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हरियाणा की नई लैंड पूलिंग पॉलिसी मंजूर, जमीन मालिकों को मिलेगा 50% बिक्री योग्य क्षेत्र

4 नवंबर 2026 :  हरियाणा सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले के तहत विकास परियोजनाओं के लिए स्वेच्छा से जमीन देने वाले मालिकों को परियोजना के कुल बिक्री योग्य क्षेत्र का 50 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। शेष 50 प्रतिशत हिस्सा संबंधित विकास एजेंसी के पास रहेगा। नई नीति वर्ष 2022 की मौजूदा लैंड पूलिंग पॉलिसी की जगह लेगी।

इस नीति का उद्देश्य शहरी और औद्योगिक विकास परियोजनाओं में जमीन मालिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके तहत जमीन देने वाले लोगों को विकसित आवासीय, औद्योगिक, संस्थागत और पात्रता के अनुसार व्यावसायिक भूखंड मिल सकेंगे।

जमीन मालिकों को मिलेगा 50 प्रतिशत हिस्सा

नई नीति के अनुसार, स्वीकृत लेआउट प्लान में निर्धारित कुल बिक्री योग्य क्षेत्र का आधा हिस्सा जमीन मालिकों के लिए रखा जाएगा। पहले की नीति में जमीन मालिकों को मिलने वाला हिस्सा अविकसित जमीन के बाजार मूल्य से जोड़ा गया था। नए प्रावधान में इस व्यवस्था को हटाकर कुल बिक्री योग्य क्षेत्र का 50 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित किया गया है।

जमीन मालिकों के हिस्से में उनकी पात्रता के अनुसार व्यावसायिक स्थल भी शामिल होंगे। बाकी हिस्सा परियोजना की प्रकृति के आधार पर आवासीय, औद्योगिक या संस्थागत भूखंडों के रूप में दिया जाएगा।

चार साल तक हर साल मिलेंगे ₹1 लाख प्रति एकड़

नीति में जमीन देने वाले मालिकों के लिए अंतरिम वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया गया है। उन्हें योगदान की गई जमीन के अनुपात में प्रति एकड़ सालाना एक लाख रुपये की सहायता चार वर्षों तक मिलेगी। इसकी गणना सेल डीड यानी विक्रय विलेख के पंजीकरण की तारीख से की जाएगी।

यदि सेल डीड के पंजीकरण के 15 दिनों के भीतर यह राशि हस्तांतरित नहीं होती है, तो संबंधित जमीन मालिक को देरी की अवधि के लिए 9 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज देने का प्रावधान है।

चार साल में पूरा करना होगा विकास कार्य

नई नीति में विकास परियोजनाओं को पूरा करने की समयसीमा पांच साल से घटाकर चार साल कर दी गई है। संबंधित विकास एजेंसी को परियोजना की अंतिम मंजूरी की तारीख से चार वर्षों के भीतर सड़क, पानी, सीवरेज और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं का विकास पूरा करना होगा।

यदि एजेंसी निर्धारित अवधि में आधारभूत ढांचा विकसित नहीं कर पाती है, तो नीति के अनुसार जमीन मालिकों को उनकी जमीन वापस करने का प्रावधान है। हालांकि, 75 प्रतिशत जमीन मालिकों की सहमति मिलने पर एक साल का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है।

आवासीय और औद्योगिक भूखंडों का न्यूनतम आकार तय

नीति के तहत जमीन मालिकों को आवंटित किए जाने वाले विकसित भूखंडों का न्यूनतम आकार भी निर्धारित किया गया है।

  • आवासीय भूखंड: 100 वर्ग मीटर
  • औद्योगिक भूखंड: 250 वर्ग मीटर
  • संस्थागत भूखंड: 500 वर्ग मीटर

वास्तविक आवंटन जमीन मालिक की ओर से दिए गए क्षेत्रफल और उसकी पात्रता के अनुपात में होगा। जमीन मालिक अपने हिस्से के अनुसार बड़े भूखंड के लिए भी विकल्प चुन सकेंगे।

व्यावसायिक जगह के लिए अलग प्रावधान

नीति में जमीन के आकार के आधार पर व्यावसायिक जगह देने की व्यवस्था की गई है। एक हजार वर्ग मीटर से कम जमीन देने वालों को व्यावसायिक जगह नहीं मिलेगी। एक हजार से 1,999 वर्ग मीटर तक जमीन देने पर 7.56 वर्ग मीटर का एक कियोस्क दिया जा सकेगा।

वहीं, 2,000 से 2,999 वर्ग मीटर जमीन देने पर कुल 15.12 वर्ग मीटर के दो कियोस्क और 3,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक जमीन देने पर 22.68 वर्ग मीटर का एक बूथ देने का प्रावधान है।

छोटी जमीन देने वालों को मिलेगा नकद मुआवजा

999 वर्ग मीटर से कम जमीन का योगदान करने वाले मालिकों को विकसित भूखंड के बजाय नकद मुआवजा दिया जाएगा। यह राशि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत निर्धारित मुआवजे या भूखंड के आरक्षित मूल्य में से जो अधिक होगा, उसके आधार पर तय की जाएगी।

इसके अलावा, लैंड एंटाइटलमेंट सर्टिफिकेट रखने वाले जमीन मालिक अपने प्रमाणपत्रों को जोड़कर बड़े विकसित भूखंड के लिए संयुक्त रूप से आवेदन कर सकेंगे। विकास एजेंसी की ओर से आवंटित भूखंडों को वापस खरीदने की अवधि भी एक साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है।

जमीन जुटाने की प्रक्रिया भी तय

नीति के तहत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) जैसी एजेंसियां विकास परियोजनाओं के लिए जमीन की पहचान कर सकेंगी। जमीन मालिक भी पंजीकृत लैंड एग्रीगेटर के माध्यम से स्वेच्छा से अपनी जमीन देने की पेशकश कर सकेंगे।

परियोजना की जानकारी चार प्रमुख समाचार पत्रों, संबंधित एजेंसी की वेबसाइट और आधिकारिक नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित करनी होगी। संबंधित गांव के सरपंच या नगर क्षेत्र के मेयर को भी इसकी सूचना दी जाएगी। जमीन मालिकों को प्रस्तावित हिस्सेदारी की जानकारी मिलने के बाद अपनी सहमति देने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा।

नीति के तहत लैंड एग्रीगेटर को संबंधित राजस्व क्षेत्र की कृषि भूमि के कलेक्टर रेट का 0.5 प्रतिशत पारिश्रमिक दिया जाएगा। इसका भुगतान विकास एजेंसी करेगी। नई नीति में ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से लैंड पूलिंग को शामिल नहीं किया गया है।

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