23 अगस्त 2026 पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में प्रस्तावित डिच-कम-बंड (DCB) रक्षा परियोजना को लेकर किसानों की चिंताएं सामने आई हैं। किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर परियोजना के प्रस्तावित संरेखण, कृषि भूमि पर संभावित असर और जलभराव की आशंका को लेकर अपनी चिंताएं रखीं।
किसानों ने बताई अपनी चिंताएं
बैठक में किसानों ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में वे पहले से ही बाढ़, सीमा पार घुसपैठ और खेती से जुड़ी कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई किसानों की जमीन पहले से ही कंटीली तार की बाड़ के पार स्थित है, जिससे खेती करना मुश्किल होता है।
किसानों ने आशंका जताई कि प्रस्तावित डिच-कम-बंड से कृषि भूमि और खेतों का विभाजन हो सकता है। इसके अलावा प्राकृतिक जल निकासी प्रभावित होने से बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
18 सीमावर्ती गांवों पर असर की आशंका
किसानों के अनुसार, प्रस्तावित करीब 31 किलोमीटर लंबी रक्षा परियोजना फाजिल्का जिले के लगभग 18 सीमावर्ती गांवों की कृषि भूमि को प्रभावित कर सकती है। किसानों ने परियोजना के संरेखण की दोबारा समीक्षा करने और स्थानीय लोगों से चर्चा के बाद आगे बढ़ने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था बाधित होने पर खेतों और गांवों में पानी भरने की समस्या गंभीर हो सकती है।
राज्यपाल ने दिया समाधान का भरोसा
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन सीमा पर रहने वाले किसानों के हितों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सेना और प्रशासन को ऐसा रास्ता तलाशना चाहिए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहने के साथ किसानों के हितों की भी रक्षा हो सके।
कटारिया ने किसानों को आश्वासन दिया कि वह प्रस्तावित बंड के स्थल का दो महीने के भीतर दौरा करेंगे।
तकनीकी पहलुओं की भी होगी समीक्षा
इससे पहले राज्यपाल से हुई मुलाकात में किसानों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया गया था कि सेना की तकनीकी टीम परियोजना स्थल का निरीक्षण करेगी। परियोजना के तकनीकी पहलुओं और किसानों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
सुरक्षा और किसानों के हित में संतुलन की मांग
किसानों का कहना है कि वे देश की सुरक्षा को समझते हैं और सीमा पर सेना के साथ हमेशा सहयोग करते रहे हैं। हालांकि, उनका आग्रह है कि किसी भी रक्षा परियोजना को लागू करने से पहले किसानों की जमीन, सिंचाई, जल निकासी और गांवों की पहुंच से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाए।
राज्यपाल ने भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता, लेकिन परियोजना को लेकर किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान तलाशना जरूरी है।
कुल मिलाकर, फाजिल्का के सीमावर्ती इलाकों में प्रस्तावित डिच-कम-बंड रक्षा परियोजना को लेकर किसानों ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के सामने अपनी आपत्तियां रखी हैं। किसानों को उम्मीद है कि परियोजना के तकनीकी पहलुओं और उनके हितों की समीक्षा के बाद ऐसा समाधान निकलेगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ कृषि और ग्रामीण आबादी के हित भी सुरक्षित रहें।
