13 अगस्त, 2026 पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। चीमा ने कहा कि ED और CBI जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए किया जा रहा है।
हरपाल चीमा ने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। उनके अनुसार, विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ लगातार जांच और कार्रवाई से राजनीतिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
पंजाब सरकार में वित्त मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता चीमा ने केंद्र की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक रूप से विरोध करने वाले नेताओं को जांच एजेंसियों के माध्यम से दबाव में लाने की कोशिश कर रही है। चीमा के मुताबिक, जिन नेताओं की राजनीतिक विचारधारा भाजपा से अलग है, उनके खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई देखने को मिल रही है।
चीमा ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर मामलों की जांच करनी चाहिए।
पंजाब के वित्त मंत्री ने विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ चल रही विभिन्न जांचों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार पर विपक्षी नेताओं को डराने और उनकी राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। चीमा ने कहा कि विपक्षी दल जनता के मुद्दे उठाते रहेंगे और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
AAP नेता ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर संघीय संबंध लोकतंत्र के लिए जरूरी हैं। उनके अनुसार, केंद्र सरकार को राज्य सरकारों और विपक्षी दलों के साथ राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।
हरपाल चीमा के आरोपों के बाद पंजाब की राजनीति में केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार और भाजपा के बीच कई मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद रहे हैं।
विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर देश की राजनीति में लंबे समय से बहस चलती रही है। विपक्षी दल कई बार आरोप लगाते रहे हैं कि ED और CBI का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाता है। वहीं, केंद्र सरकार और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती रही हैं कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार अपना काम करती हैं।
इस पूरे विवाद में जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और उनकी कार्रवाई की निष्पक्षता महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। सरकार की ओर से किसी भी व्यक्ति के खिलाफ जांच किए जाने का आधार संबंधित मामले और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करता है।
चीमा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने केंद्र से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि ED और CBI जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से न हो।
पंजाब के वित्त मंत्री ने विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों को संसद और सार्वजनिक मंचों पर मजबूती से उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर AAP के विरोध को जारी रखने की बात कही। चीमा के अनुसार, राजनीतिक दलों के बीच मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक बहस और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से होना चाहिए।
कुल मिलाकर, हरपाल चीमा ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर ED और CBI के कथित राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि, ये चीमा के राजनीतिक आरोप हैं और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित मामलों के तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
