29 सितंबर 2026 पंजाब में धान की कटाई के मौसम के दौरान पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए राज्य सरकार ने उद्योग जगत के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने Confederation of Indian Industry (CII) के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर फसल अवशेष प्रबंधन, क्लीन टेक्नोलॉजी और किसानों के लिए व्यावहारिक समाधान को लेकर चर्चा की।
पराली प्रबंधन पर सरकार और उद्योग मिलकर करेंगे काम
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन के लिए सरकार और उद्योग को मिलकर ऐसे समाधान तैयार करने चाहिए जो किसानों के लिए प्रभावी होने के साथ-साथ किफायती भी हों। बैठक में पराली प्रबंधन, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई।
सरकार का जोर तकनीक आधारित ऐसे उपायों पर है, जिनके जरिए किसानों को पराली के निपटारे के लिए व्यावहारिक विकल्प मिल सकें और खेतों में अवशेष जलाने की जरूरत कम हो।
मालवा क्षेत्र पर विशेष फोकस
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में फसल अवशेष प्रबंधन को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। खास तौर पर संगरूर और बरनाला जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया, जहां पराली प्रबंधन को लेकर तकनीकी और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।
पंजाब में धान की कटाई के बाद बड़ी मात्रा में फसल अवशेष निकलता है। ऐसे में इसके वैज्ञानिक और आर्थिक इस्तेमाल को बढ़ावा देना प्रदूषण कम करने के साथ-साथ किसानों के लिए अतिरिक्त अवसर भी पैदा कर सकता है।
क्लीन टेक्नोलॉजी से प्रदूषण कम करने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने क्लीन टेक्नोलॉजी को इस पूरी पहल का अहम हिस्सा बताया। सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित समाधान अपनाकर फसल अवशेषों को खेत में जलाने के बजाय उनका बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
CII के साथ सहयोग का उद्देश्य ऐसी तकनीकों और प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना है, जो किसानों की जरूरतों के अनुरूप हों। इसके साथ ही संसाधनों के कुशल इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
किसानों के लिए किफायती समाधान जरूरी
पराली प्रबंधन को लेकर किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लागत और उपलब्ध विकल्पों की है। इसी वजह से बैठक में ऐसे समाधान विकसित करने पर जोर दिया गया जिन्हें किसान व्यावहारिक रूप से अपना सकें।
सरकार और उद्योग के बीच सहयोग से नई तकनीकों, मशीनों और फसल अवशेषों के उपयोग से जुड़े मॉडल विकसित किए जा सकते हैं। इससे पराली को केवल अपशिष्ट मानने के बजाय संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में भी काम हो सकता है।
पंजाब में प्रदूषण कम करने की चुनौती
धान की कटाई के समय पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं लंबे समय से पर्यावरण और वायु गुणवत्ता से जुड़ी बड़ी चुनौती रही हैं। इसका असर पंजाब के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों की हवा पर भी पड़ता है।
इसी बीच राज्य सरकार किसानों से पराली न जलाने की अपील करती रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों से धान की कटाई के दौरान पराली का उचित प्रबंधन करने की अपील करते हुए कहा था कि सरकार किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मंशा नहीं रखती और समाधान पर जोर दिया जाना चाहिए।
कृषि के साथ औद्योगिक विकास पर भी चर्चा
CII के साथ बैठक केवल पराली प्रबंधन तक सीमित नहीं रही। इसमें पंजाब में औद्योगिक विकास, निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी ढांचे और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति की जरूरत पर जोर दिया। सरकार का लक्ष्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना है।
बागवानी और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा
बैठक में बागवानी क्षेत्र में ज्ञान और तकनीक के आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने CII Agro Tech India 2026 के तहत World Horticulture Centre के भारत दौरे के लिए सरकार की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया।
इस तरह कृषि, पर्यावरण और उद्योग को एक साथ जोड़कर पंजाब में तकनीक आधारित विकास को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
पराली से समस्या के बजाय समाधान की ओर
पंजाब सरकार और CII के बीच सहयोग का एक प्रमुख उद्देश्य फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनके बेहतर इस्तेमाल के विकल्प तलाशना है। यदि किसानों को कम लागत में प्रभावी तकनीकी समाधान मिलते हैं, तो इससे पराली प्रबंधन आसान हो सकता है।
हालांकि, इस पहल का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि विकसित किए जाने वाले समाधान कितनी तेजी से खेतों तक पहुंचते हैं और किसान उन्हें किस स्तर पर अपनाते हैं।
कुल मिलाकर, पंजाब सरकार ने पराली के धुएं और फसल अवशेषों से जुड़ी समस्या से निपटने के लिए उद्योग जगत के साथ सहयोग बढ़ाने की पहल की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और CII की बैठक में क्लीन टेक्नोलॉजी, किफायती समाधान और मालवा क्षेत्र में पराली प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य किसानों को व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराकर पराली जलाने की जरूरत को कम करना और पंजाब में प्रदूषण पर रोक लगाना है।
