3 नवंबर 2026 : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव के दूसरे दिन हरियाणवी फैशन शो आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान प्रदेश के अलग-अलग शिक्षण संस्थानों से आए विद्यार्थियों ने पारंपरिक हरियाणवी परिधानों को नए अंदाज में रैंप पर प्रस्तुत किया। फैशन शो में 15 से अधिक संस्थानों के 50 से ज्यादा विद्यार्थियों ने हिस्सा लेकर हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक पहनावे की विविधता दिखाई।
50 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
हरियाणवी फैशन शो में महिला और पुरुष, दोनों वर्गों के पारंपरिक परिधानों को प्रदर्शित किया गया। विद्यार्थियों ने पारंपरिक कपड़ों को आधुनिक प्रस्तुति के साथ मंच पर पेश किया। इससे हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपराओं को युवा पीढ़ी के सामने नए रूप में रखने का प्रयास किया गया।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के निदेशक विवेक चावला ने कहा कि फैशन शो के माध्यम से दर्शकों को हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत की व्यापक झलक देखने को मिली। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार विरेंद्र पाल ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य युवाओं को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना है।
पारंपरिक परिधानों ने खींचा दर्शकों का ध्यान
फैशन शो में हरियाणवी घाघरा, धोती-कुर्ता, चुंदड़ी, वायल, दामण, खायर, दुपट्टा, कुर्ती, गाती, पगड़ी, घाघरी, सौंपली और दुकानिया सहित कई पारंपरिक परिधान प्रदर्शित किए गए।
इन परिधानों के जरिए हरियाणा के अलग-अलग क्षेत्रों की पहनावे संबंधी परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को सामने लाया गया। पारंपरिक कपड़ों की डिजाइन, रंग और पहनने के तरीके ने प्रदेश की लोक विरासत को प्रदर्शित किया।
पांच साल पहले शुरू हुआ था फैशन शो
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क निदेशक डॉ. महा सिंह पूनिया ने बताया कि रत्नावली महोत्सव में हरियाणवी फैशन शो की शुरुआत पांच साल पहले की गई थी। उनके अनुसार, इस पहल से प्रदेश में पारंपरिक हरियाणवी पहनावे की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद मिली है।
उन्होंने बताया कि इससे पारंपरिक परिधानों के निर्माण और बिक्री को भी प्रोत्साहन मिला है। इस क्षेत्र में सैकड़ों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की बात भी सामने आई है।
विद्यार्थियों के स्टार्टअप और उद्यमिता को भी मंच
रत्नावली महोत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। इस बार महोत्सव में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, उद्यमिता और तकनीकी नवाचार को प्रदर्शित करने के लिए 42 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें विभिन्न उत्पादों, खानपान, हस्तशिल्प और तकनीक आधारित पहलों को जगह दी गई है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि रत्नावली विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ व्यावसायिक विचारों को आगे बढ़ाने और उद्यमिता का व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर भी देती है।
तकनीकी स्टार्टअप भी बने आकर्षण
महोत्सव में विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों द्वारा विकसित स्टार्टअप भी प्रदर्शित किए गए। टीम ब्लैक पर्ल ने अपनी फॉर्मूला रेसिंग कार पेश की, जो विद्यार्थियों की इंजीनियरिंग क्षमता और तकनीकी कौशल को दर्शाती है।
इसके अलावा, हमसेतु नामक स्टार्टअप कच्चे माल के संयंत्रों, विनिर्माण उद्योगों और नए उद्यमों को बिजनेस-टू-बिजनेस सेवाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। वहीं, विमानशाला स्वदेशी ड्रोन तकनीक और ड्रोन प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है। ई-वेस्टिफाई 5 इलेक्ट्रॉनिक कचरे के प्रबंधन, खराब उपकरणों की मरम्मत और पुराने उपकरणों को किफायती कीमत पर दोबारा उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।
रत्नावली महोत्सव में पारंपरिक संस्कृति के साथ विद्यार्थियों के नए विचारों और तकनीकी प्रतिभा को भी मंच मिल रहा है। इस तरह आयोजन हरियाणा की लोक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ युवाओं को अपनी रचनात्मक और व्यावसायिक क्षमताएं दिखाने का अवसर दे रहा है।
