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दिल्ली में पत्नी की हत्या के मामले में पति दोषी करार, 2020 में हुई थी वारदात

22 अक्तूबर 2026: दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2020 में पत्नी की हत्या के मामले में फजरुद्दीन उर्फ ननवा को दोषी करार दिया है। अदालत ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य सबूत आरोपी के खिलाफ अपराध साबित करते हैं। मामले में प्रमुख गवाहों के अपने पुराने बयानों से मुकर जाने के बावजूद अदालत ने सबूतों की पूरी श्रृंखला को अहम माना।

साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समर विशाल ने 13 अक्टूबर 2026 को दिए फैसले में फजरुद्दीन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी ठहराया। यह मामला दक्षिण दिल्ली के नेब सराय थाने में दर्ज किया गया था।

फरवरी 2020 में हुई थी वारदात

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 फरवरी 2020 को फजरुद्दीन ने अपनी पत्नी शमीना की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। उस समय दंपती शमीना की बहन के घर संगम विहार में रह रहा था। शमीना का वहां किडनी में पथरी के इलाज के लिए आना हुआ था और दोनों करीब एक सप्ताह से वहां ठहरे हुए थे।

शुरुआत में शमीना के रिश्तेदार मोहम्मद ताहिर ने पुलिस को बताया था कि उसने आरोपी को शमीना के ऊपर बैठकर उसकी गर्दन दबाते हुए देखा था। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान ताहिर अपने पहले के बयान से मुकर गया। शमीना की बहन, भाई और अन्य रिश्तेदारों ने भी अपने पुराने बयानों का समर्थन नहीं किया।

मेडिकल रिपोर्ट ने हत्या की पुष्टि की

अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टर की गवाही को महत्वपूर्ण माना। रिपोर्ट के अनुसार, शमीना की मौत गला घोंटे जाने के कारण दम घुटने से हुई थी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने गर्दन पर मिले घावों को हाथों से गला दबाए जाने के अनुरूप बताया।

अदालत ने कहा कि गर्दन पर जानलेवा चोटें पहुंचाने की परिस्थितियां हत्या के इरादे को भी दर्शाती हैं। गवाहों के मुकरने के बावजूद मेडिकल साक्ष्य ने अभियोजन पक्ष के मामले को समर्थन दिया।

डीएनए साक्ष्य भी बने अहम आधार

जांच के दौरान आरोपी की शर्ट जब्त की गई थी। फॉरेंसिक जांच में शर्ट पर मिले डीएनए प्रोफाइल को शमीना के रक्त से मिले डीएनए प्रोफाइल के समान पाया गया। अदालत ने इस साक्ष्य को अन्य परिस्थितियों के साथ मिलाकर देखा।

अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी को उन परिस्थितियों के बारे में उचित स्पष्टीकरण देना चाहिए था जो उसकी जानकारी में थीं। सभी साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि परिस्थितियों की श्रृंखला आरोपी के अपराध की ओर संकेत करती है और उसकी बेगुनाही की किसी उचित संभावना को समर्थन नहीं देती।

सजा पर अलग से होगी सुनवाई

अदालत ने फजरुद्दीन को हत्या का दोषी करार दिया है। फैसले में उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया गया। अदालत ने सजा की अवधि तय करने के लिए अलग से सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

इस प्रकार, गवाहों के मुकरने के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए जांच और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य इस मामले में दोषसिद्धि के महत्वपूर्ण आधार बने।

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