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‘अब मैं आजाद हूं’: जैवलिन खिलाड़ी अर्शदीप ने याद किया पिता का त्याग, कनाडा की बसी-बसाई जिंदगी छोड़ लौटे थे भारत

28 अगस्त 2026:  भारतीय जैवलिन थ्रोअर अर्शदीप सिंह ने अपने खेल सफर और परिवार के संघर्ष को याद करते हुए बताया कि उनके पिता ने उनके करियर को आगे बढ़ाने के लिए कनाडा की बसी-बसाई जिंदगी छोड़कर भारत लौटने का बड़ा फैसला लिया था। अर्शदीप के मुताबिक, पिता का यह त्याग उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

पिता ने छोड़ी कनाडा की जिंदगी

अर्शदीप ने बताया कि उनके पिता कनाडा में एक अच्छी और व्यवस्थित जिंदगी जी रहे थे। हालांकि, बेटे के खेल करियर को बेहतर अवसर देने के लिए उन्होंने वहां की जिंदगी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया।

परिवार के इस फैसले के बाद अर्शदीप को जैवलिन थ्रो में प्रशिक्षण जारी रखने और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका मिला।

पिता का त्याग बना प्रेरणा

अर्शदीप के अनुसार, उनके पिता ने अपने व्यक्तिगत भविष्य और सुविधाओं से ज्यादा बेटे के सपने को प्राथमिकता दी। उनके इस फैसले ने अर्शदीप को खेल में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि मैदान पर मिलने वाली हर सफलता के पीछे परिवार के त्याग और समर्थन की बड़ी भूमिका है।

‘अब मैं आजाद हूं’

अपने संघर्ष और उपलब्धियों को याद करते हुए अर्शदीप ने कहा, ‘अब मैं आजाद हूं।’ उनके इस बयान को लंबे समय तक चले संघर्ष और अपने खेल करियर में एक मुकाम हासिल करने के संदर्भ में देखा जा रहा है।

खिलाड़ी ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन परिवार के लगातार समर्थन ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया।

जैवलिन में बनाया अपना नाम

अर्शदीप ने जैवलिन थ्रो में लगातार मेहनत करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। प्रशिक्षण, फिटनेस और तकनीक पर लगातार काम करने के साथ उन्होंने अपनी दूरी में सुधार किया है।

उनकी उपलब्धियां युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक हैं, खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जो छोटे शहरों और सीमित संसाधनों से निकलकर बड़े स्तर पर खेलना चाहते हैं।

परिवार की भूमिका अहम

अर्शदीप ने अपने सफर में परिवार की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी के करियर में केवल मैदान पर की गई मेहनत ही नहीं, बल्कि परिवार का भावनात्मक और आर्थिक समर्थन भी महत्वपूर्ण होता है।

उनके पिता का कनाडा की स्थिर जिंदगी छोड़कर भारत लौटना इसी समर्थन और त्याग का उदाहरण है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

अर्शदीप की कहानी बताती है कि किसी खिलाड़ी की सफलता के पीछे केवल उसकी व्यक्तिगत मेहनत नहीं होती, बल्कि परिवार के त्याग और विश्वास की भी बड़ी भूमिका होती है।

उनके पिता ने बेटे के खेल सपने को पूरा करने के लिए अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी और भारत लौटने का फैसला किया।

कुल मिलाकर, जैवलिन खिलाड़ी अर्शदीप सिंह ने अपने खेल सफर के दौरान पिता द्वारा किए गए त्याग को याद किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता कनाडा की बसी-बसाई जिंदगी छोड़कर भारत लौटे ताकि वह अपने खेल करियर पर ध्यान दे सकें। अर्शदीप की कहानी परिवार के समर्थन, त्याग और सपने के प्रति समर्पण की मिसाल है।

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