5 सितंबर 2026 पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबित महंगाई भत्ते (DA) के मुद्दे को लेकर चल रहे विवाद के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के पंजाब अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल वोट हासिल करने के लिए कर्मचारियों से ऐसे वादे नहीं करेगी, जिन्हें पूरा करना संभव न हो।
अमन अरोड़ा ने कहा कि कर्मचारी और पेंशनर्स सरकार के परिवार का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी जायज मांगों को बातचीत के जरिए हल करने के लिए सरकार तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही फैसले लिए जाएंगे।
करीब 7.50 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स मुद्दे से जुड़े
DA बकाया का मुद्दा पंजाब में लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 4 लाख सरकारी कर्मचारी और 3.50 लाख पेंशनर्स इस विवाद से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
कर्मचारी संगठन लंबित DA किस्तों के भुगतान समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने पहले 27 अगस्त को सामूहिक आकस्मिक अवकाश लिया था और अब 8 सितंबर को दोबारा बड़े स्तर पर सामूहिक अवकाश का ऐलान किया गया है।
अमन अरोड़ा बोले- सरकार पर करीब ₹14,000 करोड़ की पुरानी देनदारी
अमन अरोड़ा ने दावा किया कि मौजूदा सरकार को पिछली सरकारों से करीब ₹14,000 करोड़ की वेतन और अन्य लाभों से जुड़ी देनदारी विरासत में मिली थी। उनके मुताबिक AAP सरकार ने इस देनदारी को चुकाने की प्रक्रिया शुरू की और करीब ₹4,500 करोड़ का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि पूरी बकाया राशि को एक महीने या एक साल में चुकाना संभव नहीं है, लेकिन सरकार इस मामले को योजना के तहत आगे बढ़ा रही है।
वोट के लिए नहीं किए जाएंगे झूठे वादे
अमन अरोड़ा ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए DA के मुद्दे का राजनीतिक महत्व जरूर है, लेकिन सरकार केवल चुनावी लाभ के लिए ऐसे वादे नहीं करेगी जिन्हें वित्तीय रूप से पूरा करना संभव न हो।
उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स की समस्याओं को बातचीत के माध्यम से हल करने के लिए तैयार है। हालांकि, सरकार की क्षमता और राज्य के वित्तीय संसाधनों को भी ध्यान में रखना होगा।
केंद्र के कर्मचारियों के बराबर वेतन का दावा
अमन अरोड़ा ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगी कि पंजाब सरकार के किसी कर्मचारी की टेक-होम सैलरी उसी पद और रैंक के केंद्रीय कर्मचारी से कम न हो।
उनका कहना था कि पंजाब के कर्मचारियों की अलग-अलग वेतन संरचनाओं के कारण DA का मुद्दा जटिल बना हुआ है। सरकार इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाश रही है।
2016-17 के Pay Commission का भी जिक्र
अमन अरोड़ा ने पंजाब में Pay Commission लागू होने के बाद DA से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान भी कर्मचारियों की DA संबंधी समस्याओं का पूरी तरह समाधान नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार कर्मचारियों के वेतन से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के लिए काम कर रही है और जिन मामलों में पंजाब के कर्मचारी केंद्रीय वेतनमान वाले कर्मचारियों से कम प्राप्त कर रहे हैं, वहां समाधान तलाशा जाएगा।
सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत की कोशिश
DA विवाद को शांत करने के लिए पंजाब सरकार ने इससे पहले तीन वरिष्ठ मंत्रियों को कर्मचारियों के साथ बातचीत के लिए आगे किया था। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने संयुक्त रूप से कर्मचारियों और पेंशनर्स से बातचीत के लिए सरकार की तैयारियों की जानकारी दी थी।
सरकार ने कहा था कि वह कर्मचारियों की समस्याओं को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहती है। हालांकि, कर्मचारी संगठन पहले आंदोलन के दौरान जारी किए गए शो-कॉज नोटिस वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
DA विवाद के बीच 85 हजार कर्मचारियों के लिए राहत
इसी विवाद के बीच पंजाब सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद केंद्रीय वेतनमान पर भर्ती हुए करीब 85,000 कर्मचारियों के DA को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की सिफारिश की है। यह फैसला कैबिनेट सब-कमेटी की सिफारिश के बाद सामने आया है और अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के पास भेजा जाना है।
हालांकि, इस प्रस्ताव से पहले जुलाई 2020 से पहले भर्ती हुए करीब 3.15 लाख कर्मचारियों के लंबित DA बकाया का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं होता। कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगों में पुरानी लंबित DA किस्तों का भुगतान भी शामिल है।
8 सितंबर के आंदोलन पर नजर
कर्मचारी संगठनों की ओर से 8 सितंबर को फिर सामूहिक आकस्मिक अवकाश का आह्वान किया गया है। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर वित्तीय सीमाओं को संभालने की चुनौती है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों और पेंशनर्स की नाराजगी दूर करने का दबाव भी है।
अमन अरोड़ा के ताजा बयान से साफ है कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान चाहती है, लेकिन वह DA बकाया के भुगतान को लेकर अपनी वित्तीय क्षमता से बाहर जाकर कोई चुनावी वादा करने के पक्ष में नहीं है।
