25 सितंबर 2026 चंडीगढ़ की ऐतिहासिक और विरासत से जुड़ी फर्नीचर वस्तुओं के विदेशों में नीलामी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब शहर के Administrative Buildings से जुड़ी Pierre Jeanneret द्वारा डिजाइन की गई दो और फर्नीचर वस्तुएं पेरिस और नीदरलैंड की नीलामी में सामने आई हैं। इन दोनों नीलामियों को लेकर चंडीगढ़ की विरासत वस्तुओं को वापस लाने और उनकी बिक्री रोकने के लिए तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
पेरिस में 30 सितंबर को होगी नीलामी
पेरिस में Artcurial की ‘Interior Motives: Artcurial x Reflections’ नीलामी में Pierre Jeanneret की एक कुर्सी सूचीबद्ध की गई है। यह नीलामी 30 सितंबर को प्रस्तावित है।
यह कुर्सी ‘Chair V Type Cane Seat Cane Back’ मॉडल की है और इसे करीब 1958 का बताया गया है। यह ठोस टीक लकड़ी और केन से तैयार की गई है। नीलामी सूची में इसकी अनुमानित कीमत 4,000 से 6,000 यूरो बताई गई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नीलामी कैटलॉग में इसकी provenance यानी मूल स्रोत के रूप में ‘Administrative buildings — Chandigarh’ दर्ज किया गया है।
नीदरलैंड में दो X-Leg armchairs की बिक्री
दूसरी ओर, नीदरलैंड में Hessink’s Fine Art Auctioneers की 10 अक्टूबर को होने वाली नीलामी में Pierre Jeanneret की दो X-Leg armchairs का सेट सूचीबद्ध है।
ये कुर्सियां टीक लकड़ी और चमड़े से बनी हैं। नीलामी कैटलॉग के अनुसार इनकी अनुमानित कीमत 5,000 से 7,000 यूरो है, जबकि इनके लिए 3,000 यूरो की शुरुआती बोली पहले ही लगाई जा चुकी है।
इस लॉट की provenance में ‘From the Administrative Buildings, Chandigarh, India’ दर्ज किया गया है।
विरासत कार्यकर्ता ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की
चंडीगढ़ की विरासत वस्तुओं की सुरक्षा के लिए लंबे समय से काम कर रहे हेरिटेज एक्टिविस्ट और अधिवक्ता अजय जग्गा ने इन दोनों नीलामियों को लेकर विदेश मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने अधिकारियों से यह पता लगाने की मांग की है कि ये फर्नीचर वस्तुएं चंडीगढ़ से कब और किन परिस्थितियों में बाहर गईं। साथ ही इनके निपटान या निर्यात के लिए किसी तरह की अनुमति दी गई थी या नहीं, इसकी भी जांच की मांग की गई है।
उन्होंने consignors की जानकारी, invoices, export-import documents, customs records और ownership से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच की मांग की है।
नीलामी कैटलॉग में चंडीगढ़ का उल्लेख अहम
हेरिटेज एक्टिविस्ट के अनुसार, दोनों नीलामी घरों द्वारा फर्नीचर की provenance में चंडीगढ़ के Administrative Buildings का उल्लेख किया जाना महत्वपूर्ण है।
इन रिकॉर्ड्स के आधार पर इन वस्तुओं की वास्तविक उत्पत्ति और ownership chain की जांच की जा सकती है। इसके बाद यह तय किया जा सकता है कि फर्नीचर किस तरह भारत से बाहर पहुंचा और वर्तमान नीलामी तक कैसे पहुंचा।
उन्होंने अधिकारियों से सत्यापन पूरा होने तक इन लॉट की बिक्री वापस लेने के लिए संबंधित विदेशी संस्थाओं के साथ संपर्क करने का भी आग्रह किया है।
पहले भी विदेशों में नीलामी में सामने आ चुका है फर्नीचर
