निदेशालय ने संस्थानों को चेतावनी दी है कि निर्धारित फीस संरचना का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा। नियमों से हटकर शुल्क वसूलने वाले संस्थानों के खिलाफ लागू कानूनों, नियमों, विनियमों और सरकारी आदेशों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, आदेश में प्रत्येक प्रकार के उल्लंघन के लिए किसी एक निश्चित जुर्माने की राशि का उल्लेख नहीं किया गया है। कार्रवाई संबंधित नियमों और मामले की परिस्थितियों के अनुसार की जा सकती है।

विद्यार्थियों और अभिभावकों पर दबाव बनाने की मनाही

निदेशालय ने यह भी कहा है कि किसी विद्यार्थी या उसके माता-पिता अथवा अभिभावक को अनधिकृत राशि का भुगतान करने के लिए दबाव, उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार का सामना नहीं करना चाहिए।

इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फीस संबंधी विवादों के कारण विद्यार्थियों को अनुचित परेशानी न हो। संस्थानों से अपेक्षा की गई है कि वे सरकारी नियमों के अनुसार फीस वसूलें और भुगतान से संबंधित प्रक्रिया को पारदर्शी रखें।

यदि किसी विद्यार्थी को लगता है कि उससे निर्धारित फीस से अधिक राशि मांगी जा रही है, तो उसके लिए संबंधित फीस नोटिफिकेशन, कॉलेज की आधिकारिक फीस सूची और भुगतान की रसीदों का मिलान करना उपयोगी होगा।

शिकायत मिलने पर क्या कर सकते हैं विद्यार्थी?

दाखिले के दौरान फीस संबंधी किसी विवाद की स्थिति में विद्यार्थी और अभिभावक सबसे पहले संबंधित पाठ्यक्रम और शैक्षणिक सत्र के लिए लागू आधिकारिक फीस संरचना की जांच कर सकते हैं। इसके बाद कॉलेज से मांगी गई राशि का लिखित विवरण और भुगतान की रसीद प्राप्त करना उपयोगी रहेगा।

यदि मांगी गई रकम निर्धारित फीस से अधिक दिखाई देती है, तो संबंधित दस्तावेजों के साथ चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय या संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत की जा सकती है। शिकायत में कॉलेज का नाम, पाठ्यक्रम, शैक्षणिक सत्र, मांगी गई राशि और उपलब्ध भुगतान संबंधी दस्तावेज शामिल करना मामले को स्पष्ट करने में मदद कर सकता है।

फीस में पारदर्शिता पर जोर

हरियाणा में निजी स्वास्थ्य शिक्षण संस्थानों के लिए जारी निर्देशों का मुख्य उद्देश्य निर्धारित फीस संरचना का पालन सुनिश्चित करना, अतिरिक्त वसूली पर रोक लगाना और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना है।

निजी मेडिकल और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के समय फीस की जानकारी विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में फीस को सार्वजनिक करना, प्रत्येक भुगतान की रसीद देना और रिकॉर्ड बनाए रखना पारदर्शी व्यवस्था के जरूरी हिस्से हैं।

अब संबंधित निजी संस्थानों को सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क संरचना के अनुसार काम करना होगा। निर्देशों का उल्लंघन पाए जाने पर लागू नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

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