2 सितंबर 2026 : हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की लंबे समय से जारी हड़ताल का मुद्दा बुधवार को विधानसभा के मानसून सत्र में जोरदार राजनीतिक बहस का कारण बन गया। कांग्रेस ने हड़ताल और कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
13 हजार कर्मचारी हड़ताल पर
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल 6 अगस्त से जारी है। सरकार के अनुसार करीब 13,000 कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं। हड़ताल के कारण प्रदेश के कई शहरों में कूड़ा जमा होने की समस्या गंभीर हो गई है और सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। इससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सफाई कर्मचारियों के अलावा फायरमैन भी इस हड़ताल में शामिल हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नौकरी नियमित करना यानी Regularisation सबसे अहम मुद्दा बना हुआ है।
सरकार ने 13 में से 12 मांगें मानी
सदन में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सफाई कर्मचारियों की 13 में से 12 मांगों को स्वीकार किया जा चुका है। नियमितीकरण की मांग पर सरकार कानूनी राय ले रही है।
सरकार द्वारा स्वीकार की गई मांगों में लीव ट्रैवल कंसेशन, न्यूनतम वेतन, कर्मचारी राज्य बीमा, कर्मचारी भविष्य निधि, जोखिम भत्ता, अनुकंपा सहायता, दुर्घटना बीमा और सफाई कर्मचारियों एवं सीवरमैन को क्लेरिकल पदों पर पदोन्नति जैसी मांगें शामिल हैं।
नियमितीकरण की मांग पर अटका मामला
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का सबसे बड़ा मुद्दा नियमितीकरण है। सरकार का कहना है कि इस मांग पर कानूनी राय ली जा रही है। सामाजिक न्याय मंत्री कृष्ण बेदी ने सदन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार की नियमितीकरण नीति का भी उल्लेख किया।
बेदी के अनुसार, उस नीति में 10 साल की सेवा के बाद नियमितीकरण का प्रावधान था, जबकि मौजूदा कर्मचारी दो साल की सेवा के बाद नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस विधायकों ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विपक्ष ने मांग की कि विधानसभा में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हो और सरकार कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए।
कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हड़ताल के दौरान सरकार के रवैये पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कांग्रेस विधायकों ने यह भी आरोप लगाया कि कई जगहों पर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई।
सदन में जातिगत टिप्पणी को लेकर विवाद
मामला उस समय और गरमा गया जब सामाजिक न्याय मंत्री कृष्ण बेदी ने कांग्रेस पर वाल्मीकि समुदाय को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को भड़का रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई और विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि मंत्री की ओर से विपक्ष को धमकी दी गई है। कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने भी सफाई कर्मचारियों के मुद्दे को जाति से जोड़ने पर आपत्ति जताई।
महिला कर्मचारियों के साथ कार्रवाई का आरोप
कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे सफाई कर्मचारियों के खिलाफ कई स्थानों पर मामले दर्ज किए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ महिला कर्मचारियों को हिरासत में लेते समय उनके बाल खींचे गए।
ये आरोप विपक्ष की ओर से सदन में लगाए गए हैं। सरकार की ओर से इस संबंध में अलग पक्ष रखा गया है। हड़ताल के दौरान कई शहरों में प्रशासन और प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के बीच तनाव की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
कूड़े के ढेर से शहरों में परेशानी
लंबी हड़ताल के कारण हरियाणा के कई शहरों में सड़कों, बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में कूड़ा जमा होने की समस्या बढ़ी है। इससे सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के साथ-साथ लोगों के सामने स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी चिंताएं भी खड़ी हुई हैं।
इससे पहले कई शहरों में स्थानीय निकायों ने पुलिस की मदद से कूड़ा उठाने के वैकल्पिक इंतजाम शुरू किए थे। कुछ स्थानों पर इन अभियानों के दौरान प्रदर्शनकारी कर्मचारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति भी बनी।
मुख्यमंत्री ने भी सदन में हस्तक्षेप किया
विधानसभा में बहस के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि मंत्री ने सदन को सरकार की स्थिति से अवगत कराया है और यह मुद्दा नया नहीं है।
सरकार की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि कर्मचारियों की अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया गया है और नियमितीकरण के मुद्दे पर कानूनी पहलुओं को देखा जा रहा है।
सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था का दिया संकेत
हड़ताल जारी रहने की स्थिति में सरकार और स्थानीय निकायों ने कूड़ा उठाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही है। सरकार का उद्देश्य शहरों में सफाई व्यवस्था को बनाए रखना और लोगों को लगातार बढ़ रही गंदगी से राहत दिलाना है।
हालांकि, कर्मचारियों का आंदोलन नियमितीकरण की मांग पर केंद्रित है और इसी मुद्दे पर सरकार तथा कर्मचारी संगठनों के बीच गतिरोध बना हुआ है।
विधानसभा में हड़ताल बनी बड़ा राजनीतिक मुद्दा
हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त होने के दौरान सफाई कर्मचारियों की हड़ताल सबसे प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में से एक बन गई। एक ओर सरकार 13 में से 12 मांगें स्वीकार करने की बात कह रही है, वहीं कांग्रेस नियमितीकरण सहित कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रही है।
