4 नवंबर 2026 : हरियाणा सरकार ने नशे के खिलाफ अपनी कार्रवाई को मजबूत करते हुए नई एंटी-ड्रग पॉलिसी लागू की है। इसके तहत पहली बार राज्य के सभी 22 जिलों में संदिग्ध नशा-संबंधी मौतों का रिकॉर्ड रखने और उनकी जांच के लिए एक समान व्यवस्था बनाई गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए 30 दिनों के भीतर नशे की सप्लाई से जुड़े व्यक्ति तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक राज्य में नशे के कारण होने वाली मौतों को दर्ज करने के लिए कोई एक समान व्यवस्था नहीं थी। कई मामलों में पुलिस परिवारों की ओर से दी गई जानकारी पर निर्भर रहती थी। नई नीति के तहत स्वास्थ्य विभाग और पुलिस मिलकर मौतों की जांच करेंगे और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उनका वर्गीकरण करेंगे।
तीन श्रेणियों में दर्ज होंगी नशे से जुड़ी मौतें
नई व्यवस्था के तहत संदिग्ध नशा-संबंधी मौतों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली श्रेणी में संदिग्ध मामले होंगे, जिनमें नशे की भूमिका की आशंका हो। दूसरी श्रेणी में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर संभावित नशा-संबंधी मौतों को रखा जाएगा। तीसरी श्रेणी में फॉरेंसिक लैब की जांच से पुष्टि होने वाले मामले शामिल होंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी मौत को पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण के बिना नशे से हुई मौत घोषित न किया जाए। सरकार जिलों के आधार पर इन मामलों के आंकड़े जारी करेगी, लेकिन मृतकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे।
30 दिन में सप्लायर तक पहुंचने का लक्ष्य
नई नीति में केवल नशे की लत और उससे होने वाली मौतों पर ध्यान देने के बजाय सप्लाई नेटवर्क की पहचान पर भी जोर दिया गया है। प्रत्येक संदिग्ध मामले की जांच के जरिए नशे की सप्लाई करने वाले लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
हर पुलिस थाने में नशे के अड्डों का रजिस्टर रखा जाएगा। ऐसे अड्डों की पहचान होने के बाद उन्हें 30 दिनों के भीतर बंद करने की कार्रवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही व्यावसायिक मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी से जुड़े हर मामले में वित्तीय जांच भी की जाएगी, ताकि तस्करी से होने वाली कमाई और उसके नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
4,054 पंचायतों और 859 शहरी वार्डों का दोबारा होगा सत्यापन
हरियाणा में मार्च 2025 तक नशामुक्त घोषित की गईं 4,054 ग्राम पंचायतों और 859 शहरी वार्डों का अब दोबारा सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए बाहरी टीमों की ओर से चार प्रमुख बिंदुओं की जांच की जाएगी।
इनमें अचानक निरीक्षण के दौरान नशे का अड्डा नहीं मिलना, सूचीबद्ध नशा तस्करों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को इलाज से जोड़ने में ग्राम समितियों और परिवारों की भागीदारी तथा खेल मैदानों का नियमित इस्तेमाल शामिल है।
सरकारी मैदानों, पार्कों और सामुदायिक भवनों को खेल प्रशिक्षकों से जोड़कर शाम के समय उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की भी योजना है। यदि कोई पंचायत या वार्ड निर्धारित शर्तों पर खरा नहीं उतरता है तो उसी महीने उसका नशामुक्त प्रमाणपत्र वापस लिया जा सकेगा। दोबारा प्रमाणपत्र पाने के लिए उसे छह महीने तक सभी शर्तें पूरी करनी होंगी।
तस्करों की संपत्ति पर भी कार्रवाई तेज
सरकार ने नशा तस्करों की आर्थिक गतिविधियों पर कार्रवाई तेज करने की बात कही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच तस्करों की 19.52 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच या फ्रीज की गई। वर्ष 2025 में पूरे साल यह आंकड़ा 13.59 करोड़ रुपये था।
इसके अलावा, नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए केमिस्ट दुकानों पर डिकॉय खरीद यानी गुप्त ग्राहक के माध्यम से जांच की जाएगी। नियमों के उल्लंघन का पहला मामला सामने आने पर दुकान का लाइसेंस निलंबित करने और दूसरी बार प्रमाण मिलने पर लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान रखा गया है।
SANKALP सोसायटी करेगी निगरानी
नई एंटी-ड्रग व्यवस्था का संचालन सरकार की ओर से गठित SANKALP एंटी-ड्रग सोसायटी के माध्यम से किया जाएगा। इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूर्व हरियाणा पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह हैं। सोसायटी का उद्देश्य पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना तथा नशे की रोकथाम, इलाज और पुनर्वास से जुड़े प्रयासों की निगरानी करना है।
हरियाणा में NDPS मामलों में दोषसिद्धि की दर 2020 में 46.99 प्रतिशत थी, जो 2026 में बढ़कर 56.56 प्रतिशत बताई गई है। राज्य में 21 फास्ट ट्रैक NDPS अदालतें भी काम कर रही हैं, जिनमें से 13 अदालतें जून 2026 में स्थापित की गई थीं।
सरकार ने लोगों से नशे की बिक्री या तस्करी की जानकारी पुलिस थाने अथवा जिला उपायुक्त को देने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार, सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
