25 सितंबर 2026 हरियाणा में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आवाज उठाई है। हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गनाइजेशंस (HFUCTO) के आह्वान पर गुरुवार को रेवाड़ी के मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (IGU) में राज्य स्तरीय धरना आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों और एडेड कॉलेजों से शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए।
खाली पदों को जल्द भरने की मांग
धरने के दौरान शिक्षकों ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्वीकृत खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग की। HFUCTO के अध्यक्ष जितेंद्र खटकर ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में नियमित शिक्षकों और कर्मचारियों की जरूरत है।
उन्होंने उस प्रावधान को वापस लेने की भी मांग की, जिसके तहत चार साल से अधिक समय तक खाली रहने वाले स्वीकृत पदों को समाप्त माना जाता है। शिक्षकों का कहना है कि संस्थानों की दीर्घकालिक शैक्षणिक और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर पद स्वीकृत किए जाते हैं, इसलिए केवल लंबे समय तक खाली रहने के आधार पर उन्हें समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।
सेवा शर्तों में समानता पर जोर
शिक्षक संगठनों ने राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा शर्तों में समानता की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि अलग-अलग संस्थानों में सेवा संबंधी व्यवस्थाओं में अंतर से कर्मचारियों के सामने समस्याएं पैदा होती हैं।
AIFUCTO के उपाध्यक्ष प्रो. नरेंद्र चाहर ने सेवा शर्तों और सामाजिक सुरक्षा को उच्च शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने लंबित मांगों पर सरकार से सकारात्मक रुख अपनाने और निश्चित समयसीमा में फैसले लेने की मांग की।
वेतन और पेंशन के लिए 100 प्रतिशत सरकारी बजट की मांग
HFUCTO ने राज्य विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के लिए 100 प्रतिशत सरकारी बजट उपलब्ध कराने की मांग की। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए नियमित बजट सहायता जरूरी है।
एडेड कॉलेजों में वेतन के समय पर भुगतान को लेकर भी मुद्दा उठाया गया। शिक्षकों ने वित्त विभाग की ओर से बजट स्वीकृति पर लगाए गए मासिक और तिमाही कैप को हटाने की मांग की, ताकि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल सके।
शिक्षकों के कार्यभार में समानता की मांग
HFUCTO के सचिव प्रो. दयानंद मलिक ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों के कार्यभार में समानता की मांग की। उन्होंने इसके लिए UGC के प्रावधानों के अनुरूप व्यवस्था लागू करने की बात कही।
इसके अलावा कॉलेजों में पांच दिन के कार्य सप्ताह को लागू करने की मांग भी उठाई गई। शिक्षकों का कहना है कि सेवा शर्तों और कार्यभार में समानता से शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।
PhD शोध और अकादमिक अवसरों का मुद्दा
धरने में शिक्षकों के शोध और अकादमिक विकास से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। ऑल-हरियाणा गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. राजेश रांझा ने कॉलेज शिक्षकों को एक समान व्यवस्था के तहत PhD शोध पर्यवेक्षक के रूप में काम करने का अवसर देने की मांग की।
उन्होंने विश्वविद्यालयों में PhD की 20 प्रतिशत सीटें शिक्षकों के लिए निर्धारित करने की मांग भी रखी। शिक्षकों के अनुसार, शोध और अकादमिक गतिविधियों में अवसर बढ़ने से उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा मिल सकता है।
पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग
धरने के दौरान पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इसके अलावा शिक्षकों ने सामाजिक सुरक्षा, नौकरी की स्थिरता और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों को भी सामने रखा।
हाल के दिनों में HFUCTO और इससे जुड़े शिक्षक संगठनों ने उच्च शिक्षा से जुड़े इन मुद्दों को लेकर अलग-अलग स्तर पर अपनी मांगें उठाई हैं। इससे पहले भी संगठन ने खाली पद भरने, OPS बहाल करने, UGC नियम लागू करने और शिक्षकों की सेवा शर्तों में सुधार की मांग रखी थी।
नई विश्वविद्यालयों के लिए विशेष बजट पैकेज की मांग
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की अध्यक्ष प्रो. सविता श्योराण ने हाल में स्थापित विश्वविद्यालयों के लिए विशेष बजट पैकेज देने की मांग की। उनका कहना था कि पर्याप्त वित्तीय संसाधन मिलने से इन संस्थानों में छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और शैक्षणिक स्तर मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से जोड़कर देखी मांगें
शिक्षक संगठनों ने अपनी मांगों को केवल कर्मचारियों की सेवा शर्तों तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इन्हें उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि पर्याप्त नियमित स्टाफ, बेहतर सेवा शर्तें, शोध के अवसर और वित्तीय सहायता विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शैक्षणिक माहौल के लिए जरूरी हैं।
HFUCTO ने सरकार से सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने और निश्चित समयसीमा में निर्णय लेने की मांग की है।
