29 अगस्त 2026: पंजाब के अमृतसर जिले में स्थित बाबा बकाला साहिब सिख धर्म के इतिहास में विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। यही वह पवित्र स्थान है जहां गुरु तेग बहादुर जी को नौवें सिख गुरु के रूप में पहचाना और स्वीकार किया गया था।
रक्षाबंधन के बाद आने वाली रक्षाबंधन पूर्णिमा से जुड़ी बाबा बकाला की परंपरा सिख इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना की याद दिलाती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बकाला साहिब पहुंचकर गुरुद्वारों में माथा टेकते हैं।
गुरु तेग बहादुर जी से जुड़ा है इतिहास
गुरु तेग बहादुर जी सिख धर्म के नौवें गुरु थे। उनके जीवन और गुरुगद्दी से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंग बाबा बकाला से संबंधित हैं।
आठवें सिख गुरु गुरु हरिकृष्ण जी ने अपने अंतिम समय में ‘बाबा बकाला’ शब्दों का संकेत दिया था। इसके बाद कई लोगों ने स्वयं को गुरु बताना शुरू कर दिया, जिससे संगत के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई।
मक्खन शाह लबाना ने की पहचान
सिख इतिहास में व्यापारी मक्खन शाह लबाना का प्रसंग बाबा बकाला से विशेष रूप से जुड़ा है। परंपरा के अनुसार, उन्होंने गुरु हरिकृष्ण जी के संकेत के आधार पर बाबा बकाला में सच्चे गुरु की तलाश की।
उन्होंने कई दावेदारों की परीक्षा ली। जब उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के सामने अपनी श्रद्धा के अनुसार भेंट रखी, तो गुरु जी ने उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने इससे अधिक भेंट देने का संकल्प किया था।
इस घटना के बाद मक्खन शाह लबाना ने गुरु तेग बहादुर जी को पहचान लिया और कथित रूप से ‘गुरु लाधो रे’ का उद्घोष किया।
बाबा बकाला बना ऐतिहासिक केंद्र
इस घटना के बाद गुरु तेग बहादुर जी को नौवें गुरु के रूप में स्वीकार किया गया। इससे बाबा बकाला सिख इतिहास का एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन गया।
आज भी यहां स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे उस घटना की स्मृति को जीवित रखते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व
बाबा बकाला साहिब में वर्षभर श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन विशेष धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में संगत जुटती है। श्रद्धालु ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेकते हैं और गुरु साहिब की शिक्षाओं को याद करते हैं।
गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएं
गुरु तेग बहादुर जी की बाणी में निर्भयता, आध्यात्मिकता, त्याग और मानवता का संदेश प्रमुख रूप से दिखाई देता है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया।
उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को सत्य, सहनशीलता और निडरता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र
बाबा बकाला साहिब अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत के कारण पंजाब के महत्वपूर्ण सिख तीर्थस्थलों में शामिल है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सिख इतिहास के उस महत्वपूर्ण दौर से जुड़ने का अवसर मिलता है, जब गुरु तेग बहादुर जी को नौवें गुरु के रूप में पहचाना गया था।
कुल मिलाकर, बाबा बकाला साहिब सिख इतिहास का वह पवित्र स्थल है जहां गुरु तेग बहादुर जी को नौवें सिख गुरु के रूप में पहचाना गया। मक्खन शाह लबाना से जुड़ा ‘गुरु लाधो रे’ का प्रसंग आज भी इस स्थान की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
