29 अगस्त 2026: रक्षाबंधन के मौके पर बठिंडा की सेंट्रल जेल में भावुक नजारा देखने को मिला। इस खास दिन जेल में बंद कैदियों को अपनी बहनों से बिना किसी कांच या जाली की बाधा के मिलने और राखी बंधवाने की अनुमति दी गई। बड़ी संख्या में बहनें अपने भाइयों से मिलने जेल पहुंचीं और उनकी कलाई पर राखी बांधी।
सालों बाद भाई से मिली बहन
रक्षाबंधन के अवसर पर कई परिवारों के लिए यह मुलाकात बेहद भावुक रही। एक युवती अपने जेल में बंद भाई से मिलने तीन साल बाद विदेश से बठिंडा पहुंची। भाई से मिलने और उसकी कलाई पर राखी बांधने के बाद उसने खुशी जाहिर की।
कई बहनों ने अपने भाइयों से अपराध की राह छोड़कर सामान्य जीवन जीने की अपील भी की। दो महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अपने भाइयों को समझाया है कि वे भविष्य में दोबारा जेल न आएं। उनके भाइयों ने भी सामान्य जीवन जीने और अपराध की दुनिया में वापस न लौटने का भरोसा दिया।
इस बार नहीं थी कांच और जाली की दीवार
सेंट्रल जेल बठिंडा के अधीक्षक हेमंत शर्मा ने बताया कि सामान्य दिनों में कैदियों की मुलाकात कांच की दीवार के पीछे टेलीफोन के जरिए या वायर-मेश बैरियर के माध्यम से होती है। लेकिन रक्षाबंधन के अवसर पर राज्य सरकार की अनुमति से बहनों को अपने भाइयों से बिना इन बाधाओं के सीधे मिलने की सुविधा दी गई।
सुबह 11 बजे तक करीब 100 बहनों ने बांधी राखी
जेल अधीक्षक के अनुसार, सुबह करीब 11 बजे तक लगभग 100 महिलाओं ने अपने भाइयों को राखी बांध दी थी। जेल में करीब 2,100 कैदी हैं और अनुमान है कि करीब 70 फीसदी कैदियों की बहनें रक्षाबंधन पर उनसे मिलने पहुंच सकती हैं।
सभी कैदियों की बहनों को मिलने की अनुमति
जेल प्रशासन ने बताया कि उचित पंजीकरण के बाद सभी कैदियों की बहनों को उनसे मिलने की अनुमति दी गई। इसमें गंभीर अपराध या छोटे अपराध में जेल में बंद कैदी—दोनों शामिल हैं।
जेल परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि बड़ी संख्या में आने वाली महिलाओं की मुलाकात व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से कराई जा सके।
गरीब परिवारों के लिए भी व्यवस्था
जेल प्रशासन ने बाहर से मिठाई लाने की अनुमति नहीं दी। इसके बजाय जेल की कैंटीन में ही व्यवस्था की गई। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राखी, मिश्री और इलायची की मुफ्त व्यवस्था भी की गई, ताकि कोई बहन अपने भाई को राखी बांधने से वंचित न रहे।
राखी ने रिश्तों में फिर जगाई उम्मीद
रक्षाबंधन का यह अवसर कई कैदियों और उनके परिवारों के लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा। बहनों ने भाइयों को राखी बांधकर उनके बेहतर भविष्य की कामना की, वहीं कई भाइयों ने भी अपराध से दूर रहकर सामान्य जिंदगी शुरू करने का भरोसा दिया।
कुल मिलाकर, रक्षाबंधन पर बठिंडा सेंट्रल जेल में कैदियों और उनकी बहनों के बीच भावुक मुलाकातें हुईं। राज्य सरकार की अनुमति के बाद बहनों को इस दिन कांच और जाली जैसी नियमित मुलाकात की बाधाओं के बिना भाइयों से मिलने और राखी बांधने का मौका मिला। करीब 100 बहनें सुबह तक अपने भाइयों को राखी बांध चुकी थीं, जबकि दिनभर बड़ी संख्या में और परिवारों के पहुंचने की उम्मीद थी।
