7 सितंबर 2026 पंजाब में कोयले की कमी के चलते बिजली संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। राज्य में बिजली उपलब्धता में करीब 1,850 मेगावाट की कमी सामने आई है। इसका सबसे ज्यादा असर औद्योगिक उत्पादन पर पड़ा है, जबकि घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को भी बिना पूर्व सूचना के बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
केंद्रीय बिजली हिस्से में भी बड़ी कमी
राज्य के बिजली अधिकारियों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पंजाब को केंद्रीय क्षेत्र के ताप विद्युत संयंत्रों से करीब 2,814 मेगावाट बिजली का निर्धारित हिस्सा मिलता है। हालांकि, वर्तमान में इन संयंत्रों से पंजाब को औसतन केवल करीब 1,621 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो रही है।
इस तरह राज्य के निर्धारित हिस्से की तुलना में करीब 1,193 मेगावाट की कमी बनी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग केंद्रीय ताप विद्युत संयंत्रों में उत्पादन और पंजाब के लिए निर्धारित बिजली के बीच अंतर के कारण यह कमी सामने आई है।
राजपुरा थर्मल प्लांट भी आधी क्षमता पर
बिजली संकट को और बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारण राजपुरा स्थित नाभा पावर लिमिटेड का थर्मल प्लांट भी है। इसकी स्थापित क्षमता 1,330 मेगावाट है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह करीब 50 प्रतिशत क्षमता पर चल रहा है और लगभग 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है।
इस कारण प्लांट की अधिकतम क्षमता की तुलना में करीब 670 मेगावाट की कमी हो रही है। केंद्रीय बिजली हिस्से में आई करीब 1,193 मेगावाट की कमी के साथ इसे जोड़ने पर पंजाब की बिजली उपलब्धता पर कुल असर लगभग 1,850 मेगावाट का बनता है।
उद्योगों पर सबसे ज्यादा असर
कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन घटने का सीधा असर पंजाब के उद्योगों पर पड़ रहा है। औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने से कारोबारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
उद्योगों के लिए लगातार बिजली आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बार-बार बिजली कटौती से उत्पादन प्रक्रिया बाधित होती है और मशीनरी को दोबारा शुरू करने में भी समय और अतिरिक्त लागत लग सकती है। मौजूदा स्थिति में राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
घरेलू और कृषि उपभोक्ता भी प्रभावित
बिजली संकट का असर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य के घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को भी अनिर्धारित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
पंजाब के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने इससे पहले कहा था कि कोयले की गंभीर राष्ट्रीय कमी के कारण राज्य में बिजली उत्पादन में करीब 1,500 मेगावाट की गिरावट आई है और पिछले कुछ दिनों से घरेलू तथा औद्योगिक क्षेत्रों में मजबूरी में बिजली कटौती की जा रही है।
राजपुरा और तलवंडी साबो संयंत्रों पर भी असर
मंत्री के अनुसार, केंद्र से कोयले की आपूर्ति में कमी का असर पंजाब के राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल पावर प्लांट पर पड़ा है। दोनों संयंत्रों को केंद्रीय स्तर से कोयले की आपूर्ति मिलती है और कम आपूर्ति के कारण इनकी उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, तलवंडी साबो के पास करीब पांच दिन और राजपुरा थर्मल प्लांट के पास करीब छह दिन का कोयला स्टॉक बताया गया था, जबकि पंजाब के सरकारी ताप विद्युत संयंत्रों में स्टॉक की स्थिति इससे बेहतर थी।
देशभर में भी कोयले की कमी
यह संकट केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर भी कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, भारी बारिश के कारण कोयला उत्पादक राज्यों में खनन और परिवहन गतिविधियों पर असर पड़ा है।
केंद्रीय बिजली प्राधिकरण के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि देश के कई कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। कोयला खदानों में बारिश के कारण उत्पादन और परिवहन प्रभावित होने से बिजली संयंत्रों तक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।
केंद्र और पंजाब सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप
बिजली संकट को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। पंजाब के बिजली मंत्री ने कोयले की कम आपूर्ति को बिजली संकट का प्रमुख कारण बताया और केंद्र से तत्काल कदम उठाने की मांग की।
वहीं, केंद्र की ओर से पंजाब सरकार के दावों पर सवाल उठाए गए हैं। केंद्र ने पंजाब के सरकारी ताप विद्युत संयंत्रों के कम Plant Load Factor (PLF) का हवाला देते हुए कहा कि कुछ संयंत्रों में पर्याप्त कोयला स्टॉक होने के बावजूद उनका प्रदर्शन कमजोर रहा।
बिजली संकट से राहत कब मिलेगी?
मौजूदा स्थिति में बिजली संकट से राहत कोयले की आपूर्ति और ताप विद्युत संयंत्रों की उत्पादन क्षमता सामान्य होने पर निर्भर करेगी। केंद्र स्तर पर कोयले की रेल ढुलाई बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं ताकि कम स्टॉक वाले बिजली संयंत्रों तक ईंधन पहुंचाया जा सके।
पंजाब सरकार ने केंद्र से कोयले की पर्याप्त और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि उद्योगों के साथ-साथ घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को भी निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