चंडीगढ़ का Pierre Jeanneret furniture पहले भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में नीलामी के लिए सामने आता रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 2009 से अब तक फ्रांस, बेल्जियम, अमेरिका, स्पेन, ब्रिटेन, लक्जमबर्ग, इजरायल और न्यूजीलैंड समेत कई देशों में 100 से अधिक नीलामियों में चंडीगढ़ की विरासत फर्नीचर वस्तुएं सामने आ चुकी हैं।
हाल के मामलों में भी भारत की ओर से ऐसी वस्तुओं की बिक्री रोकने और उनकी provenance की जांच कराने के प्रयास किए गए हैं। इससे चंडीगढ़ की ऐतिहासिक फर्नीचर विरासत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही चिंता सामने आती है।
UNESCO ने भी पहले किया हस्तक्षेप
हाल ही में अमेरिका के Chicago स्थित Wright Auction House में चंडीगढ़ की छह विरासत फर्नीचर वस्तुओं की नीलामी हुई थी। इसके बाद UNESCO ने 13 अगस्त को Wright Auction House को पत्र लिखकर बेची गई वस्तुओं के ownership transfer को रोकने का आग्रह किया था। मामले में भारत की ओर से provenance verification की प्रक्रिया जारी है।
इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने राजनयिक माध्यमों के जरिए पेरिस और बार्सिलोना में होने वाली कुछ नीलामियों को रोकने के प्रयास किए थे। प्रशासन ने FIR और विदेश मंत्रालय के माध्यम से UNIDROIT Convention तथा UNESCO के heritage framework का भी सहारा लिया था।
Pierre Jeanneret की कुर्सियां क्यों महत्वपूर्ण हैं?
Pierre Jeanneret ने Le Corbusier के साथ मिलकर चंडीगढ़ के निर्माण और इसके वास्तु एवं फर्नीचर डिजाइन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शहर के सरकारी और सार्वजनिक भवनों के लिए तैयार किया गया उनका furniture आज चंडीगढ़ की आधुनिक वास्तुकला और डिजाइन विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
इन फर्नीचर वस्तुओं का महत्व केवल उनके डिजाइन या बाजार मूल्य तक सीमित नहीं है। उनके निर्माण और इस्तेमाल का संबंध चंडीगढ़ के शुरुआती विकास और शहर के संस्थागत इतिहास से भी जुड़ा हुआ है।
विरासत फर्नीचर को वापस लाने की मांग
अजय जग्गा ने लंबे समय से मांग की है कि चंडीगढ़ में बचे हुए Jeanneret furniture को औपचारिक रूप से सुरक्षित विरासत के रूप में संरक्षित किया जाए। उन्होंने लापता या शहर से बाहर जा चुकी Chandigarh heritage objects का केंद्रीय डेटाबेस तैयार करने की भी मांग की है।
उनका कहना है कि ऐसी वस्तुओं की पहचान, provenance verification और international tracking के लिए भारतीय संस्थाओं को INTERPOL, customs authorities, museums और अंतरराष्ट्रीय cultural agencies के साथ समन्वय करना चाहिए।
30 सितंबर की नीलामी से पहले हस्तक्षेप की चुनौती
पेरिस में नीलामी की तारीख 30 सितंबर तय है, जबकि नीदरलैंड की नीलामी 10 अक्टूबर को प्रस्तावित है। ऐसे में भारतीय अधिकारियों के सामने provenance की जांच और संभावित राजनयिक हस्तक्षेप के लिए सीमित समय है।
अब यह देखना होगा कि चंडीगढ़ प्रशासन और विदेश मंत्रालय इन दोनों मामलों में संबंधित विदेशी अधिकारियों तथा नीलामी घरों से किस तरह संपर्क करते हैं और क्या इन ऐतिहासिक वस्तुओं की बिक्री को सत्यापन पूरा होने तक रोका जा पाता है।
