20 सितंबर, 2026 : आंखों में चोट को रोके जा सकने वाली दृष्टि हानि का एक महत्वपूर्ण कारण बताते हुए देश-विदेश के विशेषज्ञों ने आंखों की सुरक्षा, समय पर इलाज और विशेष चिकित्सा सेवाओं तक बेहतर पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया है। यह मुद्दा अमृतसर में आयोजित Ocular Trauma Society of India (OTSI) की तीन दिवसीय वार्षिक कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रमुखता से सामने आया।
कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और 58 राष्ट्रीय फैकल्टी सदस्य हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि आंखों की चोट के मामलों में शुरुआती स्तर पर सही उपचार और जरूरत पड़ने पर मरीज को विशेषज्ञ केंद्र तक जल्दी पहुंचाना दृष्टि को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आंखों की चोट से बचाव पर जोर
विशेषज्ञों ने आंखों की चोट को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। खासकर बच्चों, कामगारों और सड़क पर सफर करने वाले लोगों के लिए सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देने की बात कही गई।
OTSI ने 9 अक्टूबर को World Ocular Trauma Prevention Day घोषित किया है। इसका उद्देश्य आंखों की चोटों से बचाव के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
Protective eyewear का इस्तेमाल जरूरी
विशेषज्ञों ने कामकाजी स्थानों पर आंखों की सुरक्षा के लिए protective eyewear के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। कई तरह के कामों में आंखों के सीधे चोटिल होने का खतरा रहता है, इसलिए सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना गया।
इसके साथ ही सड़क सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और लोगों को आंखों की संभावित चोट से बचाने के लिए जरूरी सावधानियां अपनाने की जरूरत बताई गई।
समय पर अस्पताल पहुंचना महत्वपूर्ण
कॉन्फ्रेंस में early referral यानी आंख में गंभीर चोट लगने के बाद मरीज को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक या विशेष केंद्र तक पहुंचाने को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आंख की चोट के बाद उपचार में देरी होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे मामलों में शुरुआती जांच और उचित उपचार के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों तक मरीज की जल्द पहुंच जरूरी है। इसी कारण देश में specialised ocular-trauma services को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
आंख के अलग-अलग हिस्सों की चोट पर चर्चा
कॉन्फ्रेंस के वैज्ञानिक कार्यक्रम में आंखों के विभिन्न हिस्सों में होने वाली चोटों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। इसमें eyelids, orbit, cornea, lens, retina और optic nerve से जुड़ी चोटें शामिल हैं।
इन चोटों के इलाज से जुड़े जटिल मामलों को बेहतर तरीके से संभालने के लिए workshops भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें eyelid, orbital, lens और ocular wound repair से संबंधित practical training दी जा रही है।
विशेषज्ञों को practical training देने पर भी फोकस
OTSI के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. Shakeen Singh ने बताया कि कार्यक्रम में जटिल ocular injuries के management से जुड़े प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कॉन्फ्रेंस में 160 free-paper presentations और 40 surgical तथा educational videos भी शामिल हैं। इनमें clinical outcomes, diagnosis से जुड़ी चुनौतियों, surgical techniques और ocular trauma management के नए तरीकों पर चर्चा की जा रही है।
देश-विदेश के विशेषज्ञ ले रहे हिस्सा
अमृतसर में आयोजित इस वार्षिक कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अलावा 58 राष्ट्रीय फैकल्टी सदस्य भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में Padma Shri डॉ. AK Grover और Asia Pacific Society of Ocular Trauma के अध्यक्ष डॉ. Gangadhara Sundar सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं।
Election Commissioner डॉ. Sukhbir Singh Sandhu कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैं। वहीं Dr G Mukherjee Oration एक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी सदस्य द्वारा दिया जा रहा है। Air Marshal Dr MS Boparai Oration डॉ. T Nirmal Frederick को नेत्र चिकित्सा और ocular-trauma care में उनके योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है।
जागरूकता और बेहतर सेवाओं की जरूरत
विशेषज्ञों का जोर केवल गंभीर चोटों के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी चोटों को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर भी है। बच्चों, कामगारों और सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा उपायों को लेकर जानकारी बढ़ाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
साथ ही, अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ocular trauma से जुड़े मामलों की पहचान, शुरुआती उपचार और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ केंद्रों तक रेफरल की व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता भी सामने आई है।
