24 मई 2026 : दिल्ली सरकार ने राजधानी की हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए पेड़ों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर रोक लगाने हेतु नए और सख्त नियम जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य अवैध कटाई, पेड़ों को नुकसान पहुंचाने और शहरी विकास के नाम पर हरित क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण को रोकना है। सरकार का कहना है कि दिल्ली के “फेफड़ों” यानी हरित आवरण को बचाना अब प्राथमिकता है।
नए नियमों के तहत पेड़ों की कटाई या ट्रांसप्लांट (स्थानांतरण) के लिए अनुमति प्रक्रिया को और सख्त किया गया है। अब बिना अनुमति किसी भी पेड़ को काटने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा। इसके साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
दिल्ली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और निर्माण गतिविधियों के कारण हरित क्षेत्र पर दबाव बढ़ रहा है। कई स्थानों पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और नुकसान की शिकायतें सामने आने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। अधिकारियों के अनुसार, यह नियम वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करेंगे।
वन विभाग और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित निरीक्षण करें और पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। साथ ही, शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली विकसित की जा रही है।
नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संस्था पेड़ काटते हुए पकड़ी जाती है तो उस पर आर्थिक दंड के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। निर्माण कंपनियों को अब परियोजना शुरू करने से पहले हरित क्षेत्र का संरक्षण प्लान प्रस्तुत करना होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर पेड़ों की देखभाल और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे ताकि लोग पेड़ों के महत्व को समझें और उन्हें संरक्षित करने में सहयोग करें।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच पेड़ों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पेड़ न केवल ऑक्सीजन प्रदान करते हैं बल्कि धूल और प्रदूषकों को भी कम करते हैं। ऐसे में इन नियमों को समय पर लागू करना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
नागरिकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे राजधानी में हरियाली बढ़ेगी और पर्यावरण की स्थिति में सुधार होगा।
