6 सितंबर 2026 गुरुग्राम में बार-बार बारिश के बाद पैदा हो रही समस्याओं और विकास कार्यों में देरी को लेकर हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) अब सरकारी परियोजनाओं और अधिकारियों के कामकाज की निगरानी के लिए तकनीक आधारित व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। इसका उद्देश्य फाइलों और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी को रोकना और अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के लिए जवाबदेह बनाना है।
गुरुग्राम की बारिश के बाद बढ़ी चिंता
गुरुग्राम में मानसून के दौरान बार-बार जलभराव और यातायात संबंधी समस्याओं ने प्रशासनिक व्यवस्था और शहरी नियोजन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इन्हीं परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है।
सरकार का मानना है कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समय पर जमीन पर लागू होना भी जरूरी है। विकास कार्यों में लंबे समय तक देरी होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और सरकार की योजनाओं का असर भी कमजोर पड़ता है।
डिजिटल डैशबोर्ड से होगी काम की निगरानी
मुख्यमंत्री कार्यालय की नई व्यवस्था में विशेष डिजिटल डैशबोर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। इन डैशबोर्ड के माध्यम से परियोजनाओं के पूरे जीवनचक्र यानी काम शुरू होने से लेकर उसके पूरा होने तक की स्थिति को रियल टाइम में ट्रैक करने की योजना है।
इस व्यवस्था से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी परियोजना में देरी कहां और किस स्तर पर हो रही है। अधिकारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट तरीके से तय की जा सकेगी।
हर दिन की देरी का देना होगा जवाब
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अब प्रशासन में सख्त जवाबदेही पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों को परियोजनाओं और सरकारी कार्यों में होने वाली देरी के लिए जवाब देना होगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसा पारदर्शी और समयबद्ध तंत्र तैयार करना है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों को काम में होने वाली हर अनावश्यक देरी का जवाब देना पड़े।
गुरुग्राम और फरीदाबाद पर विशेष नजर
इस प्रशासनिक समीक्षा व्यवस्था के तहत गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे महत्वपूर्ण शहरी और आर्थिक केंद्रों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा स्थानीय निकायों के प्रमुखों को नई प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई है।
बड़े शहरी बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा के साथ-साथ मुख्यमंत्री स्तर से डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए रोजाना निगरानी की व्यवस्था भी की जा रही है।
अब फाइलों में अटकाने की गुंजाइश कम होगी
हरियाणा सरकार की इस पहल का एक अहम उद्देश्य सरकारी कामकाज में लंबे समय से चली आ रही प्रक्रियात्मक देरी को कम करना है। अक्सर किसी परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर प्रक्रिया आगे बढ़ने में समय लगता है।
नई निगरानी व्यवस्था के तहत अधिकारियों को तय समयसीमा में काम पूरा करने और प्रगति की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। अगर किसी काम में देरी होती है तो उसके कारण की समीक्षा की जाएगी।
राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्तर पर लिए गए फैसलों को तेजी से जमीन पर लागू करने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासनिक देरी के कारण कई बार नीतिगत फैसलों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर पैदा हो जाता है।
इसी समस्या को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। इससे सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
राव इंद्रजीत सिंह ने भी उठाए थे सवाल
गुरुग्राम से सांसद और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भी प्रशासनिक मशीनरी में जवाबदेही की कमी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सार्वजनिक कार्यों के लंबे समय तक अटके रहने का मुद्दा उठाया था।
इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर दिए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
देरी पर सख्त कार्रवाई का संकेत
नई व्यवस्था के तहत जिन अधिकारियों को सरकारी काम या परियोजनाएं सौंपी जाएंगी, उनसे समयबद्ध परिणाम देने की अपेक्षा की जाएगी। बिना उचित कारण के देरी होने पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।
इसका उद्देश्य अधिकारियों में जवाबदेही की भावना बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी परियोजनाएं केवल कागजों पर आगे न बढ़ें, बल्कि निर्धारित समय में जमीन पर भी पूरी हों।
आम लोगों को क्या फायदा होगा?
अगर यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिल सकता है। सड़क, जल निकासी, शहरी बुनियादी ढांचे और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी कम होने से लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल निगरानी के जरिए सरकार के पास परियोजनाओं की प्रगति का लगातार रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा। इससे जिम्मेदारी तय करने और काम में बाधा आने पर समय रहते हस्तक्षेप करने में मदद मिल सकती है।
