2 नवंबर 2026 : पंजाब के कपूरथला जिले के भगतपुर गांव के किसान परमजीत सिंह ने पारंपरिक गेहूं और धान की खेती से आगे बढ़कर सब्जियों की नर्सरी का कारोबार स्थापित किया है। अब उनके बेटे लवप्रीत सिंह भी इस काम में शामिल हो गए हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना से बागवानी में एमएससी कर चुके लवप्रीत बीज उत्पादन और नई हाइब्रिड किस्मों के विकास पर काम कर रहे हैं। पिता-पुत्र की यह पहल खेती में विविधता और नई तकनीक अपनाने का उदाहरण बन रही है।
1998 में शुरू की पारंपरिक खेती से अलग राह
परमजीत सिंह का परिवार वर्ष 1998 तक मुख्य रूप से गेहूं और धान की खेती करता था। लेकिन वह खेती के नए तरीकों को जानना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय जाना शुरू किया। वहां उन्होंने सब्जियों की खेती, नर्सरी प्रबंधन और दूसरी कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की।
शुरुआत में परिवार के अन्य सदस्य उनके इस फैसले को लेकर आश्वस्त नहीं थे। पारंपरिक खेती से अलग रास्ता अपनाने और नई जानकारी हासिल करने के लिए बार-बार बाहर जाने पर उनसे सवाल भी किए जाते थे। हालांकि, जब नर्सरी का काम आगे बढ़ा और कारोबार ने आकार लेना शुरू किया, तो परिवार का समर्थन भी मिलने लगा।
तीन एकड़ में फैली है सब्जियों की नर्सरी
लगातार सीखने और प्रयोग करने के बाद परमजीत सिंह ने करीब तीन एकड़ क्षेत्र में सब्जियों की नर्सरी स्थापित की। यहां किसानों के लिए अलग-अलग सब्जियों की पौध तैयार की जाती है।
नर्सरी में फूलगोभी, प्याज, पत्तागोभी और बैंगन जैसी सब्जियों के पौधे तैयार किए जाते हैं। इन पौधों को किसान अपनी खेती में रोपाई के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। परमजीत सिंह के अनुसार, उनका उद्देश्य पारंपरिक खेती से अलग कुछ करना और किसानों को बेहतर पौध उपलब्ध कराना था।
वर्ष 2014 में तत्कालीन उपायुक्त ने भी कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया था। क्षेत्र में सब्जियों की नर्सरी की शुरुआत करने वाले शुरुआती किसानों में उनका परिवार शामिल रहा है।
बेटे ने संभाली बीज उत्पादन और हाइब्रिड किस्मों की जिम्मेदारी
परमजीत सिंह के बेटे लवप्रीत सिंह ने बागवानी में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद पारिवारिक काम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। वह अब नर्सरी के साथ-साथ बीज उत्पादन और नई हाइब्रिड किस्मों के विकास पर ध्यान दे रहे हैं।
लवप्रीत के अनुसार, परिवार नियंत्रित परागण की प्रक्रिया के जरिए नई हाइब्रिड किस्में विकसित करने और उनके बीज तैयार करने का काम कर रहा है। फिलहाल मिर्च की फसल से जुड़े एक प्रोजेक्ट पर भी काम किया जा रहा है। तैयार किए गए बीज वितरकों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाए जाते हैं।
नियंत्रित परागण में पौधों के चयन और पराग के स्थानांतरण को व्यवस्थित तरीके से किया जाता है, ताकि वांछित गुणों वाली नई किस्में विकसित की जा सकें। इस प्रक्रिया में तकनीकी जानकारी और सावधानी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
खेती में नवाचार की मिसाल बना परिवार
परमजीत सिंह और लवप्रीत सिंह का काम दिखाता है कि खेती को केवल गेहूं और धान तक सीमित रखने के बजाय नर्सरी, बीज उत्पादन और बागवानी जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों से तकनीकी जानकारी लेना और नए प्रयोग करना उपयोगी हो सकता है।
पिता के अनुभव और बेटे की शैक्षणिक विशेषज्ञता के मेल से परिवार ने अपने कृषि कारोबार को नया रूप दिया है। उनकी यात्रा उन किसानों के लिए एक उदाहरण है जो पारंपरिक फसल चक्र से आगे बढ़कर खेती में नए अवसर तलाशना चाहते हैं।
