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गुरुग्राम में निजी बिजली वितरण लाइसेंस पर HERC ने फैसला रखा सुरक्षित, 15 सितंबर तक मांगी आपत्तियां

4 सितंबर 2026 हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह के बिजली वितरण क्षेत्र में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के मामले में हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने गुरुवार को सुनवाई पूरी कर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। यह मामला निजी कंपनी Eleven Power Private Limited की ओर से दायर उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण नेटवर्क संचालित करने के लिए लाइसेंस मांगा गया है।

मामले में बड़ी संख्या में हितधारकों की आपत्तियां सामने आई हैं। मौजूदा समय में इन दोनों जिलों में बिजली वितरण का काम राज्य की कंपनी Dakshin Haryana Bijli Vitran Nigam (DHBVN) करती है। ऐसे में निजी कंपनी की संभावित एंट्री को लेकर बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, राज्य बिजली उपयोगिताओं और राजनीतिक दलों के बीच भी बहस तेज रही है।

HERC ने आदेश रखा सुरक्षित

गुरुवार को HERC के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। आयोग ने सुनवाई पूरी करने के बाद निजी बिजली वितरण लाइसेंस के आवेदन पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

हालांकि, आयोग ने संबंधित पक्षों और आपत्तिकर्ताओं को विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर अपनी टिप्पणियां, आपत्तियां और सुझाव दाखिल करने का अवसर भी दिया है। आयोग के अनुसार, 43 हस्तक्षेपकर्ताओं को विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से भेजे जाएंगे। इन्हें अपनी टिप्पणियां और आपत्तियां 15 सितंबर 2026 तक दाखिल करने की अनुमति दी गई है।

Eleven Power ने मांगा है समानांतर लाइसेंस

Eleven Power Private Limited ने Electricity Act, 2003 की संबंधित धाराओं के तहत गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।

कंपनी का तर्क है कि निजी क्षेत्र के प्रवेश से बिजली वितरण व्यवस्था में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। कंपनी ने बेहतर विश्वसनीयता, आधुनिक तकनीक और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प देने की बात कही है।

कंपनी ने अगले पांच वर्षों में करीब ₹4,716 करोड़ के निवेश की योजना भी बताई है। प्रस्ताव के अनुसार यह निवेश 2026-27 से 2030-31 के बीच किया जाना है। कंपनी ने तकनीक आधारित और नवीकरणीय ऊर्जा पर केंद्रित बिजली वितरण नेटवर्क विकसित करने की बात कही है।

विशेषज्ञ समिति ने लाइसेंस देने की सिफारिश की

इस मामले की जांच के लिए HERC ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अलोक निगम की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसे Eleven Power के आवेदन को खारिज करने का कोई आधार नहीं मिला।

समिति ने कुछ शर्तों और सुरक्षा उपायों के साथ समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने पर विचार करने की सिफारिश की थी। हालांकि, यह रिपोर्ट केवल सिफारिशी प्रकृति की है और अंतिम निर्णय HERC को ही लेना है।

DHBVN और बिजली इंजीनियरों ने उठाए सवाल

राज्य की मौजूदा बिजली वितरण कंपनी DHBVN और बिजली क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने निजी कंपनी के प्रस्ताव पर कई सवाल उठाए हैं।

सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में Universal Service Obligation (USO) शामिल है। आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि बिजली वितरण लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी को पूरे लाइसेंस क्षेत्र में उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

DHBVN ने दावा किया है कि दोनों जिलों में इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने में करीब ₹11,397 करोड़ की जरूरत हो सकती है, जबकि Eleven Power ने पांच वर्षों में करीब ₹4,716 करोड़ के निवेश की योजना रखी है। इस निवेश को कंपनी ने चरणबद्ध और मांग आधारित नेटवर्क विस्तार से जोड़कर पेश किया है।

बिजली कर्मचारियों ने किया विरोध

निजी बिजली वितरण लाइसेंस के प्रस्ताव का बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संगठनों ने लगातार विरोध किया है। गुरुवार को HERC कार्यालय के बाहर संयुक्त कार्रवाई समिति ने प्रदर्शन भी किया।

प्रदर्शनकारियों ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और कहा कि समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था लागू होने से आम उपभोक्ताओं पर टैरिफ का बोझ बढ़ सकता है। कर्मचारियों ने यह भी चिंता जताई कि निजी कंपनी के आने से मौजूदा सरकारी बिजली वितरण कंपनी की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

हरियाणा सरकार भी प्रस्ताव के विरोध में

हरियाणा सरकार ने भी गुरुग्राम और नूंह में समानांतर निजी बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने विधानसभा में कहा था कि सरकार इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है और जरूरत पड़ने पर अदालत का रुख भी किया जा सकता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस देने का अधिकार HERC जैसी स्वतंत्र नियामक संस्था के पास है, क्योंकि आवेदन सीधे आयोग के सामने दायर किया गया है।

अब अंतिम फैसला HERC के हाथ में

फिलहाल HERC ने आदेश सुरक्षित रखा है। संबंधित पक्षों को 15 सितंबर तक लिखित टिप्पणियां और आपत्तियां दाखिल करने का मौका दिया गया है। इसके बाद आयोग मामले के सभी कानूनी, तकनीकी, वित्तीय और नियामकीय पहलुओं पर विचार करते हुए अंतिम निर्णय देगा।

गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली वितरण कंपनी के प्रवेश का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर केवल इन दो जिलों तक सीमित नहीं रह सकता। बिजली वितरण में निजी और सरकारी कंपनियों की समानांतर मौजूदगी से प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता सेवा, निवेश, टैरिफ और सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

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