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हाईकोर्ट के स्टे के बाद रोहतक PGIMS के निदेशक डॉ. सिंघल रिलीव, डॉ. एमजी वशिष्ठ को अतिरिक्त जिम्मेदारी

4 नवंबर 2026 :  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद हरियाणा सरकार ने रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (PGIMS) के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार सिंघल को पद से रिलीव कर दिया है। उनकी जगह सर्जरी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मदन गोपाल वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी।

राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष की ओर से सोमवार शाम इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। यह फैसला हाईकोर्ट द्वारा डॉ. सिंघल की दोबारा नियुक्ति पर रोक लगाए जाने के करीब दो सप्ताह बाद आया है।

हाईकोर्ट ने दोबारा नियुक्ति पर लगाई थी रोक

डॉ. सुरेश कुमार सिंघल को 13 अगस्त 2026 को PGIMS के निदेशक पद पर तीन साल के लिए दोबारा नियुक्त किया गया था। इस नियुक्ति को डॉ. अनिल पन्निकर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिका में दलील दी गई थी कि डॉ. सिंघल ने 31 जुलाई 2026 को 65 वर्ष की आयु पूरी कर ली थी। विश्वविद्यालय के नियमों के स्टैच्यूट 3(1)(e) के अनुसार, निदेशक 65 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद पद पर बने नहीं रह सकते। याचिकाकर्ता का कहना था कि संबंधित नियमों में आयु सीमा में छूट देने का प्रावधान नहीं है।

16 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने डॉ. सिंघल की दोबारा नियुक्ति के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि संस्थान का कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए 65 वर्ष से कम आयु के किसी योग्य व्यक्ति को निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी जाए।

डॉ. एमजी वशिष्ठ को मिली अतिरिक्त जिम्मेदारी

सरकार के नए आदेश के अनुसार, डॉ. मदन गोपाल वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से PGIMS निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। वह वर्तमान में संस्थान के सर्जरी विभाग में वरिष्ठ प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं। वह इससे पहले दो बार PGIMS में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

कार्यभार संभालने के बाद डॉ. वशिष्ठ ने मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने, शोध गतिविधियों को मजबूत करने और चिकित्सा शिक्षा के स्तर में सुधार को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरीजों की शिकायतों का जल्द समाधान करने पर भी जोर दिया।

सरकार से मांगा गया था नियुक्ति का कानूनी आधार

हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया था कि 65 वर्ष की निर्धारित आयु सीमा के बावजूद डॉ. सिंघल को दोबारा नियुक्त करने का कानूनी आधार क्या था।

अदालत ने यह भी पूछा था कि आयु सीमा में छूट देने का अधिकार किस प्राधिकरण के पास था और नियमित निदेशक की नियुक्ति के लिए शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया को पूरा क्यों नहीं किया गया। अदालत ने संबंधित सरकारी सिफारिश और आधिकारिक रिकॉर्ड भी मांगे थे।

25 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

डॉ. सिंघल की दोबारा नियुक्ति को लेकर मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अदालत ने फिलहाल नियुक्ति आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है और सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को निर्धारित है।

फिलहाल डॉ. वशिष्ठ को निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने के बाद PGIMS का प्रशासनिक कामकाज जारी रहेगा। हाईकोर्ट में आगे होने वाली सुनवाई और सरकार के जवाब से इस नियुक्ति विवाद की अगली स्थिति स्पष्ट होगी।

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