18 जुलाई 2026 कभी देसी गुलाब की महक के लिए मशहूर अमृतसर का सदियों पुराना गुलाब के इत्र (फ्लावर एसेंस) का कारोबार अब अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। देसी गुलाब की खेती लगातार घटने के कारण इस पारंपरिक उद्योग पर गहरा असर पड़ा है और इससे जुड़े कारीगरों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
स्थानीय कारीगरों के अनुसार, पहले बड़ी मात्रा में देसी गुलाब की खेती होती थी, जिससे इत्र, गुलाब जल और अन्य सुगंधित उत्पाद तैयार किए जाते थे। लेकिन खेती का रकबा कम होने, उत्पादन लागत बढ़ने और किसानों के अन्य फसलों की ओर रुख करने से कच्चे माल की उपलब्धता तेजी से घटी है।
व्यापारियों का कहना है कि देसी गुलाब की कमी के कारण उत्पादन लागत बढ़ गई है, जबकि बाजार में प्रतिस्पर्धा और बदलती उपभोक्ता मांग ने पारंपरिक कारोबार को और मुश्किल बना दिया है। परिणामस्वरूप कई पुराने परिवार, जो पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़े थे, अब इसे छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देसी गुलाब की खेती को प्रोत्साहन, किसानों को उचित सहायता और पारंपरिक इत्र उद्योग को संरक्षण नहीं मिला, तो अमृतसर की यह ऐतिहासिक विरासत धीरे-धीरे समाप्त हो सकती है। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन और सरकारी सहयोग से इस उद्योग को नया जीवन दिया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि अमृतसर की पहचान केवल धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देसी गुलाब और उससे जुड़े इत्र का यह पारंपरिक कारोबार भी शहर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
