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हरियाणा के डिजिटल हेल्थ मिशन को बड़ा झटका, निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद कम

3 सितंबर 2026 हरियाणा में डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के सामने निजी स्वास्थ्य क्षेत्र को अपने साथ जोड़ने की बड़ी चुनौती सामने आई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में लक्षित निजी और PPP स्वास्थ्य संस्थानों में से अभी केवल करीब 12 फीसदी ही Health Facility Registry (HFR) में पंजीकृत हुए हैं। वहीं निजी नर्सों की भागीदारी सिर्फ 1 फीसदी के आसपास है।

सरकार अब इस कमी को दूर करने के लिए निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के बीच जागरूकता और पंजीकरण अभियान शुरू करने की तैयारी में है। इसकी शुरुआत गुरुग्राम से की जा रही है, जिसे हरियाणा के प्रमुख निजी स्वास्थ्य केंद्रों में गिना जाता है।

सिर्फ 11.92 फीसदी निजी स्वास्थ्य संस्थान पंजीकृत

नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) द्वारा 1 सितंबर तक संकलित आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा के 22 जिलों में 22,102 निजी और PPP स्वास्थ्य संस्थानों को HFR में पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से केवल 2,635 संस्थान, यानी 11.92 फीसदी, ही अब तक पंजीकृत हो पाए हैं।

इस आंकड़े से साफ है कि राज्य के निजी स्वास्थ्य क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अभी डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम से बाहर है। ऐसे में सरकार के सामने पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने और निजी अस्पतालों, क्लीनिकों तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को इस व्यवस्था से जोड़ने की चुनौती बनी हुई है।

गुरुग्राम जैसे बड़े हेल्थ हब में भी स्थिति कमजोर

हरियाणा में निजी स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े केंद्र गुरुग्राम में भी पंजीकरण की स्थिति उम्मीद के मुताबिक नहीं है। जिले में 5,011 निजी और PPP स्वास्थ्य संस्थानों को पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अभी तक केवल 10.74 फीसदी संस्थान ही HFR में दर्ज हुए हैं।

वहीं कुछ जिलों में स्थिति इससे भी कमजोर है। फरीदाबाद में निजी स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण करीब 6.47 फीसदी, नूंह में 5.75 फीसदी और पलवल में 5.58 फीसदी रहा।

इसके मुकाबले महेंद्रगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वहां निजी HFR कवरेज 57.83 फीसदी रही। पंचकूला में यह 38.81 फीसदी और रेवाड़ी में 21.44 फीसदी दर्ज की गई।

निजी डॉक्टरों का पंजीकरण भी अधूरा

सिर्फ अस्पताल और स्वास्थ्य संस्थान ही नहीं, बल्कि निजी डॉक्टरों को डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा में लक्षित 49,313 निजी डॉक्टरों में से अभी 8,575 डॉक्टर, यानी करीब 17.38 फीसदी, Healthcare Professional Registry (HPR) में पंजीकृत हैं। इसका मतलब है कि 40,738 निजी डॉक्टर अभी इस सिस्टम से बाहर हैं।

निजी नर्सों की स्थिति और भी कमजोर है। राज्य में 1,03,523 निजी नर्सों को सिस्टम से जोड़ने का लक्ष्य है, लेकिन अभी केवल 938 नर्सें, यानी लगभग 1 फीसदी, पंजीकृत हुई हैं। एक लाख से ज्यादा निजी नर्सें अभी HPR के दायरे से बाहर हैं।

सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति बेहतर

निजी क्षेत्र के मुकाबले सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों और कर्मचारियों का डिजिटल पंजीकरण काफी बेहतर दिखाई देता है।

आधिकारिक डैशबोर्ड के अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का HFR पंजीकरण 97.98 फीसदी है। वहीं सरकारी डॉक्टरों का पंजीकरण करीब 90.48 फीसदी बताया गया है। कई जिलों में सरकारी नर्सों का पंजीकरण भी 90 फीसदी से ऊपर है।

इससे निजी और सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र के डिजिटल एकीकरण के बीच बड़ा अंतर सामने आता है।

डिजिटल हेल्थ सिस्टम में पंजीकरण क्यों जरूरी?

HFR और HPR में पंजीकरण को डिजिटल हेल्थ मिशन की बुनियादी कड़ी माना जाता है। किसी स्वास्थ्य संस्थान या स्वास्थ्यकर्मी के सिस्टम में पंजीकृत नहीं होने की स्थिति में मरीजों के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को ABHA आधारित व्यवस्था से जोड़ना मुश्किल हो जाता है।

डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य मरीज के स्वास्थ्य रिकॉर्ड जैसे प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट, बीमारी से जुड़ी जानकारी और उपचार का इतिहास डिजिटल रूप से उपलब्ध कराना है। इसके लिए अस्पताल और स्वास्थ्यकर्मी दोनों का डिजिटल सिस्टम से जुड़ना जरूरी है।

ABHA ID के मामले में जिलों में अंतर

डिजिटल हेल्थ मिशन की एक महत्वपूर्ण कड़ी ABHA (Ayushman Bharat Health Account) है। इसके जरिए नागरिक अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से लिंक कर सकते हैं।

राज्य के जिलों में ABHA ID बनाने की स्थिति भी अलग-अलग है। महेंद्रगढ़ में कवरेज 77.41 फीसदी रही। भिवानी में 74.76 फीसदी, फतेहाबाद में 75.03 फीसदी और करनाल में 72.62 फीसदी कवरेज दर्ज की गई।

वहीं नूंह में ABHA कवरेज 46.43 फीसदी रही। वहां 15.4 लाख से अधिक की लक्षित आबादी में से 8.25 लाख से ज्यादा लोग अभी इस सिस्टम से बाहर बताए गए हैं।

महेंद्रगढ़ बनेगा पहला डिजिटल हेल्थ मॉडल जिला

हरियाणा सरकार डिजिटल हेल्थ मिशन को गति देने के लिए महेंद्रगढ़ को राज्य का पहला ABDM Model District बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

गुरुग्राम में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय ABDM वर्कशॉप के दौरान महेंद्रगढ़ को मॉडल जिला के रूप में औपचारिक रूप से लॉन्च किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य जिले में ABDM इकोसिस्टम को व्यापक स्तर पर लागू कर दूसरे जिलों के लिए उदाहरण तैयार करना है।

निजी क्षेत्र को जोड़ने पर रहेगा फोकस

आने वाले चरण में सरकार का मुख्य फोकस निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने पर रहेगा। मेडिकल एसोसिएशन, रेगुलेटरी काउंसिल और अन्य पेशेवर संगठनों की मदद से पंजीकरण और वेरिफिकेशन प्रक्रिया को बढ़ावा देने की तैयारी है।

अगर निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ती है तो मरीजों को सरकारी और निजी दोनों स्वास्थ्य सेवाओं के बीच डिजिटल रिकॉर्ड साझा करने की सुविधा बेहतर तरीके से मिल सकती है।

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