5 सितंबर 2026 हरियाणा में पराली जलाने की समस्या को कम करने और किसानों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अपने अभियान का दायरा बढ़ाया है। अब इस अभियान में स्कूल और कॉलेजों के छात्रों को भी जोड़ा जा रहा है, ताकि वे पराली जलाने के नुकसान का संदेश अपने परिवारों और आसपास के ग्रामीण समुदाय तक पहुंचा सकें।
कृषि विभाग की ओर से करनाल जिले में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत विभाग की विशेष रूप से गठित टीमें हर मंगलवार और शुक्रवार को स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता सेमिनार आयोजित कर रही हैं। अभियान में मुख्य रूप से कक्षा 9वीं और उससे ऊपर के विद्यार्थियों को शामिल किया जा रहा है।
छात्रों को बताए जा रहे पराली जलाने के नुकसान
जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों को धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी जा रही है। कृषि विभाग का जोर इस बात पर है कि छात्र समझें कि खेतों में फसल अवशेष जलाने का असर केवल वातावरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
विभाग का मानना है कि यदि विद्यार्थी पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों और पराली जलाने के नुकसान को समझेंगे तो वे इसकी जानकारी अपने माता-पिता, रिश्तेदारों और ग्रामीण क्षेत्र के अन्य लोगों तक पहुंचा सकते हैं।
मंगलवार और शुक्रवार को हो रहे सेमिनार
अभियान के तहत कृषि विभाग की विशेष टीमें निर्धारित दिनों में स्कूलों और कॉलेजों का दौरा कर रही हैं। मंगलवार और शुक्रवार को आयोजित किए जा रहे जागरूकता सेमिनारों में विद्यार्थियों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के बारे में बताया जा रहा है।
उप कृषि निदेशक (DDA) डॉ. जसविंदर सिंह इस जागरूकता अभियान की निगरानी और सहयोग कर रहे हैं। विभाग का लक्ष्य कक्षा 9वीं से आगे के अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंचना है, ताकि जागरूकता का संदेश स्कूल की चारदीवारी से बाहर भी पहुंच सके।
छात्रों को दिलाई जा रही पराली न जलाने की शपथ
जागरूकता अभियान के दौरान विद्यार्थियों को पराली न जलाने की शपथ लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें प्रभावी और वैज्ञानिक फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों को अपनाने तथा इसके बारे में दूसरों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
कृषि विभाग का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी किसानों और सरकारी विभागों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं। विद्यार्थी अपने घरों में पराली प्रबंधन से जुड़ी जानकारी पहुंचाकर किसानों को खेतों में फसल अवशेष जलाने के बजाय उपलब्ध वैज्ञानिक विकल्पों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
करनाल में पराली जलाने के मामलों में आई कमी
कृषि विभाग के अनुसार, करनाल जिले में पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार कमी दर्ज की गई है। जिले में 2020 के धान सीजन के दौरान पराली जलाने के 1,052 मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद 2021 में 957, 2022 में 301, 2023 में 126 और 2024 में 95 मामले दर्ज हुए।
2025 के धान सीजन में यह संख्या घटकर केवल 23 रह गई। विभाग इस गिरावट को जागरूकता और जमीनी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों के लिहाज से सकारात्मक संकेत मान रहा है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अंतिम लक्ष्य सक्रिय आग की घटनाओं को शून्य तक लाना है।
विभाग ने किसानों से की वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से उपलब्ध फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की अपील की है। किसानों को बताया जा रहा है कि पराली को जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों से उसका प्रबंधन किया जा सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता अभियान को केवल किसानों तक सीमित रखने के बजाय समाज के दूसरे वर्गों को भी इसमें शामिल करना जरूरी है। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ना इसी रणनीति का हिस्सा है।
छात्रों के जरिए गांवों तक पहुंचेगा संदेश
कृषि विभाग का मानना है कि छात्रों के माध्यम से पराली प्रबंधन का संदेश बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है। खासकर करनाल जैसे कृषि प्रधान जिले में स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थी अपने परिवारों में किसानों से सीधे जुड़े हुए हैं।
यदि विद्यार्थी अपने परिवारों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और वैज्ञानिक प्रबंधन के विकल्पों के बारे में जानकारी देते हैं तो इसका प्रभाव खेतों तक पहुंच सकता है। इससे सरकारी जागरूकता अभियान को भी जमीनी स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।
शून्य पराली जलाने की ओर लक्ष्य
डॉ. जसविंदर सिंह के अनुसार, पराली जलाने के मामलों में कमी उत्साहजनक है, लेकिन विभाग इससे संतुष्ट होकर रुकना नहीं चाहता। कर्मचारियों को फसल कटाई के मौसम से पहले ही किसानों के बीच सक्रिय रहने और उन्हें उचित मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग का लक्ष्य सक्रिय आग की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करना है। इसके लिए जागरूकता, किसानों को वैज्ञानिक जानकारी और फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
