21 सितंबर, 2026 : पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के 55 मेडिकल अफसरों को व्यापक बर्न मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी गई। यह प्रशिक्षण PGIMER के Centre of Excellence (Trauma & Burns) की ओर से आयोजित एक दिवसीय कोर्स के तहत दिया गया। इसका उद्देश्य जलने वाले मरीजों के समय पर और बेहतर इलाज के लिए मेडिकल अधिकारियों की क्षमता को मजबूत करना था।
बर्न मरीजों के शुरुआती इलाज पर जोर
यह कोर्स स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के National Programme for Prevention and Management of Trauma and Burn Injuries (NPPMTBI) के तहत आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जलने के मरीजों की शुरुआती जांच, प्राथमिक उपचार और पुनर्जीवन से लेकर आगे के इलाज, पुनर्वास और रिकवरी तक की प्रक्रिया पर जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बर्न मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद समय पर सही चिकित्सा सहायता मिल सके और गंभीर मामलों में उपचार की प्रक्रिया बेहतर तरीके से आगे बढ़ाई जा सके।
कई महत्वपूर्ण मेडिकल प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी
कोर्स के दौरान मेडिकल अफसरों को बर्न मरीजों की ट्रायेज और ट्रांसफर प्रोटोकॉल के बारे में बताया गया। इसके अलावा नसों के जरिए दवा और तरल देने की प्रक्रिया, एयरवे मैनेजमेंट, बर्न शॉक और रिससिटेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण में घाव की जांच, इनहेलेशनल बर्न यानी धुएं या गर्म गैस के कारण होने वाली चोट, इलेक्ट्रिकल बर्न और अलग-अलग प्रकार की जलने की चोटों की पहचान एवं प्रबंधन पर भी चर्चा हुई।
बच्चों में जलने की स्थिति पर भी प्रशिक्षण
बर्न मैनेजमेंट कोर्स में बच्चों में होने वाली जलने की चोटों को भी शामिल किया गया। इसके अलावा असामान्य या जटिल प्रकार की बर्न इंजरी के इलाज को लेकर भी मेडिकल अफसरों को जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में सर्जिकल उपचार और रिहैबिलिटेशन से जुड़े पहलुओं को भी समझाया गया, ताकि मेडिकल अधिकारी मरीज के शुरुआती उपचार के साथ-साथ आगे की रिकवरी प्रक्रिया को भी बेहतर तरीके से समझ सकें।
Burn ICU और Skin Bank का कराया गया दौरा
प्रशिक्षण में केवल थ्योरी पर ही जोर नहीं दिया गया, बल्कि प्रतिभागियों को PGIMER के Burn ICU और Skin Bank का दौरा भी कराया गया। इससे मेडिकल अफसरों को एक विशेष बर्न सेवा के कामकाज और गंभीर रूप से जले मरीजों की देखभाल की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला।
Skin Bank की भूमिका और बर्न मरीजों के इलाज में इसके महत्व के बारे में भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई।
प्रैक्टिकल सेशन में केस आधारित प्रशिक्षण
कोर्स के दौरान व्यावहारिक सत्र भी आयोजित किए गए। इनमें एयरवे मैनेजमेंट और इनहेलेशनल इंजरी की पहचान, मरीज के लिए उपयुक्त ड्रेसिंग का चयन और घाव की जांच से जुड़े अभ्यास शामिल रहे।
इसके अलावा केस आधारित चर्चाओं के जरिए बर्न मरीजों में फ्लूड कैलकुलेशन और घाव के आकलन को समझाया गया। इससे मेडिकल अफसरों को वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने से जुड़ी जानकारी हासिल हुई।
विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के कोर्स डायरेक्टर PGIMER के Department of Plastic Surgery के प्रमुख डॉ. अतुल पाराशर रहे। मल्टीडिसिप्लिनरी फैकल्टी ने बर्न मैनेजमेंट के विभिन्न पहलुओं पर मेडिकल अफसरों को प्रशिक्षण दिया।
कोर्स में शुरुआती उपचार से लेकर सर्जिकल रणनीति और पुनर्वास तक बर्न मरीजों की देखभाल से जुड़े अलग-अलग चरणों को शामिल किया गया।
समय पर इलाज से बेहतर हो सकती है रिकवरी
गंभीर रूप से जले मरीजों के मामले में शुरुआती चिकित्सा प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मरीजों में एयरवे, सांस लेने में परेशानी, शॉक, घाव की गंभीरता और संक्रमण जैसे कई पहलुओं पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत हो सकती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम मेडिकल अफसरों को शुरुआती स्तर पर मरीज की स्थिति पहचानने और जरूरत के अनुसार उचित उपचार या रेफरल की प्रक्रिया अपनाने में मदद कर सकते हैं।
