4 सितंबर 2026 पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) से संबद्ध 12 गैर-सरकारी कॉलेजों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। इन कॉलेजों ने बार-बार निर्देश और समयसीमा दिए जाने के बावजूद अब तक नियमित प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं की है। पंजाब यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार (कॉलेजेज) ने संबंधित कॉलेजों के गवर्निंग बॉडी के अध्यक्षों को 11 सितंबर को एफिलिएशन कमेटी के सामने पेश होने के लिए कहा है।
पिछले साल 42 कॉलेज नियमों के दायरे में थे
पंजाब यूनिवर्सिटी ने नियमित प्रिंसिपल की नियुक्ति को लेकर पिछले साल ऐसे कॉलेजों को निर्देश जारी किए थे। उस समय कुल 42 कॉलेज ऐसे थे, जिन्होंने विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक नियमित प्रिंसिपल नियुक्त नहीं किए थे।
विश्वविद्यालय की ओर से लगातार कार्रवाई और निर्देशों के बाद अब इनकी संख्या घटकर 12 रह गई है। हालांकि, इन 12 कॉलेजों ने अभी तक नियमों का पालन नहीं किया है और वहां कार्यवाहक प्रिंसिपल के जरिए प्रशासनिक कामकाज चल रहा है।
अक्टूबर में भेजे गए थे रिमाइंडर
रिपोर्ट के मुताबिक, इन कॉलेजों को पिछले साल अक्टूबर में नियमित प्रिंसिपल नियुक्त करने के लिए रिमाइंडर भेजे गए थे। इसके बाद भी जब आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो दिसंबर में संबंधित कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
विश्वविद्यालय के निर्देशों के बावजूद नियमित नियुक्ति नहीं होने के बाद अब एफिलिएशन कमेटी ने कॉलेजों के गवर्निंग बॉडी के अध्यक्षों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए बुलाया है।
छह महीने से ज्यादा कार्यवाहक प्रिंसिपल नहीं रह सकता
पंजाब यूनिवर्सिटी के कैलेंडर में निर्धारित नियमों के अनुसार कोई व्यक्ति कार्यवाहक प्रिंसिपल के पद पर छह महीने से अधिक समय तक नहीं रह सकता। इसके बावजूद संबंधित कॉलेजों में लंबे समय से कार्यवाहक प्रिंसिपल के जरिए कामकाज चलाया जा रहा है।
PU के डिप्टी रजिस्ट्रार (कॉलेजेज) सुरजीत ठाकुर ने बताया कि एफिलिएशन कमेटी ने संबंधित गवर्निंग बॉडी के अध्यक्षों को बुलाया है, क्योंकि प्रिंसिपल छह महीने से अधिक समय तक इस पद पर नहीं रह सकते।
आधिकारिक पत्राचार पर भी विश्वविद्यालय ने जताई आपत्ति
पंजाब यूनिवर्सिटी ने केवल नियमित प्रिंसिपल की नियुक्ति को लेकर ही सवाल नहीं उठाया है, बल्कि कॉलेजों की ओर से किए जा रहे आधिकारिक पत्राचार को लेकर भी आपत्ति जताई है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, कुछ कॉलेजों में अप्रूव नहीं किए गए कार्यवाहक प्रिंसिपलों या कॉलेज प्रबंधन की ओर से नियुक्त शिक्षकों के हस्ताक्षर से आधिकारिक पत्राचार किया जा रहा है। PU ने इसे भी नियमों के उल्लंघन के रूप में गंभीरता से लिया है।
चार कॉलेज लुधियाना से
नियमित प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं करने वाले 12 कॉलेजों में से चार लुधियाना के हैं। इनमें आर्य कॉलेज, गुजरांवाला गुरु नानक खालसा कॉलेज, गुरु गोबिंद सिंह खालसा कॉलेज फॉर वुमेन, कमालपुरा और मालवा सेंट्रल कॉलेज ऑफ एजुकेशन फॉर वुमेन शामिल हैं।
इसके अलावा सूची में चंडीगढ़ का होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, SBS नगर के रत्तेवाल का MBB GGG Girls College, अबोहर का DAV College of Education, फिरोजपुर के बाबा कुंदन सिंह को-एजुकेशन कॉलेज और गुरु नानक कॉलेज, मुक्तसर के बादल स्थित दशमेश गर्ल्स कॉलेज ऑफ एजुकेशन, मोगा का गुरु नानक कॉलेज और होशियारपुर का गुरु नानक खालसा कॉलेज फॉर वुमेन शामिल हैं।
शिक्षकों और छात्रों के हित पर असर
पंजाब एंड चंडीगढ़ कॉलेज टीचर्स यूनियन (PCCTU) के कार्यकारी सदस्य डॉ. वरुण गोयल ने कहा कि प्रिंसिपल छह महीने से अधिक समय तक पद पर नहीं रह सकता। उनके अनुसार, कार्यवाहक प्रिंसिपल शिक्षण कार्य कर सकता है, लेकिन प्रशासनिक कामकाज से जुड़ी सीमाएं होती हैं।
उन्होंने कहा कि कॉलेज में नियमित प्रिंसिपल नहीं होने से शिक्षकों के अधिकारों और छात्रों के हितों पर असर पड़ सकता है।
11 सितंबर को होगी अहम सुनवाई
अब इन 12 कॉलेजों के गवर्निंग बॉडी के अध्यक्षों को 11 सितंबर को एफिलिएशन कमेटी के सामने पेश होना है। इसके बाद विश्वविद्यालय संबंधित कॉलेजों के खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला कर सकता है।
PU की यह कार्रवाई विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर उसकी सख्ती को दर्शाती है। नियमित प्रिंसिपल की नियुक्ति का मुद्दा केवल प्रशासनिक पद भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉलेज के संचालन, शिक्षकों के अधिकार और छात्रों से जुड़े मामलों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
