2 नवंबर 2026 : पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने खेतों में निगरानी और किसानों से संपर्क बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर (DC) दलविंदरजीत सिंह ने चोगावां, हरशा छीना और अजनाला ब्लॉक के आठ गांवों का दौरा किया। उन्होंने खेतों में जाकर पराली प्रबंधन के इंतजामों की समीक्षा की और किसानों से फसल अवशेष जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की अपील की।
आठ गांवों में खेतों का किया निरीक्षण
DC ने लोपोके, सारंगड़ा, भीलोवाली, कक्कड़, चमियारी, कुरालियां, थोबा और कुक्कड़ांवाला गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से बातचीत कर यह जानकारी ली कि धान की पराली के प्रबंधन के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाए जा रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान खेतों में इन-सीटू और एक्स-सीटू पराली प्रबंधन की व्यवस्था भी देखी गई। इन-सीटू तरीके में फसल अवशेष को खेत में ही मशीनों की मदद से मिट्टी में मिलाया जाता है, जबकि एक्स-सीटू प्रबंधन में पराली को खेत से इकट्ठा करके दूसरे उपयोग के लिए भेजा जाता है।
किसान हरि सिंह के खेत में देखी सुपर सीडर से गेहूं की बिजाई
गांव थोबा में DC ने किसान हरि सिंह के खेतों का निरीक्षण किया। उन्होंने बेलर मशीनों के जरिए इकट्ठा की गई पराली के भंडारण और प्रबंधन की व्यवस्था देखी। इसके साथ ही सुपर सीडर की मदद से गेहूं की बिजाई का काम भी देखा गया।
सुपर सीडर धान के अवशेष को खेत में ही मिट्टी के भीतर मिलाने में मदद करता है। इससे पराली को जलाने की जरूरत कम हो सकती है और फसल अवशेष का खेत में ही उपयोग किया जा सकता है। DC ने वैज्ञानिक तरीके से पराली प्रबंधन करने के लिए किसान के प्रयासों की सराहना की।
किसानों और बेलर मालिकों से की बातचीत
दौरे के दौरान DC ने किसानों और बेलर मशीनों के मालिकों से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि धान की कटाई के बाद पराली को आग लगाने से बचना चाहिए। पराली जलाने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होती है और पर्यावरण की गुणवत्ता खराब होती है। इससे निकलने वाला धुआं लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम पैदा करता है।
उन्होंने बेलर मालिकों द्वारा बनाए गए पराली भंडारण स्थलों का भी निरीक्षण किया। DC ने कहा कि सरकार पराली के उचित प्रबंधन के लिए जरूरी सहयोग देने और एकत्रित फसल अवशेष की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पराली प्रबंधन के लिए मशीनों का इस्तेमाल जरूरी
धान की कटाई के बाद कम समय में खेत खाली करने की जरूरत के कारण कई किसान पराली जलाने का विकल्प अपनाते हैं। ऐसे में कृषि मशीनरी की समय पर उपलब्धता और किसानों को तकनीकी सहायता देना महत्वपूर्ण है।
बेलर मशीनों से पराली की गांठें तैयार कर उन्हें दूसरे उपयोग के लिए भेजा जा सकता है। वहीं सुपर सीडर जैसी मशीनें खेत में ही फसल अवशेष का प्रबंधन करने में मदद करती हैं। इन विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग किसानों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।
पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए जारी अभियान
अमृतसर और तरनतारन को पराली जलाने की घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। ऐसे में जिला प्रशासन के साथ वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) भी स्थिति पर नजर रख रहा है। अधिकारियों को गांवों में नियमित निरीक्षण, मशीनों की उपलब्धता और किसानों के साथ समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि किसानों को पराली प्रबंधन के व्यावहारिक विकल्प समय पर मिलें, ताकि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोका जा सके। आने वाले दिनों में खेतों की निगरानी और किसानों को जागरूक करने की गतिविधियां जारी रहने की उम्मीद है।
