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दिल्ली हाईकोर्ट ने DUSU जीत के जुलूस पर मांगा DU से जवाब, आदेश उल्लंघन का आरोप

24 सितंबर 2026  दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद कथित तौर पर विजय जुलूस निकाले जाने के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है। अदालत के पहले के आदेश में चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकालने पर रोक लगाई गई थी। अब एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ विजयी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने इस निर्देश के बावजूद विजय जुलूस निकाले।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से देखा जाएगा।

18 सितंबर को हाईकोर्ट ने लगाया था जुलूस पर प्रतिबंध

दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को DUSU चुनाव से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान निर्देश दिया था कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कोई भी उम्मीदवार, छात्र, समर्थक या अन्य व्यक्ति विजय जुलूस नहीं निकालेगा।

यह रोक केवल दिल्ली की सड़कों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यूनिवर्सिटी कैंपस और हॉस्टल में भी विजय जुलूस निकालने पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने यह निर्देश DUSU चुनाव में कथित तौर पर चुनावी नियमों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन से जुड़े मामले में दिया था।

19 सितंबर को घोषित हुए थे DUSU चुनाव के नतीजे

DUSU चुनाव के लिए मतदान 18 सितंबर को हुआ था और परिणाम 19 सितंबर को घोषित किए गए। इसके बाद याचिकाकर्ता अधिवक्ता प्रशांत मंछंदा ने हाईकोर्ट में आवेदन दायर कर आरोप लगाया कि कुछ विजयी उम्मीदवारों ने अदालत के निर्देश के बावजूद विजय जुलूस निकाले।

याचिका में इसे अदालत के आदेश की अवहेलना बताते हुए संबंधित पक्षों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है। अदालत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और संबंधित उम्मीदवारों से इस मामले में जवाब मांगा है।

सभी उम्मीदवारों को पहले ही जारी हो चुके हैं नोटिस

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि DUSU चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों, जिसमें विजयी उम्मीदवार भी शामिल हैं, को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि कथित उल्लंघनों से संबंधित सभी सामग्री और सबूत एक डोजियर के रूप में तैयार कर कोर्ट के सामने पेश किए जाएं। इसके आधार पर अदालत आगे मामले पर विचार करेगी।

कोर्ट ने कहा- मुद्दा सिर्फ जश्न या ढोल का नहीं

सुनवाई के दौरान दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कीर्ति उप्पल ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद छात्रों की भावनाओं को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार जीत के बाद ढोल भी नहीं बजाए गए।

इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी मुख्य चिंता ढोल बजाने को लेकर नहीं है। अदालत ने कहा कि चिंता कथित तौर पर धनबल और बाहुबल के प्रदर्शन को लेकर है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस साल DUSU चुनाव में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने नहीं आना एक सुधार है, लेकिन अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है।

चुनावी नियमों के उल्लंघन पर पहले भी जताई थी चिंता

DUSU चुनाव के दौरान हाईकोर्ट ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों और चुनावी आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर चिंता जताई थी। अदालत ने 140 उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को भी नोटिस जारी कर पूछा था कि कथित चुनावी उल्लंघनों के लिए उनके खिलाफ चुनावी क्षतिपूर्ति क्यों न लगाई जाए।

अदालत ने यह भी कहा था कि नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित उम्मीदवारों और संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

अब DU के जवाब पर टिकी नजर

अब दिल्ली यूनिवर्सिटी और संबंधित उम्मीदवारों को विजय जुलूस से जुड़े आरोपों पर अपना पक्ष रखना होगा। याचिकाकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री और DU के जवाब के आधार पर हाईकोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।

फिलहाल अदालत ने यह तय नहीं किया है कि कथित विजय जुलूस निकालने वाले उम्मीदवारों या अन्य लोगों के खिलाफ अंतिम रूप से क्या कार्रवाई की जाएगी। मामला न्यायिक विचाराधीन है और आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब आना बाकी है।

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