2 नवंबर 2026 : पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। AAP के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए उसे ‘कबाड़ की दुकान’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पंजाब में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने के लिए दूसरी पार्टियों से बाहर हुए या निकाले गए नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
धालीवाल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब AAP के दो विधायकों चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। दोनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं, हालांकि उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा पर दूसरी पार्टियों के नेताओं को शामिल करने का आरोप
अमृतसर में मीडिया से बातचीत के दौरान धालीवाल ने कहा कि भाजपा के पास पंजाब में अपना मजबूत नेतृत्व और जनाधार नहीं है। उनके अनुसार, पार्टी कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और AAP से जुड़े रहे नेताओं को अपने साथ जोड़कर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ऐसे नेताओं को भी अपने साथ लेने की कोशिश कर रही है, जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं या जिन्हें दूसरी पार्टियों ने अनुशासनहीनता के कारण बाहर किया है। धालीवाल ने दावा किया कि पंजाब में भाजपा का संगठन दूसरे दलों से आए नेताओं पर निर्भर है।
दो AAP विधायकों के इस्तीफे के बाद बढ़ी चर्चा
चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने रविवार को AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। जौड़ामाजरा समाना और पठानमाजरा सनौर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों नेताओं ने राज्य सरकार के कामकाज और पंजाब से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाए।
जौड़ामाजरा ने पंजाब में नशे की समस्या, किसानों और सरकारी स्कूलों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की आलोचना की। वहीं, पठानमाजरा ने राज्य के बढ़ते कर्ज और सरकार के कामकाज में दिल्ली के नेताओं की भूमिका को लेकर आरोप लगाए। उनके भाजपा में जाने की अटकलें हैं, लेकिन दोनों ने अपने अगले राजनीतिक कदम की स्पष्ट घोषणा नहीं की है।
AAP ने अपने नेताओं पर कार्रवाई का किया बचाव
धालीवाल ने कहा कि AAP ने भ्रष्टाचार या पार्टी अनुशासन के उल्लंघन के आरोपों का सामना करने वाले अपने नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने पंजाब के हितों को प्राथमिकता देते हुए अपने मंत्रियों और विधायकों पर भी कार्रवाई करने में संकोच नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि गंभीर आरोपों और पार्टी विरोधी गतिविधियों से जुड़े नेताओं को पहले ही निलंबित या पार्टी से बाहर किया जा चुका है। हालांकि, इन मामलों में लगे आरोपों और संबंधित नेताओं के पक्ष को न्यायिक तथा अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।
2027 के चुनाव से पहले तेज हुई सियासी हलचल
AAP ने हाल ही में पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। इसके बाद दो विधायकों के इस्तीफे और भाजपा में संभावित शामिल होने की चर्चाओं ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
धालीवाल ने भाजपा के नशा विरोधी अभियान और जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली को लेकर भी आलोचनात्मक टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि AAP सरकार के कामकाज को पंजाब की जनता का समर्थन मिल रहा है।
फिलहाल, दोनों इस्तीफा देने वाले विधायकों के अगले राजनीतिक कदम और भाजपा की ओर से संभावित शामिल किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर दोनों दलों की प्रतिक्रियाएं पंजाब की राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी रह सकती हैं।
