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हरियाणा में 6.5 लाख मीट्रिक टन चावल अटका, मिलर्स ने अगले सीजन के लिए रजिस्ट्रेशन से किया इनकार

22 अगस्त 2026  हरियाणा में करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन चावल फंसा हुआ है। इस बीच राज्य के राइस मिलर्स ने आगामी धान सीजन के लिए पंजीकरण कराने से इनकार कर दिया है। मिलर्स का कहना है कि पिछले सीजन का चावल और भुगतान से जुड़े मुद्दे अभी तक पूरी तरह हल नहीं हुए हैं।

गोदामों में पड़ा है लाखों टन चावल

राज्य में बड़ी मात्रा में चावल अभी भी सरकारी गोदामों और मिलों में पड़ा है। मिलर्स के अनुसार, जब तक पुराने स्टॉक के निपटारे और उससे जुड़े भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक नए सीजन के लिए काम शुरू करना उनके लिए मुश्किल है।

अगले सीजन के रजिस्ट्रेशन से दूरी

राइस मिलर्स ने संबंधित विभाग के समक्ष अपनी चिंताएं रखी हैं। उनका कहना है कि पुराने चावल के उठान और भुगतान में देरी के कारण उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

इसी वजह से कई मिलर्स ने आगामी धान सीजन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया है। अगर बड़ी संख्या में मिलर्स पंजीकरण नहीं कराते हैं तो धान की खरीद और मिलिंग व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

धान खरीद व्यवस्था पर असर की आशंका

हरियाणा में हर साल बड़ी मात्रा में धान की सरकारी खरीद की जाती है। खरीद के बाद धान को राइस मिलों में भेजकर चावल तैयार किया जाता है। यदि मिलर्स समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं, तो नई फसल के समय धान के उठान, भंडारण और मिलिंग को लेकर समस्या पैदा हो सकती है।

इससे मंडियों में किसानों की फसल की आवाजाही भी प्रभावित होने की आशंका है।

मिलर्स ने उठाई अपनी मांगें

मिलर्स का कहना है कि सरकार को पहले पुराने स्टॉक से जुड़े मुद्दों का समाधान करना चाहिए। साथ ही लंबित भुगतान और चावल के उठान की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की गई है।

मिलर्स और सरकारी अधिकारियों के बीच बातचीत के जरिए गतिरोध दूर करने की कोशिश की जा रही है।

सरकार के सामने चुनौती

आगामी धान सीजन से पहले सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मिलर्स को रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार करना और पुराने स्टॉक का निपटारा करना है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो इसका असर पूरी खरीद व्यवस्था पर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, हरियाणा में करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन चावल के फंसे होने और राइस मिलर्स के अगले सीजन के लिए रजिस्ट्रेशन से दूरी बनाने से धान खरीद व्यवस्था पर संकट के संकेत मिल रहे हैं। अब सरकार और मिलर्स के बीच बातचीत के जरिए इस गतिरोध को दूर करना अहम होगा।

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