22 सितंबर 2026: हरियाणा कांग्रेस ने अपनी जिला इकाइयों के संगठनात्मक कामकाज को लेकर अगले तीन महीनों के लिए स्पष्ट और मापने योग्य लक्ष्य तय किए हैं। पार्टी नेतृत्व ने जिला कांग्रेस कमेटियों (DCC) से केवल रिपोर्ट जमा करने के बजाय जमीनी स्तर पर काम और उसके नतीजे दिखाने को कहा है। यह फैसला 17 सितंबर को गुरुग्राम में हुई जिला इकाइयों की समीक्षा बैठक के बाद सामने आया।
हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी संजय दत्त ने संकेत दिया है कि तय संगठनात्मक मानकों पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने वाले जिलों और ब्लॉक इकाइयों को संगठनात्मक अभियान के दूसरे चरण में समीक्षा के दायरे में लाया जा सकता है। मौजूदा नेतृत्व की भी समीक्षा हो सकती है, हालांकि किसी पदाधिकारी को स्वतः हटाने की कोई तय प्रक्रिया घोषित नहीं की गई है।
तीन महीने में क्या करना होगा?
जिला कांग्रेस कमेटियों को अगले तीन महीनों के लिए स्पष्ट एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है। इसमें ऐसे लक्ष्य शामिल किए जाने हैं जिनकी प्रगति को जमीन पर मापा जा सके।
समीक्षा का मुख्य जोर संगठन को जिला स्तर से लेकर मंडल, ब्लॉक और बूथ स्तर तक सक्रिय बनाने पर है। जिला अध्यक्षों से अपने क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों की नियमित निगरानी और कार्यकर्ताओं के साथ सक्रिय संपर्क बनाए रखने की अपेक्षा की गई है।
किन कामों के आधार पर होगा आकलन?
पार्टी की समीक्षा में कई संगठनात्मक गतिविधियों को शामिल किया गया है। इनमें मंडल मैपिंग, ब्लॉक कांग्रेस सम्मेलन, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े कार्य और बूथ स्तर पर वोटर असिस्टेंस सेंटर का संचालन प्रमुख हैं।
इसके अलावा जिला इकाइयों को अपने क्षेत्रों की स्थानीय जनसमस्याओं की पहचान करने और उन्हें उठाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा गया है। यानी सिर्फ संगठन के अंदर बैठकें करने के बजाय स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता भी समीक्षा का हिस्सा होगी।
केवल कागजी रिपोर्ट पर नहीं रहेगा जोर
हरियाणा कांग्रेस नेतृत्व ने साफ किया है कि संगठनात्मक गतिविधियों की केवल रिपोर्ट तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। जिला अध्यक्षों को अपने क्षेत्रों में काम की वास्तविक स्थिति दिखानी होगी।
संजय दत्त ने जिला इकाइयों से प्रदर्शन आधारित रिपोर्ट मांगी है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संगठनात्मक गतिविधियां मंडल और बूथ स्तर तक जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।
जिला अध्यक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण
इस पूरी प्रक्रिया में जिला कांग्रेस अध्यक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। उनसे संगठनात्मक काम की निगरानी करने, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बनाए रखने और तय लक्ष्यों की दिशा में प्रगति सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई है।
समीक्षा का उद्देश्य यह देखना है कि जिला स्तर का संगठन केवल प्रशासनिक ढांचा बनकर न रहे, बल्कि स्थानीय मुद्दों को उठाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने वाली इकाई के रूप में काम करे।
दूसरे चरण में हो सकती है समीक्षा
तीन महीने की समयसीमा पूरी होने के बाद संगठनात्मक अभियान के दूसरे चरण में जिलों और ब्लॉक इकाइयों की समीक्षा किए जाने की बात कही गई है।
अगर कोई इकाई निर्धारित मानकों के अनुसार काम नहीं करती है तो उसके प्रदर्शन पर दोबारा विचार किया जा सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि खराब प्रदर्शन की स्थिति में किस पदाधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर
हरियाणा कांग्रेस की यह कवायद संगठन को निचले स्तर तक सक्रिय करने के प्रयास के रूप में सामने आई है। 18 से 21 सितंबर के बीच राज्य में कई ब्लॉक कांग्रेस सम्मेलनों का कार्यक्रम भी रखा गया था, जिनमें पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों के साथ सीधे संवाद पर जोर दिया गया।
इस दौरान मंडल मैपिंग, SIR प्रक्रिया, बूथ वोटर असिस्टेंस सेंटर और स्थानीय जनहित के मुद्दों पर जिला स्तर की प्रगति का भी आकलन किया जाना है।
तीन महीने की डेडलाइन का सीधा मतलब
जिला कांग्रेस इकाइयों के लिए तीन महीने की यह समयसीमा मूल रूप से परिणाम आधारित संगठनात्मक समीक्षा का ढांचा तैयार करती है। जिला अध्यक्षों को अपने क्षेत्रों में तय लक्ष्य निर्धारित करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, बूथ स्तर पर गतिविधियां बढ़ाने और स्थानीय मुद्दों पर काम करने की दिशा में प्रगति दिखानी होगी।
इसके बाद संगठनात्मक नेतृत्व यह देखेगा कि निर्धारित लक्ष्यों पर कितना काम हुआ और क्या गतिविधियां केवल रिपोर्ट तक सीमित रहीं या उनका असर जमीन पर भी दिखाई दिया।
