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चंडीगढ़ में जन्मे अरशदीप सिंह डांग बने WWII के बाद ब्रिटेन के पहले सिख RAF फाइटर पायलट

17 अगस्त 2026 :  चंडीगढ़ में जन्मे फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशदीप सिंह डांग ने ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (RAF) में इतिहास रच दिया है। 28 वर्षीय डांग द्वितीय विश्व युद्ध के बाद RAF में फाइटर विंग्स हासिल करने वाले पहले सिख बने हैं। उन्होंने 14 अगस्त 2026 को नॉर्थ वेल्स के RAF Valley में आयोजित फास्ट-जेट पायलट ग्रेजुएशन समारोह में यह उपलब्धि हासिल की।

कौन हैं अरशदीप सिंह डांग?

अरशदीप सिंह डांग का जन्म 1998 में चंडीगढ़ में हुआ था। जब वह छह साल के थे, तब उनका परिवार ब्रिटेन चला गया। उनके पिता जगदीप सिंह डांग मूल रूप से लुधियाना से हैं, जबकि उनकी मां गगनदीप कौर अमृतसर से हैं। उनका परिवार वर्तमान में इंग्लैंड के साउथॉल में रहता है।

डांग ने University of Bristol से गणित और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने RAF की ऑफिसर ट्रेनिंग पूरी की और फरवरी 2022 में अपनी अधिकारी ट्रेनिंग पूरी की। 2023 में उन्होंने प्रारंभिक उड़ान प्रशिक्षण पूरा किया।

इसके बाद उन्होंने कुछ समय साइप्रस में सेवा की। 2024 में उनका चयन RAF के फास्ट-जेट ट्रेनिंग स्ट्रीम के लिए हुआ। मार्च 2025 में उन्होंने फास्ट-जेट लीड-इन ट्रेनिंग शुरू की और जुलाई 2025 में बेसिक फास्ट-जेट ट्रेनिंग में प्रवेश किया। अक्टूबर 2025 में उन्होंने टेक्सास में अकेले उड़ान भरने का चरण पूरा किया और जुलाई 2026 में अपना विंग्स टेस्ट पास किया।

सिख समुदाय के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

RAF के अनुसार, डांग 4 Flying Training School के तहत Texan aircraft पर प्रशिक्षण पूरा करने वाले पहले सिख trainee हैं। हालांकि, वे RAF में बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग से स्नातक होने वाले पहले सिख नहीं हैं। उनकी उपलब्धि विशेष रूप से फाइटर स्क्वाड्रन से फाइटर विंग्स हासिल करने से जुड़ी है।

उनकी उपलब्धि का संबंध सिखों की पुरानी सैन्य विमानन परंपरा से भी जुड़ता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई भारतीय और सिख पायलटों ने ब्रिटिश सैन्य विमानन में सेवा दी थी। डांग की उपलब्धि उसी विरासत की आधुनिक कड़ी मानी जा रही है।

परिवार के सपने को किया पूरा

अरशदीप सिंह डांग ने अपनी सफलता के पीछे परिवार के प्रोत्साहन को महत्वपूर्ण बताया है। उनके दादा सरदार संतोक सिंह डांग चाहते थे कि उनके बेटे यानी अरशदीप के पिता पायलट बनें। हालांकि, उनके दादा का निधन तब हो गया था जब उनके पिता केवल छह साल के थे।

बाद में अरशदीप के माता-पिता ने उन्हें पायलट बनने के सपने को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। डांग ने बताया कि परिवार के समर्थन से उन्हें विश्वास हुआ कि वह पायलट बन सकते हैं और उन्होंने आखिरकार यह सपना पूरा किया।

आगे क्या करेंगे अरशदीप?

फाइटर विंग्स हासिल करने के बाद अरशदीप सिंह डांग की ट्रेनिंग अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। अब उन्हें करीब एक साल की और गहन ट्रेनिंग से गुजरना होगा, जिसके बाद वह फ्रंटलाइन फाइटर एयरक्राफ्ट की ओर आगे बढ़ेंगे।

डांग ने अपनी उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि वह इस उपलब्धि को हासिल करने वाले पहले सिख जरूर हैं, लेकिन आखिरी नहीं बनना चाहते।

अरशदीप सिंह डांग की कहानी चंडीगढ़ से शुरू होकर ब्रिटेन के RAF तक पहुंची है। उनकी सफलता परिवार के सपने, कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का उदाहरण है। उनकी उपलब्धि भारतवंशी और सिख समुदाय के लिए भी गर्व का विषय बनी है।

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