27 जून 2026 : मानसून और भारी बारिश की संभावित स्थिति को देखते हुए दिल्ली प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए तीन चरणों वाली चेतावनी प्रणाली लागू कर दी है। इस योजना के तहत यमुना नदी में पानी का स्तर बढ़ने और हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के आधार पर अलर्ट, निगरानी और बचाव की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
दिल्ली के बाढ़ नियंत्रण विभाग की योजना के अनुसार, यमुना में पानी छोड़े जाने की मात्रा बढ़ने पर अलग-अलग स्तर के चेतावनी संकेत जारी किए जाएंगे। अधिकारियों का उद्देश्य समय रहते संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी रखना है।
तीन चरणों में होगी कार्रवाई
पहला चेतावनी स्तर तब लागू होगा जब हथिनीकुंड बैराज से पानी का प्रवाह एक लाख क्यूसेक से अधिक होगा। इसके बाद नियंत्रण कक्ष सक्रिय होंगे और यमुना किनारे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
दूसरे स्तर का अलर्ट तब जारी होगा जब पानी का प्रवाह तीन लाख क्यूसेक से ऊपर जाएगा। इस स्थिति में यमुना के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सबसे गंभीर स्थिति में, जब पानी का प्रवाह पांच लाख क्यूसेक से अधिक होगा, तब उच्च स्तर की चेतावनी जारी की जाएगी और ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी जाएगी।
यमुना और नालों पर विशेष निगरानी
बाढ़ नियंत्रण योजना में यमुना के अलावा नजफगढ़ ड्रेन जैसे प्रमुख जल निकासी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। प्रशासन ने जलभराव वाले इलाकों की पहचान कर वहां निगरानी और आपात व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की है।
दिल्ली सरकार ने मानसून से पहले नालों की सफाई और गाद हटाने का काम भी तेज किया है। अधिकारियों के अनुसार, जल निकासी व्यवस्था बेहतर करने के लिए बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया है।
जलभराव वाले क्षेत्रों पर नजर
प्रशासन ने दिल्ली में कई ऐसे स्थानों की पहचान की है जहां बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आ सकती है। इन इलाकों में निगरानी और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की जा रही है।
आपदा प्रबंधन की तैयारी
बाढ़ जैसी स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था रखने की योजना बनाई गई है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी ली जा सकती है।
दिल्ली में हर साल मानसून के दौरान यमुना का बढ़ता जलस्तर और जलभराव बड़ी चुनौती बनता है। नई चेतावनी प्रणाली का उद्देश्य नुकसान कम करना और लोगों को समय पर सुरक्षित करना है।
