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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में शिक्षकों का धरना, लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

2 सितंबर 2026 : हरियाणा में उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े शिक्षकों और कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में धरना दिया गया। हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गनाइजेशंस (HFUCTO) के नेतृत्व में आयोजित इस धरने में विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। शिक्षकों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की।

खाली पदों को समाप्त करने के फैसले का विरोध

शिक्षकों के प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा राज्य विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े स्वीकृत पदों को समाप्त करने का फैसला रहा। शिक्षकों ने वित्त विभाग की ओर से जारी उस पत्र को वापस लेने की मांग की, जिसके तहत स्वीकृति की तारीख से चार साल तक खाली रहने वाले पदों को “deemed abolished” यानी समाप्त माना जाएगा

शिक्षक संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में पहले से ही नियमित शिक्षकों की कमी है। ऐसे में स्वीकृत पदों को समाप्त करने से शिक्षकों पर काम का दबाव और बढ़ सकता है तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।

HFUCTO ने सरकार के सामने उठाए मुद्दे

HFUCTO के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र खटकर ने कहा कि धरने का उद्देश्य सरकार का ध्यान शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े वास्तविक मुद्दों की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने मांगों के जल्द समाधान के लिए सरकार से सकारात्मक हस्तक्षेप की अपील की।

उन्होंने कहा कि स्वीकृत खाली पदों को समाप्त करने का प्रस्ताव, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने की मांग, पेंशन को लेकर अनिश्चितता, सेवा शर्तों में असमानता और Self-Financing Scheme (SFS) पर लगातार निर्भरता जैसे मुद्दे उच्च शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।

सरकार को सौंपा गया ज्ञापन

धरने के दौरान शिक्षक प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति को सौंपा। ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम दिया गया और सरकार से मांगों पर जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया गया।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय सरकार को इन मुद्दों पर स्पष्ट नीति बनाकर निर्णय लेना चाहिए। शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों को प्राथमिकता के आधार पर देखेगी।

सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने की मांग

शिक्षकों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाकर 65 वर्ष करना भी शामिल है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस संबंध में लंबे समय से मांग उठाई जाती रही है।

उनका तर्क है कि अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं का लाभ उच्च शिक्षा संस्थानों को लंबे समय तक मिल सकता है। इसके साथ ही शिक्षकों ने सेवा शर्तों में समानता और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा की भी मांग उठाई।

पेंशन को लेकर भी चिंता

धरने में शिक्षकों ने पेंशन से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। शिक्षक संगठनों ने पेंशन लाभों को लेकर बनी अनिश्चितता दूर करने की मांग की है।

इसके साथ ही कुछ शिक्षक संगठन पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को भी उठा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

SFS व्यवस्था पर निर्भरता का विरोध

शिक्षकों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में Self-Financing Scheme (SFS) पर लगातार बढ़ती निर्भरता को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि नियमित स्वीकृत पदों को भरने और स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति पर जोर दिया जाना चाहिए।

शिक्षक संगठनों के अनुसार, उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में नियमित शिक्षक जरूरी हैं। खाली पदों को समाप्त करने से यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

शिक्षकों ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता का मुद्दा उठाया

हरियाणा कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (HCTA) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र परमार ने कहा कि शिक्षकों से जुड़े मुद्दे सीधे तौर पर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और उसके भविष्य से जुड़े हैं।

वहीं, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गनाइजेशन के उपाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र चाहर ने भी सरकार से खाली स्वीकृत पदों को समाप्त करने संबंधी पत्र को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि चार साल तक पद खाली रहने के आधार पर उन्हें समाप्त करने का निर्णय उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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