10 अगस्त, 2026 : एक महत्वपूर्ण फैसले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीन का कब्जा कानूनी रूप से ले लिए जाने के बाद उस पर भौतिक रूप से कब्जा बनाए रखना या जमीन का तत्काल इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है।
अदालत ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अधिग्रहण प्रक्रिया में कब्जा लेने की कानूनी कार्रवाई और जमीन का वास्तविक या भौतिक उपयोग अलग-अलग अवधारणाएं हैं। इसलिए केवल इस आधार पर अधिग्रहण को चुनौती नहीं दी जा सकती कि सरकार ने जमीन पर तत्काल निर्माण या अन्य गतिविधि शुरू नहीं की।
कब्जा लेने की कानूनी प्रक्रिया अहम
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकरण ने कानून के अनुसार अधिग्रहित भूमि का कब्जा ले लिया है, तो केवल भौतिक उपयोग नहीं होने के कारण अधिग्रहण की वैधता प्रभावित नहीं होती।
भूमि अधिग्रहण मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणी
अदालत की यह टिप्पणी उन मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां जमीन मालिक अधिग्रहण के बाद सरकार द्वारा जमीन का तत्काल इस्तेमाल नहीं किए जाने को आधार बनाकर राहत की मांग करते हैं।
नियमों के अनुसार होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले में अधिग्रहण की प्रक्रिया, कब्जा लेने की कार्रवाई और संबंधित रिकॉर्ड को लागू कानून के आधार पर देखा जाएगा। केवल जमीन के भौतिक उपयोग के अभाव को अधिग्रहण समाप्त होने का आधार नहीं माना जा सकता।
